इन दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिहार में वोटर अधिकार यात्रा कर रहे हैं। विगत 17 अगस्त से शुरू हुई 16 दिनों की इस यात्रा में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, भाकपा(माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य समेत महागठबंधन की सभी पार्टियों के शीर्ष नेता शामिल हैं।
रोहतास जिले के सासाराम से शुरू हुई ये यात्रा एक सितंबर को पटना में एक बड़ी जनसभा के साथ खत्म होगी।
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बिहार में अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर ये यात्रा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि ये यात्रा महागठबंधन में शामिल पार्टियों के कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकेगा जिसका फायदा विधानसभा चुनावों में मिल सकता है।
इस पूरी यात्रा का केंद्रीय मुद्दा बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां हैं। हालांकि, इसके साथ साथ बेरोजगारी, पलायन जैसे मुद्दे भी महागठबंधन नेता उठा रहे हैं।
लेकिन, सीमांचल से गुजरते हुए राहुल गांधी घुसपैठ की आड़ में क्षेत्र के मुस्लिमों को टारगेट किये जाने जाने के मुद्दे को सिरे से नजरंदाज कर गये, जबकि सीमांचल के मुस्लिमों के लिए ये सबसे बड़ा मुद्दा है।
भाजपा का कोर मुद्दा घुसपैठ
गौरतलब हो कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घुसपैठ के मुद्दा उठाया और इससे निपटने के लिए हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू करने का ऐलान किया और कहा कि इससे जरिए घुसपैठ की समस्या से तय समय में निपटा जाएगा।
उन्होंने अपने भाषण में कहा, “मैं आज एक चिंता और चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं। सोची समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है। एक नये संकट के बीज बोये जा रहे हैं। ये घुसपैठिये देश के नौजवानों की रोजीरोटी छीन रहे हैं। ये घुसपैठिए मेरे देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं होगा।”
“घुसपैठिए भोले-भाले आदिवासियों को भ्रमित कर उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। देश ये बर्दाश्त नहीं करेगा,” पीएम मोदी ने कहा था।
15 अगस्त के भाषण के बाद बिहार के गयाजी जिले में 22 अगस्त को एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने दोबारा घुसपैठ के मुद्दे को उछाला। इस बार उन्होंने एक कदम आगे जाकर ये भी कह दिया कि बिहार में घुसपैठ एक चुनौती बन गई है। उन्होंने कहा कि देश को घुसपैठ की समस्या का सामना कर रहा है और यह चुनौती अब बिहार तक पहुंच चुकी है। उन्होंने ये भी कहा कि ये पार्टियां (कांग्रेस व राजद) तुष्टिकरण की राजनीति के तहत बिहार के लोगों के हक को घुसपैठियों को सौंपना चाहती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह लगातार घुसपैठ का मुद्दा उठा रहे हैं और पिछले दिनों बिहार में घुसपैठ की समस्या का जिक्र किया, उससे साफ है कि बिहार चुनाव में भाजपा का मुख्य मुद्दा घुसपैठ होने जा रहा है।
सीमांचल में बिहार के चार जिले किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार आते हैं। इन जिलों में मुस्लिम आबादी अन्य जिलों के मुकाबले ज़्यादा है। बिहार में मुसलमानों की आबादी 1.7 करोड़ है, जो राज्य की कुल आबादी का 16.87 प्रतिशत है। वहीं अगर मुस्लिम आबादी की बात करें, तो 2011 की जनगणना के अनुसार, कुल मुस्लिम आबादी का 28.3 प्रतिशत हिस्सा सीमांचल में है।
यहां यह भी बता दें कि पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे हुए हैं। वहीं, बांग्लादेश की सीमा सीमांचल से महज कुछेक किलोमीटर ही दूर है। ऐसे में जब बांग्लादेशी घुसपैठ की बात आती है, तो सीमांचल के इन चार जिलों की मुस्लिम आबादी को ही टारगेट किया जाता है।
लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से राहुल गांधी की महत्वपूर्ण यात्रा में ये मुद्दा गायब है। यहां तक कि जब उनकी यात्रा सीमांचल से गुजरी, तब भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के घुसपैठ को लेकर दिये वक्तव्य को काउंटर नहीं किया। राहुल गांधी ने न तो कटिहार और न ही पूर्णिया की जनसभाओं में ही इस मुद्दे पर कुछ बोला। यहां तक कि अररिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा, जबकि राहुल गांधी की यात्रा में शामिल हुए आम मुस्लिमों को उम्मीद थी कि राहुल गांधी इस मुद्दे पर कुछ ठोस बोलेंगे।
आम मुसलमानों की कांग्रेस से उम्मीदें
कटिहार के कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र के डुमर चौक से ठीक पहले यात्रा को लेकर बनाये गये अस्थाई कैम्प के बाहर नेताओं की एक झलक पाने के इंतजार में खड़े हजारों लोगों की भीड़ में मतीउर रहमान भी थे। उन्होंने कहा, “कल मोदी जी (गया जी) आये थे। वो बोले कि घुसपैठिये को निकालना है…11 साल से भाजपा क्या कर रही है? जब आप सत्ता में हैं, तो घुसपैठिए कहां से आ गये?” मतीउर रहमान जिले के कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं। वह इस उम्मीद में आये थे कि राहुल गांधी इस पर कुछ बोलेंगे। “राहुल गांधी उसके जवाब में शायद बोलेंगे या बोले होंगे, हम देखे नहीं हैं। लेकिन हम मोदी जी कल लाइव देखे हैं,” उन्होंने कहा।
कैम्प के बाहर खड़े 75 साल के अनिसुर रहमान घुसपैठ वाले बयान से खासा नाराज नजर आये। कटिहार के सिमरिया निवासी अनिसुर रहमान सवाल पूछते हैं, “हमलोगों के दादा-परदादा यहीं रहते रहते गुज़र गए… अभी हमलोग कैसे घुसपैठी बन गए?” वह चाहते हैं कि राहुल गांधी इसे काउंटर करें। “राहुल गांधी की यात्रा में अभी इसकी चर्चा नहीं हुई है। हम चाहेंगे वो इस पर बात करें।”
राहुल गांधी की चुप्पी से मतीउर रहमान और अनिसुर रहमान जैसे आम मुसलमानों को निराशा हुई होगी।
जानकारों का मानना है कि यह चुप्पी अनायास नहीं हो सकती है, इसके पीछे संभवतः एक सोची समझी रणनीति है। शायद राहुल गांधी इस मुद्दे पर इसलिए नहीं बोलना चा रहे हैं कि बिहार चुनाव में मुद्दा हिन्दू बनाम मुस्लिम न बन जाए।
हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि घुसपैठ कोई मुद्दा ही नहीं है इसलिए राहुल गांधी इस पर तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
अमौर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता मसवूद जफर ने मैं मीडिया के साथ बातचीत में कहा, “घुसपैठ कोई मुद्दा है ही नहीं। सीमांचल के चार जिलों को घुसपैठ के नाम पर बदनाम करके 400 जिलों से वोट लेना है, इसलिए इस गैर जरूरी मुद्दे को उछाला जा रहा है। अगर घुसपैठ हो रही है, तो अमित शाह को जवाब देना चाहिए कि उनके गृहमंत्री रहते ऐसा कैसे हो रहा है। राहुल जी का क्या लेना-देना है इससे। ये कोई मुद्दा है ही नहीं, उस पर राहुल जी क्यों बोलें। मोदीजी बोल रहे हैं क्योंकि उन्हें मजा आ रहा है। वे हिन्दुस्तान को बांटना चाह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सीमांचल के जो जरूरी मुद्दे हैं उन्होंने बखूबी उठा रहे हैं। “पलायन सीमांचल का बड़ा मुद्दा है। शिक्षा, पिछड़ापन और सीमांचल के साथ सौतेलापन यहां के जरूरी मुद्दे हैं। इन सब पर राहुल गांधी लगातार बोल रहे हैं,” उन्होंने कहा।
राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन का मानना है कि राहुल गांधी में ऊहापोह की स्थिति रही है कि वह हिन्दुओं के नेता बनें या सेकुलर। “लेकिन, कांग्रेस को ये समझना चाहिए कि भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद बिहार में उस स्तर का धार्मिक ध्रुवीकरण नहीं होता है, इसलिए राहुल गांधी को चाहिए था कि कम से कम सीमांचल में वह मजबूती से घुसपैठ के खिलाफ बयान देते। इससे स्थानीय मुस्लिम जो सालों से लक्षित किये जा रहे हैं, उन्हें अच्छा लगता कि उनका नेता उनके पक्ष में बोल रहा है,” महेंद्र सुमन ने कहा।
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