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सुशील कुमार मोदी: छात्र राजनीति से बिहार के उपमुख्यमंत्री बनने तक का सफर

सुशील मोदी ने अपनी राजनीति की शुरुआत छात्र आन्दोलन से की थी। 1973 में वह पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के जेनरल सेक्रेटरी चुने गये थे। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ते गए। 1974 के जेपी आन्दोलन में भाग लिया और जेल भी गए। आपातकाल के दौरान भी उनको जेल की हवा खानी पड़ी।

Nawazish Purnea Reported By Nawazish Alam |
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बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता सुशील कुमार मोदी का सोमवार की शाम दिल्ली में निधन हो गया। वह पिछले कई महीनों से कैंसर से पीड़ित थे। उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने लिखा, “भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी जी अब हमारे बीच नहीं रहे। पूरे भाजपा संगठन परिवार के साथ-साथ मेरे जैसे असंख्य कार्यकताओं के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है। अपने संगठन कौशल, प्रशासनिक समझ और सामाजिक राजनीतिक विषयों पर अपनी गहरी जानकारी के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। ईश्‍वर दिवंगत आत्मा को चिरशांति और परिजनों को इस शोक की घड़ी में सम्बल प्रदान करे।”

पीएम मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सुशील कुमार मोदी को अपना मूल्यवान सहयोगी और मित्र बताते हुए उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बिहार में भाजपा के उत्थान और जीएसटी के पारित होने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी याद किया।


पीएम मोदी ने सुशील कुमार मोदी के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर को एक्स पर पोस्ट कर कहा, “पार्टी में अपने मूल्यवान सहयोगी और दशकों से मेरे मित्र रहे सुशील मोदी जी के असामयिक निधन से अत्यंत दुख हुआ है। बिहार में भाजपा के उत्थान और उसकी सफलताओं के पीछे उनका अमूल्य योगदान रहा है। आपातकाल का पुरजोर विरोध करते हुए उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी एक अलग पहचान बनाई थी।

पीएम मोदी ने आगे लिखा, “वे बेहद मेहनती और मिलनसार विधायक के रूप में जाने जाते थे। राजनीति से जुड़े विषयों को लेकर उनकी समझ बहुत गहरी थी। उन्होंने एक प्रशासक के तौर पर भी काफी सराहनीय कार्य किए। जीएसटी पारित होने में उनकी सक्रिय भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति!”

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने शोक संदेश में लिखा, “राज्‍यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी जी का आकस्मिक निधन एक अपूरणीय क्षति है। सौम्य स्वभाव, कुशल प्रशासक के रूप में योगदान तथा सार्वजनिक जीवन में शुचिता उनके व्यक्तित्व और कृतित्व में परिलक्षित होते थे। बिहार के उपमुख्यमंत्री, संसद सदस्य और राज्य की विधायिका के दोनों सदनों के सदस्य के रूप में सुशील कुमार मोदी ने उच्च आदर्शों को निभाया।”

सीएम समेत विपक्षी नेताओं ने जताया शोक

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुशील कुमार मोदी के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि दिवंगत सुशील कुमार मोदी जेपी आंदोलन के सच्चे सिपाही थे। उपमुख्यमंत्री के तौर पर भी उन्होंने हमारे साथ काफी वक्त तक काम किया।

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उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा, “मेरा उनके साथ व्यक्तिगत संबंध था और उनके निधन से मैं मर्माहत हूं। मैंने आज सच्चा दोस्त और कर्मठ राजनेता खो दिया है। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।”

राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी उनके निधन पर शोक जताया है। साथ ही लोजपा (रा) के प्रमुख चिराग ने भी सुशील मोदी के निधन पर शोक प्रकट किया है।

राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने सन 1974 के छात्र आंदोलन को याद करते हुए कहा कि हमने एक संघर्ष और आंदोलन का साथी खो दिया है। इनकी कमी हमेशा महसूस करूंगा। उन्होंने कहा कि सन 74 के आंदोलन में हम दोनों साथ में संघर्ष और आंदोलन कर अपनी पहचान बनाए थे, साथ ही हमारे साथ छात्र आंदोलन में हमारी टीम के सदस्य थे। उनके निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी ने भी शोक व्यक्त किया है।

छात्र आन्दोलन से राजनीति की शुरुआत

सुशील मोदी ने अपनी राजनीति की शुरुआत छात्र आन्दोलन से की थी। 1973 में वह पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के जेनरल सेक्रेटरी चुने गये थे। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ते गए। 1974 के जेपी आन्दोलन में भाग लिया और जेल भी गए। आपातकाल के दौरान भी उनको जेल की हवा खानी पड़ी।

सुशील मोदी राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हुए थे। रामजन्म भूमि आन्दोलन के दौरान भी उनको जेल जाना पड़ा था। उर्दू को बिहार के दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने का भी उन्होंने पुरज़ोर विरोध किया था।

चार सदनों का किया प्रतिनिधित्व

सुशील मोदी भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता थे। वह लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रहे। 1990-2004 तक वह लगातार तीन बार विधायक रहे। इस दौरान, मार्च 1996-मार्च 2004 तक वह बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बने। 2004 में वह भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गये।

नवंबर 2005 से जून 2013 और जुलाई 2017 से नवंबर 2020 तक सुशील मोदी बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री रहे।

2006-2020 तक लगातार (तीन टर्म) सुशील मोदी ने बिहार विधान परिषद के सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। वहीं, जून 2013 से जुलाई 2017 के बीच सुशील मोदी बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहे। दिसंबर 2020 में सुशील मोदी राज्यसभा सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए थे। उनका कार्यकाल 2 अप्रैल को ही खत्म हुआ था।

(आईएएनएस इनपुट)

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नवाजिश आलम को बिहार की राजनीति, शिक्षा जगत और इतिहास से संबधित खबरों में गहरी रूचि है। वह बिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मास कम्यूनिकेशन तथा रिसर्च सेंटर से मास्टर्स इन कंवर्ज़ेन्ट जर्नलिज़्म और जामिया मिल्लिया से ही बैचलर इन मास मीडिया की पढ़ाई की है।

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