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सरकारी स्कूलों में तय मानक के अनुरूप नहीं हुई बेंच-डेस्क की सप्लाई

जिन स्कूलों में नये बेंच-डेस्क मिले हैं, वहां पर डेस्क का पटरा जिसकी मोटाई 25 एमएम (1 इंच) होनी चाहिये, उसकी मोटाई 15 एमएम के आसपास है। बेंच और डेस्क दोनों एक साथ लोहे के फ्रेम से जुड़े होने चाहिये, ताकि दोनों को मज़बूती मिलती रहे। लेकिन, ऐसा नहीं पाया गया।

Nawazish Purnea Reported By Nawazish Alam |
Published On :

बिहार के सरकारी स्कूलों में बेंच-डेस्क की आपूर्ति के लिये विभाग की तरफ से पत्र जारी कर कहा गया था कि स्कूलों में तय मानकों के अनुसार सभी स्कूलों में बेंच-डेस्क की आपूर्ति की जाये। लेकिन, अररिया जिले के कई स्कूलों में विभाग द्वारा तय किये गये मानकों के अनुरूप बेंच-डेस्क की सप्लाई नहीं की गई है। बेंच-डेस्क की आपूर्ति किये हुए अभी दो महीने भी नहीं गुज़रे हैं और ये टूटना शुरू हो गया है।

दरअसल, शिक्षा विभाग ने स्कूलों का बुनियादी ढांचा सुधारने के लिये जिन स्कूलों में बेंच-डेस्क नहीं है, वहां पर बेंच-डेस्क उपलब्ध कराने का फैसला लिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने 24 अप्रैल को सभी ज़िला पदाधिकारियों को पत्र लिखकर वित्तीय वर्ष 2024-25 में सभी स्कूलों में बेंच-डेस्क उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

स्कूलों में बेंच-डेस्क खरीदने के लिये विभाग ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 900 करोड़ रुपये जारी किया था। ज़्यादातर राशि जनवरी-2024 में रिलीज़ की गई थी। विभाग की मानें तो 90 प्रतिशत राशि ख़र्च हो चुकी है और लगभग 17 लाख बेंच-डेस्क स्कूलों में पहुंचा दिया गया है।


उल्लेखनीय है कि पहले स्कूलों में बेंच-डेस्क आपूर्ति करने की ज़िम्मेदारी बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (BSEIDC) की थी। यह काम केन्द्रीयकृत तरीक़े से टेंडर के माध्यम से किया जाता था।

लेकिन, अक्टूबर 2023 में जिला स्तर पर अभियंत्रण कोषांग का गठन किया गया, जिसके बाद तय किया गया कि 5 करोड़ रुपये से कम राशि की योजनाएं जिला स्तर पर ही क्रियान्वित होंगी।

वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये विभाग ने सिविल वर्क, फर्नीचर और अन्य आधारभूत संरचना के लिये 3,012 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिसमें 994 करोड़ रुपये रिलीज़ भी कर दिये गये हैं। यह राशि 31 जुलाई तक खर्च की जानी है। इन्हीं पैसों से विभाग द्वारा अधिकृत (इम्पैनल्ड) एजेंसियों से स्कूलों में बेंच-डेस्क ख़रीदा जा रहा है।

केके पाठक ने सभी ज़िला पदाधिकारियों को स्कूलों में सप्लाई किये जा रहे बेंच-डेस्क की क्वालिटी जांचने के लिये एक अनुश्रवण टीम का भी गठन करने का निर्देश दिया था।

बेंच-डेस्क आपूर्ति करने वाली एजेंसी

विभाग ने पूरे बिहार में कुल 2,112 एजेंसियों को स्कूलों में बेंच-डेस्क सप्लाई करने के लिये इम्पैनल्ड किया है, जिसमें 1,424 वेंडर जिला स्तर पर इम्पैनल्ड हैं।

ज़्यादा से ज़्यादा एजेंसी को काम मिले, विभाग ने ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि ये ना लगे कि पदाधिकारी किसी ख़ास समूह को ही काम दे रहे हैं।

पूर्णिया के विवेक कौशल और ओम प्रकाश की ‘बाबा साहब अंबेडकर इंटरप्राइज़’ भी इसी तरह की एजेंसी है, जो स्कूलों में बेंच-डेस्क की सप्लाई करती है। एजेंसी ने बिहार के कई स्कूलों में बेंच-डेस्क की आपूर्ति की है।

विवेक कौशल ने ‘मैं मीडिया’ को बताया कि अररिया जिले के ज़िला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा कुर्साकांटा प्रखंड के लिये सिर्फ चार एजेंसी को ही सप्लाई करने के लिये अधिकृत किया गया, जो कि नियमों का सरासर उल्लंघन है। एजेंसी ने इस संबंध में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को पत्र लिखकर इस ओर ध्यान देने की मांग की है।

बेंच-डेस्क का तय मानक

विभाग ने बेंच-डेस्क सप्लाई करने वाली एजेंसियों के लिये मैटेरियल की क्वालिटी और मानक से संबंधित गाइडलाइन जारी किया है। बेंच-डेस्क का आकार, लकड़ी का प्रकार और अन्य विशेषताओं से संबंधित विस्तृत जानकारी इसमें दर्ज है।

गाइडलाइन के अनुसार, बेंच-डेस्क का फ्रेम शीशम की लकड़ी और उसका पटरा (तख़्त) आम की लकड़ी या मध्यम-घनत्व फाइबरबोर्ड यानी कि एमडीएफ बोर्ड का होना चाहिये।

लकड़ी से बने बेंच का आकार 60 इंच x 18 इंच x 10 इंच होना चाहिये। डेस्क का आकार 60 इंच x 30 इंच x 14 इंच होना चाहिये।

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एजेंसी को बेंच-डेस्क के लिये लोहे का फ्रेम बनाने की भी अनुमति थी। लोहे के फ्रेम वाले बेंच का आकार 60 इंच x 18 इंच x 10 इंच और डेस्क का आकार 60 इंच x 30 इंच x 10 इंच निर्धारित था।

दोनों तरह के फ्रेम वाले एक बेंच-डेस्क सेट की अधिकतम क़ीमत (जीएसटी+अन्य क़ीमत समेत) 5,000 रुपये तय की गई थी। लेकिन, ‘मैं मीडिया’ की पड़ताल में स्कूल में आपूर्ति किये गये बेंच-डेस्क में कई स्तरों पर कमी पाई गई।

तय मानक के अनुरूप नहीं हैं बेंच-डेस्क

‘मैं मीडिया’ की टीम ने अररिया के जोकीहाट प्रखंड स्थित स्कूलों का जायज़ा लिया। ‘मैं मीडिया’ ने पाया के स्कूलों को जो बेंच-डेस्क मिले हैं, वो विभाग के तय मानक के अनुरूप नहीं हैं।

जिन स्कूलों में नये बेंच-डेस्क मिले हैं, वहां पर डेस्क का पटरा जिसकी मोटाई 25 एमएम (1 इंच) होनी चाहिये, उसकी मोटाई 15 एमएम के आसपास है। बेंच और डेस्क दोनों एक साथ लोहे के फ्रेम से जुड़े होने चाहिये, ताकि दोनों को मज़बूती मिलती रहे। लेकिन, ऐसा नहीं पाया गया।

पूछने पर स्कूल के प्रधानाध्यापक कहते हैं कि एजेंसी की तरफ से ऐसा ही सप्लाई किया गया है, इसमें वे लोग क्या करें।

अन्य ज़िलों में भी यही हाल

‘नई दिशा बिहार’ पटना स्थित एक ग़ैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) है। संस्था ने पूर्णिया, अररिया और सहरसा के 130 स्कूलों को मिले बेंच-डेस्क का जायज़ा लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में संस्था ने दावा किया है कि इन सभी 130 स्कूलों में बेंच-डेस्क विभाग द्वारा तय स्टैण्डर्ड के हिसाब से नहीं है।

संस्था की टीम ने अररिया के क़रीब दर्ज भर स्कूलों में सप्लाई हुए बेंच-डेस्क की जांच की। संस्था ने रिपोर्ट में लिखा है कि इन सभी स्कूलों के बेंच-डेस्क के पटरे की मोटाई 25 एमएम से कम है।

एनजीओ ने बिहार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एक जांच टीम गठित करने की अपील की है, ताकि अनियमितताओं को उजागर किया जा सके।

‘नई दिशा बिहार’ के स्टेट कॉर्डिनेटर और क़ानूनी सलाहकार एडवोकेट अमित मिश्रा ने ‘मैं मीडिया’ को बताया कि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिये और तय मानक के अनुरूप बेंच-डेस्क सप्लाई ना करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई करनी चाहिये।

“हमारी टीम ने पटना से लेकर सहरसा, अररिया, पूर्णिया के साथ-साथ कई जगह जांच की है और इसके बाद ही हमलोगों ने यहां से एक लेटर दिया है डिपार्टमेंट को। देखिये आगे क्या होता है। शिक्षा विभाग भी इस पर ढुलमुल रवैया अपना रहा है। हमलोग कोशिश कर रहे हैं कि इसमें कुछ सुधार हो जाये,” उन्होंने कहा।

उन्होंने आगे कहा, “हमलोग ने जांच की है, उसमें तो अभी तक यह बात सामने आई है कि इसमें बहुत ज़्यादा भ्रष्टाचार है। लगभग पूरे बिहार में। अभी भी पटना के शाहबाद ज़ोन में हमारी टीम गई हुई है। उधर से भी अंदाज़ा लग रहा है कि स्थिति कमोबेश सभी जगह एक ही है।”

विभाग द्वारा हो रही कार्रवाई

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य के स्कूलों में अब तक 17,90,310 नये बेंच-डेस्क की आपूर्ति की गई है। इनमें से क़रीब आठ लाख बेंच-डेस्क की जांच भी की गई, जिसमें कई जगह ख़राब क्वालिटी का सामान मिला। जांच के बाद 16,219 बेंच-डेस्क रिप्लेस किये गये।

7,852 बेंच-डेस्क की मरम्मत कराई गई। आपूर्ति संतोषजनक नहीं पाये जाने पर विभिन्न एजेंसियों के ख़िलाफ़ 30,14,785 रुपये का दंड भी लगाया गया है। वहीं, दो एजेंसी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर उनको ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है।

कमी पाये जाने पर रिकवरी करेंगे: डीपीओ

‘मैं मीडिया’ ने तय मानक के अनुरूप बेंच-डेस्क की आपूर्ति नहीं करने को लेकर अररिया के ज़िला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) से बात की। उन्होंने इस संबंध में ज़िला शिक्षा पदाधिकारी से बात करने के लिये कहा। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि यह जांच का विषय है, अगर कोई कमी पायी जायेगी तो एजेंसियों से रिकवरी की जायेगी।

‘मैं मीडिया’ ने अररिया के ज़िला शिक्षा पदाधिकारी से बात करने की कई बार कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। उनके फोन नंबर पर कई बार कॉल किया गया। लेकिन, उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ‘मैं मीडिया’ ने अपने सारे सवाल उनके वाट्सएप नंबर पर भेज दिया है। जवाब आने पर स्टोरी को अपडेट किया जायेगा और जवाब यहां प्रकाशित कर दिया जायेगा।

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नवाजिश आलम को बिहार की राजनीति, शिक्षा जगत और इतिहास से संबधित खबरों में गहरी रूचि है। वह बिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मास कम्यूनिकेशन तथा रिसर्च सेंटर से मास्टर्स इन कंवर्ज़ेन्ट जर्नलिज़्म और जामिया मिल्लिया से ही बैचलर इन मास मीडिया की पढ़ाई की है।

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