चुनाव आते ही शिलान्यास उद्घाटन कार्य और क्रेडिट इन्हीं चीजों की होड़ लग जाती है। इलेक्शन सिर पर है, ऐसे में चुनाव लड़ने वाले नेताजी को दो ही चीज़ तो चाहिए, गेंदा फूल से गुथा हुआ माला और काम का क्रेडिट।

वैसे नेता जी जिस काम का क्रेडिट लेना चाहते हैं फिर चाहे वो काम किसी और के द्वारा ही क्यूँ न किया गया हो। ऐसा ही कुछ मुंगेर में भी हुआ है। क्रेडिट का खिंच तान करने वाला कोई ऐसा वैसा नेता नहीं बल्कि बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री शैलेश कुमार हैं। नीतीश कुमा के करीबी माने जाते हैं, 2005 से लगातार जमालपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

हुआ कुछ यूं कि शैलेश कुमार अपने विधानसभा क्षेत्र के इंदरुख गाँव में अपनी चुनावी रणनीति बनाने पहुंचे। ग्रामीणों का हुजूम था तो लगे हाथ लोगों ने मंत्री जी से सीधा संवाद शुरू कर दिया।

गांव में सड़क, सिंचाई सहित अन्य समस्याएं दूर नहीं होने के कारण ग्रामीणों और मंत्री में नोकझोंक होने लगी। हालांकि मंत्री ने एक योजना का हवाला देकर क्रेडिट लेने की पुरज़ोर कोशिश की लेकिन सामने ही बैठे पूर्व मुखिया संघ के अध्यक्ष ने मंत्री के दावे को झुठला कर बता दिया कि यह कार्य मुखिया ने किया है। भरी सभा में नीतीश कुमार के मंत्री अपना फजीहत होता देख, गाँव से उल्टे पांव चलते बने।