बिहार में सफाई कर्मचारी राज्यव्यापी हड़ताल कर रहे हैं। कटिहार में भी नगर निगम कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। करीब 1200 नगर निगम कर्मचारियों के आंदोलन पर चले जाने से कटिहार शहर के कई इलाकों में कचरा उठाव प्रभावित हो गया है।
सड़कों, गली-मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे का ढेर जमा होने लगा है। बारिश के कारण कचरा सड़ने से दुर्गंध फैल रही है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है और संक्रमण फैलने की आशंका भी गहरा गई है।
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सफाई कर्मचारियों की हड़ताल राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है। बिहार के कई शहरों में नगर निकाय कर्मियों के आंदोलन के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। कटिहार में भी नगर निगम के स्थायी, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, अनुबंध, बाह्य सेवा और एनजीओ से जुड़े कर्मचारी अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
तीन सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन
कर्मचारियों ने मंगलवार से हड़ताल शुरू की है। आंदोलनकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सेवा का नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और समान काम के लिए समान वेतन शामिल है। कर्मचारी स्थायी और आउटसोर्सिंग सफाई कर्मियों के मानदेय में समानता की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मियों को स्थायी करने, ठेका और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने तथा एसीपी/एमसीपी योजना को लागू कर लंबित बकाया राशि का भुगतान करने की मांग भी शामिल है।
संघ के उपाध्यक्ष अंबिका पासवान ने बताया कि “बिहार लोकल बॉडीज इंप्लॉइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (एक्टू) के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर यह आंदोलन किया जा रहा है, जिसे अन्य श्रमिक संगठनों (जैसे ऐक्टू) का भी समर्थन मिल रहा है। कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। राज्यभर में स्थानीय निकाय कर्मी चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं, जिसके तहत कटिहार नगर निगम के कर्मचारियों ने 4 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया है।”
कटिहार नगर निगम सफाई कर्मचारी संघ के संरक्षक प्रवेस सलीम ने बताया कि “हमलोग बहुत छोटे स्तर के कर्मी हैं, कोरोना महामारी के टाइम जब लोग घर से बहार नहीं निकलते थे तब भी हमलोग काम कर रहे थे। कोरोना में डॉक्टर और पुलिस को इतना सम्मान मिला लेकिन सफाई कर्मचारी जिन्होंने जान हथेली में लेकर काम किया, उनको कोई सम्मान तो क्या, कोई उनकी बात भी नहीं किया।”
कटिहार नगर निगम संघ के संगठन मंत्री उत्तम कुमार ने बताया कि “यहाँ लगभग 20 सालों से ज्यादा समय से लोग डेली मज़दूरी पे काम करते हैं , लेकिन उनलोगों को परमानेंट नौकरी देने का कुछ नहीं कर रहे हैं। बार बार आवेदन देने बाद भी कुछ नहीं हो रहा। स्कूल में टीचरों की नौकरी स्थाई हो गयी। उनकी सैलेरी भी बढ़ गयी लेकिन सफाई कर्मियों को आज भी न्यूनतम वेतन पे काम करना पर रहा है। इसलिए हमलोगों की मांग को सरकार जल्द से जल्द पूरा करें, जब तक सरकार हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती या महासंघ द्वारा हड़ताल समाप्त करने की घोषणा नहीं की जाती, ये हड़ताल चलती रहेगी।
कचरे से बढ़ी लोगों की परेशानी
हड़ताल के कारण शहर में नियमित कचरा उठाव नहीं हो पा रहा है। बारिश के मौसम में जगह-जगह जमा कचरे से दुर्गंध फैलने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो मच्छरों का प्रकोप बढ़ सकता है और अन्य संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।
कटिहार नगर निगम की महापौर उषा देवी अग्रवाल ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा है कि हड़ताल के कारण उत्पन्न असुविधा के लिए उन्हें खेद है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे खुले में कचरा नहीं फेंकें, गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखें तथा अपने घर और प्रतिष्ठान के आसपास स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। महापौर ने कहा कि नगर निगम प्रशासन की ओर से आपातकालीन सेवाएं जारी रखने और वैकल्पिक सफाई व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
महापौर ने सरकार को लिखा पत्र
पत्र में उन्होंने लिखा, “नगर निगम कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से सुना गया है। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद उनकी मांगों को राज्य सरकार के समक्ष भेज दिया गया है। हमारा प्रयास है कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए आम नागरिकों को नगर निगम की आवश्यक सेवाएं निर्बाध रूप से मिलती रहें।”
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