बिहार में किशनगंज हवाई अड्डे के रनवे के विस्तार के लिए सरकार ने ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने किशनगंज अंचल के जुलजुली मौजा में 14.69 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को लेकर 29 जुलाई 2026 को नोटिस जारी किया। स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
किशनगंज नगर परिषद स्थित जुलजुली पूरब टोला के लोगों का कहना है कि सरकार पहले ही कृषि विभाग के भवन, हवाई अड्डा और बीएसएफ के लिए उनसे सैकड़ों बीघा जमीन ले चुकी है। अब एक बार फिर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है जिसमें अधिकतर ज़मीन खेती-बाड़ी की है। जुलजुली में ज़्यादातर लोगों का रोज़गार खेती से जुड़ा है ऐसे में जमीन चली गई तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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तारा बेगम और असमा खातून की जमीन भी अधिग्रहण की सूची में शामिल है। दोनों महिलाएँ मजदूरी करती हैं और अपने-अपने परिवार की अकेली कमाने वाली हैं। उनका कहना है कि जमीन चली गई तो घर और खेती, दोनों का सहारा छिन जाएगा, इसलिए वे सरकार को अपनी जमीन नहीं देना चाहतीं।
बता दें कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 15 अगस्त को अपने भाषण में कहा था कि आपात स्थिति में विमानों की लैंडिंग के लिए बिहार सरकार हर जिले में एयरस्ट्रिप बनाने की योजना पर काम कर रही है। इससे तीन हफ्ते पहले किशनगंज जिला पदाधिकारी ने ज़मीन अधिग्रहण का नोटिस जारी किया।
जुलजुली निवासी मुजीबुर रहमान दिहाड़ी मजदूर हैं और उनके बेटे महाराष्ट्र में काम करते हैं। परिवार ने मिलकर हाल ही में अपनी जमीन पर घर बनाना शुरू किया था, लेकिन अधिग्रहण नोटिस में उनकी ज़मीन भी शामिल है। उनकी माँग है कि मुआवज़े के साथ साथ इस ज़मीन के बदले उन्हें सड़क के किनारे जमीन दी जाये वरना वे सरकार को अपनी ज़मीन नहीं देंगे।
जुलजुली का पूरब टोला करीब सौ साल पुराने एक मज़ार के लिए भी जाना जाता है। इस मज़ार की जमीन भी अधिग्रहण के दायरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मज़ार से आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के हजारों लोगों की आस्था जुड़ी है।
मज़ार के सामने से गुजरने वाली मुख्य सड़क जुलजुली को किशनगंज शहर और आसपास के गांवों से जोड़ती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगर सड़क भी अधिग्रहण की जद में आती है तो गांव के लोगों के लिए आवाजाही का रास्ता सीमित हो जाएगा और लैंडलॉक जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
इस मामले में हमने किशनगंज के अंचल अधिकारी राहुल कुमार से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन ने ग्रामीणों से अंचल कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराने को कहा था। प्राप्त आपत्तियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भू-अर्जन कार्यालय भेजा जाएगा, जहां इन आपत्तियों पर अंतिम निर्णय लेना है। मुआवजे के सवाल पर राहुल कुमार ने बताया कि भू-अर्जन कार्यालय ही मुआवजे की राशि तय करेगा और इससे जुड़े अन्य फैसले भी वहीं लिए जाएंगे।
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