Main Media

Get Latest Hindi News (हिंदी न्यूज़), Hindi Samachar

Support Us

पूर्णिया: बायसी में नदी कटाव का कहर, देखते ही देखते नदी में समाया मकान

पूर्णिया के तटीय इलाकों में लगातार हो रही बारिश के बाद नदियां उफान पर हैं और इस कारण नदी कटाव तेजी से बढ़ रहा है।

Syed Tahseen Ali is a reporter from Purnea district Reported By Syed Tahseen Ali |
Published On :
river erosion wreaks havoc in baisi, house submerged in river in no time

पूर्णिया के तटीय इलाकों में लगातार हो रही बारिश के बाद नदियां उफान पर हैं और इस कारण नदी कटाव तेजी से बढ़ रहा है। बायसी के मुंशी टोले से एक भयावह तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक मकान देखते ही देखते नदी में समा गया। इस कटाव ने लोगों के आशियाने और आजीविका को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।


बायसी अनुमंडल की लगभग सभी पंचायतें इस समय कटाव के गंभीर संकट से जूझ रही हैं। ताड़ाबाड़ी पंचायत में अब तक दर्जनों घर नदी में विलीन हो चुके हैं। एक मस्जिद सहित कई मकान भी इस कटाव की भेंट चढ़ गए हैं। स्थानीय लोगों और पूर्व मुखिया ने बताया कि गांव पूरी तरह से कटाव की चपेट में आ गया है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई राहत नहीं पहुंचाई गई है।

Also Read Story

“मखाना की फसल में कीड़ा लग जाता है, पत्ता गल जाता है”

क्या नीलगाय-किसान का संघर्ष बदल रहा बिहार का क्रॉप पैटर्न?

मोल का पानी, मुफ़्त का ज़हर: अररिया की मांस फ़ैक्ट्रियों का जलवायु सच

बिहार में लू का कहर: बढ़ता तापमान, उलझे आंकड़े और अधूरी तैयारी

क्यों सूख रहा है मिथिलांचल का भू-जल?

बिहार के पूर्वी चंपारण में क्यों कम हो रही गन्ने की पैदावार?

सुपौल में क्यों घट रही जूट की खेती?

कोसी कटान में उजड़े आशियाने, दशकों से पुनर्वास के इंतज़ार में बाढ़ विस्थापित

बिहार में दलहन की खेती पर जलवायु परिवर्तन का कैसा असर?

बायसी प्रखंड के गंगार, श्रीपुर मल्लाहटोली, यादव टोला, चांदपुर भसया जैसे दर्जनों गांव भी नदी कटाव से प्रभावित हैं। इस क्षेत्र के लोगों को अपने घरों और खेतों से हाथ धोना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल कटाव की समस्या बढ़ती जा रही है, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।


कटाव प्रभावित क्षेत्रों के लोग सरकार से तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कटाव पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो और भी कई मकान, खेत और बुनियादी सुविधाएं नदी में समा सकती हैं। लोग आशा कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही कोई कदम उठाएगा ताकि उनकी जान-माल की हिफाजत की जा सके।

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

सैयद तहसीन अली को 10 साल की पत्रकारिता का अनुभव है। बीते 5 साल से पुर्णिया और आसपास के इलाकों की ख़बरें कर रहे हैं। तहसीन ने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

Related News

लीची पर फ्लाई ऐश की मार, मशरूम बना मुजफ्फरपुर के किसानों का सहारा

किशनगंज में मक्के की खेती कैसे बन रही है मानव-हाथी संघर्ष की वजह?

रामसर दर्जा मिलने से बिहार के वेटलैंड्स की स्थिति में क्या बदलाव आया है?

हर साल ग्रीन बजट लाने वाला बिहार आंकड़ों में कितना ‘ग्रीन’ है?

जलवायु संकट की मार झेलते बिहार के किसान, प्री-मानसून ओलावृष्टि से तबाह खरीफ फसल

नाव, नदी और नसीब: कोसी के गांवों में मातृत्व की अधूरी कहानियाँ

चरम मौसमी घटनाएं रोक रही बच्चों की शिक्षा की रफ्तार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

VB-G RAM G: लागू होने से पहले ही क्या नया कानून मनरेगा मज़दूरों का हक़ छीन रहा?

बिहार के नवादा में अतहर की मॉब लिंचिंग के डेढ़ महीने बाद भी न मुआवज़ा मिला, न सबूत जुटे

बिहार चुनाव के बीच कोसी की बाढ़ से बेबस सहरसा के गाँव

किशनगंज शहर की सड़कों पर गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाएं

किशनगंज विधायक के घर से सटे इस गांव में अब तक नहीं बनी सड़क