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तमाम उपलब्धियों के बावजूद गुमनाम ज़िन्दगी जी रहे पेंटर श्रीनारायण सिंह

अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड के मधुरा उत्तर के सिंह टोला निवासी श्रीनारायण सिंह पिछले कई दशकों से चित्रकारी कर रहे हैं।‌ श्री नारायण सिंह स्वतंत्रता सेनानी सह चित्रकार विश्वनाथ सिंह के पुत्र हैं।‌

ved prakash Reported By Ved Prakash |
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अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड के मधुरा उत्तर के सिंह टोला निवासी श्रीनारायण सिंह पिछले कई दशकों से चित्रकारी कर रहे हैं।‌ श्री नारायण सिंह स्वतंत्रता सेनानी सह चित्रकार विश्वनाथ सिंह के पुत्र हैं।‌ उनकी शानदार चित्रकारी केवल अररिया जिला नहीं बल्कि पूरे बिहार में मशहूर रही है और इसी के चलते भारत के पूर्व प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति समेत कई दिग्गज नेताओं ने इन्हें सम्मानित किया है।

फिलहाल श्री नारायण सिंह की उम्र 80 साल से ज्यादा हो चुकी है, और कुछ समय पहले एक दुर्घटना में पैर में चोट लगने के कारण बैसाखी पकड़ कर चलते हैं। शारीरिक कमजोरी और उम्र के इस पड़ाव में भी चित्रकारी को लेकर उनका जज्बा जस का तस बना हुआ है।

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श्री नारायण सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता विश्वनाथ सिंह से प्रभावित होकर चित्रकारी शुरू की थी। केवल अररिया जिला ही नहीं बल्कि पूरे बिहार राज्य में उनकी पेंटिंग का मान था। वह बताते हैं कि जितने भी मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह से लेकर केबी सहाय और नीतीश कुमार तक, सबको उन्होंने अपनी चित्रकारी से सम्मानित किया था।


भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से अपनी मुलाकात का किस्सा सुनाते हुए श्री नारायण सिंह बताते हैं कि नेहरू बीरपुर आए थे, तो उन्होंने खड़े-खड़े नेहरु की तस्वीर बना दी थी जिससे खुश होकर नेहरू ने उन्हें एक पारकर पेन और ₹100 का नोट इनाम में दिया था।

बता दें कि श्री नारायण सिंह की भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से कई बार मुलाकात हो चुकी है। नारायण सिंह बताते हैं कि कलाम साहब मुझे हृदय से मानते थे इसलिए उन्होंने मुझे कई बार बुला कर सम्मानित किया और कई कार्यक्रमों में मेरे साथ शिरकत की।

इतना सब कुछ हासिल करने के बाद श्री नारायण सिंह आज भी एक गुमनाम सी जिंदगी जी रहे हैं। उनका मानना है कि वह जिस सम्मान और प्रसिद्धि के हकदार थे वह उन्हें मिल नहीं सकी। वह बताते हैं कि आज उनके किसी सम्मानित जगह पर ना होने के कारण ही उनके खानदान की नई पीढ़ी ने चित्रकारी में रुचि नहीं ली।

श्री नारायण सिंह का मानना है कि आधुनिक वैज्ञानिक चकाचौंध में चित्रकला काफी पीछे छूट गई है। इसीलिए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी से भी निवेदन किया था कि वह चित्रकला की और थोड़ा ध्यान दें लेकिन वह ध्यान नहीं दे सके।

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अररिया में जन्मे वेद प्रकाश ने सर्वप्रथम दैनिक हिंदुस्तान कार्यालय में 2008 में फोटो भेजने का काम किया हालांकि उस वक्त पत्रकारिता से नहीं जुड़े थे। 2016 में डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा। सीमांचल में आने वाली बाढ़ की समस्या को लेकर मुखर रहे हैं।

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