बिहार के विश्वविद्यालयों और नवस्थापित सरकारी डिग्री कॉलेजों में स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों की बड़ी भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के अध्यक्ष प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने कल एक न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि सितंबर में लगभग सात हज़ार से अधिक पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी करने की तैयारी की जा रही है। इस भर्ती में राज्य के विश्वविद्यालयों के साथ-साथ 211 नए डिग्री कॉलेजों के रिक्त पद भी शामिल होंगे।
आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों से रिक्तियों का ब्योरा मांगा गया है। कई विश्वविद्यालयों ने आरक्षण रोस्टर के अनुसार रिक्तियों की जानकारी भेज दी है। जिन विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें शीघ्र रिक्तियां भेजने का निर्देश दिया गया है। सभी विश्वविद्यालयों से अंतिम आंकड़े मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में नए 211 डिग्री कॉलेजों में लगभग 2,532 पद रिक्त हैं। शिक्षा विभाग से इन रिक्तियों की अंतिम स्वीकृति मिलते ही एक माह के भीतर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। आयोग को उम्मीद है कि सितंबर तक शिक्षा विभाग से सभी रिक्तियों का अंतिम विवरण प्राप्त हो जाएगा।
नई नियमावली के तहत होगी भर्ती
प्रो. गिरीश कुमार चौधरी के अनुसार, भर्ती ‘स्टेट यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर, 2026’ नियमावली के तहत की जाएगी। चयन प्रक्रिया 200 अंकों पर आधारित होगी, जिसमें 175 अंकों की लिखित परीक्षा और 25 अंकों का इंटरव्यू होगा। लिखित परीक्षा तीन घंटे की होगी। इंटरव्यू में अभ्यर्थियों की टीचिंग स्किल्स के लिए 13 अंक तथा व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए 12 अंक निर्धारित किए गए हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इंटरव्यू की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। नई भर्ती नियमावली के अनुसार अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष निर्धारित की गई है।
प्रो. गिरीश कुमार चौधरी ने कहा कि 211 नए डिग्री कॉलेजों में वर्तमान में कार्यरत संविदा शिक्षकों के पदों पर नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति होने के बाद उन्हें नियमित चयनित अभ्यर्थियों से प्रतिस्थापित (Replace) किया जा सकता है। यही कारण है कि इन कॉलेजों में कार्यरत संविदा शिक्षक भी आगामी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। स्थायी नियुक्ति पाने के लिए उन्हें भी अन्य अभ्यर्थियों की तरह लिखित परीक्षा और निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
आगे उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग से रिक्तियां प्राप्त होने के बाद आयोग का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से पूरा करना है ताकि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरा जा सके।
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