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शिक्षकों की शिकायतों के निपटारे के लिये लगेगा ‘शिक्षक दरबार’, ग़ैर-हाजिरी पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति

शिक्षकों को समय पर स्कूल आना और छुट्टी के बाद ही स्कूल से जाना होगा। स्कूलों में सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और पाठ्यक्रम के अनुरूप ही बच्चों को शिक्षा दी जायेगी, यह सभी शिक्षक सुनिश्चित करेंगे और प्रधानाध्यापक इसकी निगरानी करेंगे। इस संबंध में विभाग द्वारा किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जायेगी।

Nawazish Purnea Reported By Nawazish Alam |
Published On :

बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की शिकायतों के निपटारे के लिये हर शनिवार ज़िला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शिक्षक दरबार का आयोजन करेंगे। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने पत्र लिखकर सभी डीईओ और बीईओ को शिक्षक दरबार लगाने की हिदायत दी है। पत्र में एक माह के अंदर स्कूली व्यवस्था को सुधारने का भी निर्देश दिया गया है।

दरअसल, ऐसा देखा जा रहा है कि शिक्षकों की शिकायतें सीधे राज्य मुख्यालय स्तर पर पहुँच रही है। इससे स्पष्ट होता है कि उनकी शिकायतों को न तो प्रखंड और न ही जिला स्तर पर सुना जा रहा है। इतना ही नहीं, रोजाना करीब 50 शिक्षक अपर मुख्य सचिव के कार्यालय में भी पहुँच जाते हैं।

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इसलिये विभाग के एसीएस डॉ. एस सिद्धार्थ ने डीईओ और बीईओ को सप्ताह में एक दिन (शनिवार) विद्यालय अवधि के बाद शिक्षक-दरबार लगाते हुए उनकी समस्या सुनने और उनकी समस्याओं पर विधिसम्मत समाधान निकालने का आदेश दिया है।


इन अधिकारियों के स्तर से समाधान न होने वाली समस्या या शिकायत ही राज्य मुख्यालय पहुँचेगी। जिला स्तर के किसी भी शिक्षा/शिक्षकेत्तर कर्मी की सेवानिवृति का दिया जाने वाला लाभ लंबित नहीं हो और समय पर वेतन भुगतान हो, यह सुनिश्चित करना सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेवारी होगी।

पत्र में कहा गया है, “ट्रांसफर/पोस्टिंग वाले आवेदन को एकत्रित कर जिला के समेकित अभ्यावेदन की सूची राज्य मुख्यालय को भेजेंगे, ताकि स्थानान्तरण/पदस्थापन का अनुरोध लेकर शिक्षक को पटना नहीं आना पड़े। किसी भी शिक्षक को प्रखण्ड मुख्यालय या जिला मुख्यालय नहीं बुलाया जायेगा। शिक्षकों का कार्य विद्यालय में शिक्षण कार्य करना है, मुख्यालय और जिला मुख्यालय का चक्कर लगाना नहीं है।”

‘शिक्षकों की ग़ैर-हाजिरी पर ज़ीरो टॉलरेंस नीति’

पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों की ग़ैर-हाजिरी पर विभाग द्वारा जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जायेगी। सभी शिक्षक अपने डिजिटल लैब/मोबाईल के माध्यम से अपनी उपस्थिति बनाएंगे। इस संबंध में अलग से दिशा निर्देश निर्गत किया जा चुका है। यदि विशेष परिस्थति में किसी शिक्षक को छुट्टी की आवश्यकता होगी तो उस संबंध में वे औपचारिक रूप से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही छुट्टी लेंगे।

शिक्षकों को समय पर स्कूल आना और छुट्टी के बाद ही स्कूल से जाना होगा। स्कूलों में सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता और पाठ्यक्रम के अनुरूप ही बच्चों को शिक्षा दी जायेगी, यह सभी शिक्षक सुनिश्चित करेंगे और प्रधानाध्यापक इसकी निगरानी करेंगे। इस संबंध में विभाग द्वारा किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जायेगी।

साथ ही साथ कला, संगीत, शिल्पकला तथा खेल पर भी स्कूलों में विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा। हर दिन पढ़ाई के बाद कमजोर बच्चों के लिए ब्रिज क्लासेज (मिशन दक्ष) भी चलाए जाएँगे। शनिवार को बच्चों को किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर विशेष रूप से जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी। साथ ही शनिवार को ही बच्चों के पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

आधारभूत संरचना पर होगा ख़ास ध्यान

अपर मुख्य सचिव ने पत्र में सभी स्कूलों की आधारभूत संरचना पर ख़ास ध्यान देने की बात कही है। स्कूल भवन, बेंच डेस्क की व्यवस्था, पीने का पानी, शौचालय, बिजली की व्यवस्था को एक माह के अन्दर सुधारने का निर्देश दिया है।

यदि एक माह के बाद निरीक्षण के दौरान स्कूलों की आधारभूत संरचनाओं में कोई कमी पायी गयी तो इसकी सारी ज़िम्मेदारी ज़िला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों की होगी।

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नवाजिश आलम को बिहार की राजनीति, शिक्षा जगत और इतिहास से संबधित खबरों में गहरी रूचि है। वह बिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मास कम्यूनिकेशन तथा रिसर्च सेंटर से मास्टर्स इन कंवर्ज़ेन्ट जर्नलिज़्म और जामिया मिल्लिया से ही बैचलर इन मास मीडिया की पढ़ाई की है।

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