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Orange Farming in Darjeeling: संतरे के लिए प्रख्यात दार्जिलिंग में संतरा उत्पादन दम तोड़ रहा

दार्जिलिंग के संतरे हमेशा से प्रसिद्ध रहे हैं लेकिन पिछले दो तीन सालों में इसके उत्पादन में भारी कमी आने से यहां के किसानों को वादी के इस पारंपरिक फल उत्पादन के अंत का डर सताने लगा है।

Sumit Dewan Reported By Sumit Dewan | Darjeeling |
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पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग का संतरा एक समय पूरे पूर्वी भारत में विख्यात था। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 2001-02 तक पश्चिम बंगाल देश का पांचवां सबसे अधिक संतरे का उत्पादन करने वाला राज्य हुआ करता था। यहां संतरे की उत्पादक दर महाराष्ट्र से भी बेहतर हुआ करती थी। समय के साथ संतरे के उत्पादन में कमी आ गई। यहाँ तक कि दार्जिलिंग में पिछले दो तीन सालों में सिलीगुड़ी और आस पास के शहरों में संतरे का निर्यात नाम मात्र रह गया है।

मन कुमार राय पिछले दस सालों से दार्जिलिंग के जोरबंग्लो सुखियापोखरी में संतरे की खेती कर रहे हैं। उनके अनुसार पिछले दो सालों में संतरे का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों ही बहुत कम हो चुके हैं। पेड़ के पत्ते एक अनजान बीमारी का शिकार हो कर पीले हो रहे हैं और संतरे का आकर भी पहले के मुकाबले लगभग आधा हो चुका है। मन कुमार राय पेड़ों के खराब होने के लिए ग्लोबल वार्मिंग को एक बड़ी वजह मानते हैं। वह चाहते हैं कि उन जैसे संतरे की खेती करने वाले तमाम परेशान किसानों को सरकारी मदद मिले ताकि सालों पुराने दार्जिलिंग का यह मशहूर फल उत्पादन दोबारा से सेहतमंद हो सके।

मन कुमार की तरह सुकराज राय भी संतरे के घटते उत्पादन से चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि पहले हर साल उनके संतरे के खेत में 20 हज़ार रुपए का उत्पादन होता था लेकिन पिछले दो वर्षों से वह एक भी संतरा नहीं बेच सके हैं। उन्होंने बतया कि संतरे की झाड़ियों में हर तरह की ज़रूरी दवाइयां और छिड़काव करने के बावजूद संतरे की पैदावार कम हो रही है।


दार्जिलिंग के संतरे हमेशा से प्रसिद्ध रहे हैं लेकिन पिछले दो तीन सालों में इसके उत्पादन में भारी कमी आने से यहां के किसानों को वादी के इस पारंपरिक फल उत्पादन के अंत का डर सताने लगा है।

दिलीप राय 1994 से संतरे की खेती कर रहे हैं लेकिन बीते वर्ष उन्हें 15 हजार रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

दार्जिलिंग के निकट कर्सियांग कृषि विभाग के अधिकारी दुष्यंत प्रधान ने ‘मैं मीडिया’ से बातचीत में बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित आत्मा स्कीम के तहत किसानों को इस तरह की दुविधाओं से निकालने के लिए विभाग हर संभव मदद के लिए तैयार है। उन्होंने वायरस और मिटटी में रहने वाले अनेक प्रकार के कीड़ों को संतरे के उत्पादन में बाधा बताए हुए कहा कि किसान जब चाहें विभाग कार्यालय में आकर हम से मुफ्त कंसल्टेशन ले सकते हैं, हम किसानों को लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी देते हैं।

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सुमित दिवान पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग ज़िले की ख़बरों पर नज़र रखते हैं।

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