विविधताओं से भरे बिहार में भाषा को लेकर भी कमाल की विविधता है। बिहार के बाहर के लोगों को अकसर ये गलतफहमी रहती है कि बिहार में सिर्फ भोजपुरी ही बोली जाती है। जबकि इसके उलट बिहार में कई और भाषाए बोली जाती है। अगर हम देखे तो बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों में मुख्यतः 6 भाषाएँ बोली जाती है। मगही, भोजपुरी, मैथिली, अंगिका, वज्जिका और उर्दू मिश्रित हिंदी वह भाषाएँ है जो बोली जाती है।

 

मगही भाषा

मगध जनपद में बोली जाने वाली मगध भाषा ही आजकल मगही के नाम से लोकप्रिय है। वर्तमान में मगही भाषा मुख्यतः पटना, गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद और अरवल में बोली जाती है। प्राचीन महाजनपद की प्रमुख भाषा हुआ करती थी और आज भी मगध जनपद में यही भाषा बोली जाती है।

 

भोजपुरी भाषा

ऐतिहासिक रूप से देखे तो राजा भोज के वंशकों ने अपने राज्य की स्थापना मल्ल जनपद में की थी और अपने राजधानी का नाम भोजपुर रखा था। और कुशीनगर के नाम पर इस भू-भाग में बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी कहलायी। वर्तमान में देखे तो भोजपुरी भाषा मुख्यतः बिहार के बक्सर, सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण, वैशाली, भोजपुर, रोहतास, बक्सर, भभुआ और आसपास के इलाकों में भोजपुरी बोली जाती है। इस क्षेत्र को भोजपुरी क्षेत्र भी कहा जाता है।

 

मैथिली भाषा

मैथिली मुख्यतः दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया,सीतामढ़ी और पूर्णिया में बोली जाती है। मैथिली भाषा का वर्तमान स्वरूप 10वीं शताब्दी का माना जाता है। एक अनुमान के अनुसार लगभग 1.5 करोड़ लोग मैथिली भाषा बोलते है।

 

अंगिका भाषा

अंगिका भाषा मैथिली का ही एक परिवर्तित रूप है। इसे मैथिली का उपभाषा भी माना जाता है। अंगिका भाषा भागलपुर जिले की स्थाई भाषा है। इसे भागलपुरी भी कहा जाता है। अंगिका भाषा मुख्यतः जमुई, लखीसराय, मुंगेर, बेगूसराय और खगड़िया में बोली जाती है।

 

वज्जिका भाषा

वज्जिका भाषा मुख्यतः मुजफ्फरपुर जिले की भाषा है। वज्जिका भाषा को भी मैथिली का ही एक रूप माना जाता है।

 

उर्दू मिश्रित हिंदी

ऐसे तो पुरे बिहार में ही उर्दू मिश्रित हिंदी बोली जाती है। लेकिन मुख्यतः सीमांचल के किशनगंज में उर्दू मिश्रित हिंदी बोली जाती है।