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सीमांचल के साबिर को मिला United Kingdom का प्रतिष्ठित Chevening Scholarship

2025/26 सत्र के लिए कुल 102,274 उम्मीदवारों ने आवेदन दिया था। इंटरव्यू की प्रक्रिया के बाद 1000 लोगों का चयन हुआ जिसमें से एक कटिहार के मोहम्मद साबिर आलम भी हैं।

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
Published On :
katihar's sabir alam gets the prestigious chevening scholarship of united kingdom

बिहार के कटिहार जिले से ताल्लुक रखने वाले एयरोस्पेस इंजीनियर मोहम्मद साबिर आलम का United Kingdom (UK) में 75 लाख रुपये के स्कॉलरशिप के लिए चयन किया गया है। उन्हें लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में ‘एडवांस्ड मैकेनिकल इंजीनियरिंग’ कोर्स के लिए प्रसिद्ध Chevening Scholarship मिला है। ISRO में कार्यरत 29 वर्षीय साबिर लंदन में एक साल रहकर यह पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स पूरा करेंगे।


हर साल 140 देशों से करीब 1000 से 1200 विद्यार्थियों को शेवनिंग स्काॅलरशिप दी जाती है। साबिर आलम आगामी 27 सितंबर से इम्पीरियल कॉलेज लंदन में अपनी पढ़ाई शुरू करेंगे।

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छोटे गांव से लंदन का सफर

साबिर के पिता मोहम्मद हारून रशीद रिटायर्ड शिक्षक हैं। वह अपने बेटे की इस सफलता से बेहद खुश हैं। ‘मैं मीडिया’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सपने जैसा है कि कटिहार जिलान्तर्गत बारसोई प्रखंड के एक छोटे से गांव छोगड़ा से निकल कर उनका बेटा विश्वविख्यात यूनिवर्सिटी ‘Imperial College London’ में पढ़ेगा।


आगे उन्होंने कहा कि साबिर के बचपन के समय उनके क्षेत्र में सुविधाओं की बेहद कमी थी। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई को प्राथमिकता दी और उनके बेटे की मेहनत और लगन ने उन्हें पहले इसरो और फिर इम्पीरियल कॉलेज, लंदन तक पहुंचा दिया।

“पहले तो घर से बारसोई के लिए भी कोई रूट नहीं था, साइकिल से, या पैदल ही चलते थे। साबिर गांव के स्कूल से 1 से पांचवीं तक पढ़े और फिर उनका नवोदय में चयन हो गया जहां उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की। फिर दक्षणा फाउंडेशन की परीक्षा दी और उनका वहां सेलेक्शन हुआ। उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय पांडिचेरी मिला, वहीं से इंटर किया और इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की,” मोहम्मद हारुन रशीद ने बताया।

हारुन रशीद ने आगे कहा कि साबिर बचपन से ही पढ़ने में बहुत अच्छा था। एक बार जवाहर नवोदय विद्यालय, कटिहार के साइंस टीचर ने उन्हें कहा था कि साबिर एक दिन इलाके का खूब नाम रौशन करेंगे। साबिर आलम ने बचपन से ही सरकारी शिक्षा संस्थानों की प्रवेश परीक्षा में सफलताएं हासिल कर सरकारी स्कॉलरशिप पर पढ़ाई की।

“मेरा बेटा हर जगह फ्री में पढ़ाई किया। मेरा पैसा खर्च नहीं हुआ। इंटर तक जवाहर नवोदय में पढ़ा और फिर आईआईएसटी से चार साल का इंजीनियरिंग कोर्स किया। वह भी फ्री में हुआ क्योंकि उसमें नियम था कि 7.5 CGPA आता है तो सरकार खर्च उठाएगी। इस क्षेत्र में लोगों को स्कॉलरशिप वगैरह के बारे में जानकारी नहीं है। यहां के बच्चों को जानकारी नहीं है कि किस रास्ते से कैसे आगे बढ़ा जाए। किसी मीडिया का भी इस पर फोकस नहीं है, शिक्षा विभाग से भी ये सब बात नहीं आती है,” हारुन रशीद बोले।

बता दें कि 2023 में जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने ऐतिहासिक चंद्रयान 3 मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया था तो इसमें शामिल सैकड़ों इंजीनियर में से एक कटिहार के साबिर आलम भी थे। साबिर 2018 से इसरो में कार्यरत हैं।

क्या है शेवनिंग स्कॉलरशिप?

शेवनिंग स्कॉलरशिप ब्रिटिश सरकार का सालाना स्कॉलरशिप है। इसे सरकार की Foreign, Commonwealth and Development Office (FCDO) और अन्य संगठनों द्वारा फंड किया जाता है। यह स्कॉलरशिप दुनिया भर के 140 देशों से चुने गए प्रतिभाशाली युवाओं और भविष्य के लीडरों को UK की किसी भी यूनिवर्सिटी में एक साल की मास्टर्स डिग्री करने का अवसर देती है। स्कॉलरशिप में चुने गए अभ्यर्थी के सारे खर्च शामिल होते हैं।

2025/26 सत्र के लिए कुल 102,274 उम्मीदवारों ने आवेदन दिया था। इंटरव्यू की प्रक्रिया के बाद 1000 लोगों का चयन हुआ जिसमें से एक कटिहार के मोहम्मद साबिर आलम भी हैं।

शेवनिंग स्कॉलरशिप के लिए केवल वही लोग आवेदन कर सकते हैं जिनके पास स्नातक डिग्री के साथ साथ कम से कम 2 साल के काम का अनुभव हो, जिसमें इंटर्नशिप, पार्ट-टाइम या वॉलेंटियर काम भी गिना जाता है। आवेदकों को UK के विश्वविद्यालयों के 3 अलग-अलग कोर्सेज में आवेदन करने के लिए कहा जाता है। सभी आवेदकों में से कुछ चुनिंदा लोगों को इंटरव्यू के माध्यम से चयनित किया जाता है।

चयनित छात्र के मास्टर्स कोर्स की ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, आने जाने का हवाई किराया, वीज़ा की फीस जैसे अन्य खर्च स्कॉलरशिप में शामिल होते हैं ।

सबसे पहले उम्मीदवारों को शेवनिंग की आधिकारिक वेबसाइट पर फॉर्म जमा करना होता है। इसके बाद सभी प्राप्त आवेदनों की प्रारंभिक योग्यता जांच (Eligibility Check) की जाती है और फिर स्वतंत्र रीडिंग कमेटियां योग्य आवेदनों का मूल्यांकन करती हैं। इसके बाद सफल उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है।

आमतौर पर इंटरव्यू ब्रिटिश दूतावास या ब्रिटिश उच्चायोग में आयोजित होता है। इंटरव्यू में सफल उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की जाती है जिसके बाद उन्हें यूके की किसी यूनिवर्सिटी से ‘अनकंडीशनल ऑफर’ प्राप्त करना होता है। कई महीनों तक चलने वाली इस प्रक्रिया के बाद सितंबर/अक्टूबर में स्कॉलरशिप के लिए चयनित छात्र अपनी पढ़ाई शुरू करते हैं।

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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