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बिहार के जलवायु पत्रकारों के लिए ऑनलाइन रिपॉजिटरी

बिहार के ग्रामीण इलाकों में क्लाइमेट पर काम कर रहे हिंदी पत्रकारों की सहूलियत के लिए हमने यह ऑनलाइन रिपॉजिटरी बनाया है। इसमें समय-समय पर बिहार से जुड़े क्लाइमेट संबंधी शोध और आंकड़ों को अपडेट किया जाता रहेगा।

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बिहार के ग्रामीण इलाकों में क्लाइमेट पर काम कर रहे हिंदी पत्रकारों की सहूलियत के लिए हमने यह ऑनलाइन रिपॉजिटरी बनाया है। इसमें समय-समय पर बिहार से जुड़े क्लाइमेट संबंधी शोध और आंकड़ों को अपडेट किया जाता रहेगा।


1. Green Budget

बिहार का ग्रीन बजट: बिहार का ‘ग्रीन बजट’ विकासात्मक पहलों में पर्यावरणीय प्राथमिकताओं को जोड़कर संसाधन आवंटन को एक हरित भविष्य की ओर निर्देशित करने की एक प्रक्रिया है। बिहार 2020-21 में ग्रीन बजटिंग शुरू करने वाला भारत का पहला राज्य बना।

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  • बजटीय आवंटन और वृद्धि: वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल ग्रीन बजट आवंटन 13,823.39 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 39.34% की वृद्धि दर्शाता है।
  • आर्थिक महत्व: यह ग्रीन बजट राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 1.42% और राज्य के कुल बजट का 4.96% है।
  • मुख्य उद्देश्य: संसाधनों (निधि और नीतियों) की ट्रैकिंग करना, अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और संसाधनों का कुशल आवंटन सुनिश्चित करना इसका लक्ष्य है।
  • नेट-जीरो लक्ष्य: बिहार ने ऊर्जा, उद्योग, परिवहन और निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए 2070 तक शुद्ध-शून्य (Net-Zero) उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।
  • कार्यप्रणाली: पर्यावरण बजट आवंटन को टैग करने के लिए रियो-मार्कर (Rio-marker) पद्धति (UNEP उपकरण) का उपयोग किया जाता है, जो खर्चों को उनके प्रभाव के आधार पर वर्गीकृत करती है।
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के साथ संरेखण: ग्रीन पहलों को विशिष्ट SDG लक्ष्यों के साथ मैप किया गया है, जिसमें विशेष रूप से SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता), SDG 2 (शून्य भूख), और SDG 15 (भूमि पर जीवन) पर ध्यान दिया गया है।
  • प्रमुख विषयगत क्षेत्र: बजट का बड़ा हिस्सा हरित बुनियादी ढांचे (24.65%), प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (19.24%), हरित अर्थव्यवस्था और रोजगार (14.83%), और सतत भूमि उपयोग (14.03%) के लिए आवंटित है।
  • विभागीय भागीदारी: कुल 20 विभागों ने अपनी योजनाओं का विवरण दिया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग की सभी योजनाएं पूरी तरह से पर्यावरण को समर्पित (Category-A) हैं।
  • महत्वपूर्ण कार्यक्रम:
  1. जल-जीवन-हरियाली अभियान (JJHA): जल संरक्षण और वनीकरण के लिए राज्य की एक प्रमुख पहल।
  2. चौथा कृषि रोडमैप (2023-28): मृदा स्वास्थ्य, जलवायु लचीलापन और जैविक गलियारे (Organic Corridor) पर केंद्रित।
  3. बिहार स्वच्छ ईंधन योजना: वायु प्रदूषण कम करने के लिए डीजल तिपहिया वाहनों पर प्रतिबंध और सीएनजी/इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन।
  4. प्रदूषण निगरानी: बिहार ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लॉक स्तर पर परिवेशी वायु गुणवत्ता की निगरानी शुरू करने वाला देश का पहला राज्य है।

2. Climate Vulnerability Assessment for Adaptation Planning in India Using a Common Framework

इस रिपोर्ट में भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील (Relatively Highly Vulnerable) राज्यों की पहचान उनके ‘वल्नरेबिलिटी इंडेक्स’ (Vulnerability Index – VI) के आधार पर की गई है।


बिहार भारत में वर्तमान जलवायु जोखिमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (Relatively Highly Vulnerable) राज्यों में से एक माना गया है। 29 राज्यों के आकलन में, बिहार 0.614 के ‘वल्नरेबिलिटी इंडेक्स’ (VI) के साथ छठे स्थान पर है।

बिहार की स्थिति के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:

  • व्यापक क्षेत्रीय संवेदनशीलता: बिहार के लगभग 81.58% जिले (38 में से 31) संवेदनशीलता की उच्चतम श्रेणी (Quartile I) में आते हैं। पूरे भारत के 100 सबसे संवेदनशील जिलों में से 23 जिले बिहार में स्थित हैं। राज्य का सबसे संवेदनशील जिला किशनगंज (VI: 0.73) है, जबकि सबसे कम संवेदनशील रोहतास (VI: 0.36) पाया गया है। अन्य अत्यधिक संवेदनशील जिलों में कटिहार, पूर्णिया, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, दरभंगा और अररिया शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश उत्तर बिहार में स्थित हैं।
  • संवेदनशीलता के प्रमुख कारक (Drivers): प्रति 1,000 ग्रामीण आबादी पर वन क्षेत्र की भारी कमी और खाद्यान्न की पैदावार में उच्च अस्थिरता (Yield Variability), जो संवेदनशील कृषि-जलवायु परिस्थितियों को दर्शाती है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी का उच्च अनुपात (33.74%), सीमांत और छोटे भूमि जोतों (Marginal and small landholdings) का उच्च प्रतिशत और कार्यबल में महिलाओं की कम भागीदारी। राज्य में खराब स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य कर्मियों की कम संख्या की समस्या है। राज्य-विशिष्ट मूल्यांकन में, 38 में से 36 जिलों में खराब स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को संवेदनशीलता का एक प्रमुख कारक पाया गया। मनरेगा (MGNREGA) जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, जो वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करती हैं, राज्य की कम अनुकूलन क्षमता (Adaptive Capacity) में योगदान देती है।
  • जनसांख्यिकीय और आर्थिक संदर्भ: बिहार का जनसंख्या घनत्व अत्यंत उच्च है, जो 1,106 व्यक्ति प्रति किमी² है। 2016 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि (23%), उद्योग (17%) और सेवाओं (60%) का योगदान है। शिशु मृत्यु दर (IMR) प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 38 है और साक्षरता दर 61.80% है।

3. Bihar Economic Survey 2025-26

यह स्रोत बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 का आधिकारिक दस्तावेज़ है, जिसे बिहार सरकार के वित्त विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इसमें राज्य की 9.2 प्रतिशत की प्रभावशाली विकास दर और न्याय के साथ समावेशी विकास की यात्रा का विस्तृत विवरण दिया गया है। सर्वेक्षण के माध्यम से कृषि, बुनियादी ढांचे, ई-गवर्नेंस और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति का व्यापक सांख्यिकीय विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के संदेशों के साथ, यह रिपोर्ट राज्य की आर्थिक समृद्धि और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों को रेखांकित करती है। इसमें शब्दावली और तालिकाओं की एक विस्तृत सूची शामिल है जो वित्तीय प्रबंधन और ग्रामीण विकास की बारीकियों को समझने में मदद करती है। अंततः, यह दस्तावेज़ नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए बिहार के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण खाका प्रदान करता है।

बिहार के आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, राज्य में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, वन और प्रदूषण से संबंधित प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • जलवायु परिवर्तन और राज्य की पहल: जलवायु परिवर्तन के खतरों को देखते हुए राज्य के 30 जिलों में जलवायु-अनुकूल कृषि कार्यक्रम लागू किया गया है, जिसके लिए 238.49 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जल-जीवन-हरियाली मिशन मिशन के तहत 2019-24 के दौरान 1573 लाख पौधे लगाए गए हैं ताकि हरित आवरण बढ़ाया जा सके और पर्यावरण संतुलन बना रहे।
  • वन और वानिकी (Forestry): ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (2023)’ के अनुसार, 2011-2023 के दौरान बिहार में वन आवरण में 687 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है। बिहार के कुल वनों में आधे से अधिक ‘खुले वन’ (Open Forests) हैं, जबकि ‘मध्यम घने वन’ 44 प्रतिशत हैं। राज्य का कुल कार्बन स्टॉक 2023 के लिए 58,451 हजार टन अनुमानित किया गया है, जो 2021 की तुलना में 1570 हजार टन अधिक है। सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में वानिकी और लॉगिंग क्षेत्र का योगदान 2011-12 से 2023-24 के बीच 10.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।
  • प्रदूषण नियंत्रण: बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BSPCB) राज्य के 23 जिलों में 35 ‘कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन’ संचालित कर रहा है।बोर्ड द्वारा गंगा नदी के 34 स्थानों और इसकी सहायक नदियों के 70 स्थानों पर जल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाती है। पटना के विभिन्न मोहल्लों में ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए शोर के स्तर की निगरानी की जा रही है। कृषि विभाग ने खेतों में पराली जलाने के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक कार्य समूह बनाया है और इसे रोकने के लिए दंडात्मक कार्रवाई भी की जा रही है।
  • जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण: राज्य सरकार बाघ अभयारण्यों (Tiger Reserves) और वन्यजीव अभयारण्यों के संरक्षण पर ध्यान दे रही है। वर्ष 2023-24 में वन्यजीव आवासों के विकास के लिए 1428 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने इको-टूरिज्म और पार्कों के विकास के लिए 2023-24 में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था।
  • आपदा प्रबंधन: राज्य सरकार ने 2021-22 से 2023-24 के दौरान आपदा प्रबंधन के लिए 4237.33 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। आपदाओं के प्रति समुदाय को जागरूक और सुरक्षित बनाने के लिए 30,132 जीविका कैडरों को प्राकृतिक आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित किया गया है।

4. The Climate Dictionary

यह स्रोत यूएनडीपी (UNDP) द्वारा प्रकाशित ‘क्लाइमेट शब्दकोश’ है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से जुड़ी जटिल अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाना है। इस दस्तावेज में जलवायु संकट से निपटने के लिए उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण शब्दावलियों जैसे एडेप्टेशन, ब्लू इकॉनमी और कार्बन रिमूवल की स्पष्ट व्याख्या की गई है। इसमें बताया गया है कि कैसे यह संगठन दुनिया भर के देशों को पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने और सतत समाधान खोजने में मदद कर रहा है। यह संसाधन स्थानीय समुदायों और राष्ट्रीय नीतियों के बीच के अंतर को कम करने के लिए सटीक जानकारी प्रदान करता है। इन सामग्रियों के माध्यम से पाठकों को पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु कार्यवाही के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य आम जनता के बीच जलवायु साक्षरता को बढ़ाना है ताकि वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाए जा सकें।

5. Bihar State Action Plan on Climate Change and Human Health 2022-27

यह स्रोत बिहार राज्य की जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य कार्य योजना (2022-27) का एक विस्तृत खाका है, जिसे भारत सरकार और बिहार सरकार के विभिन्न स्वास्थ्य विभागों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है। इस दस्तावेज़ में पर्यावरणीय बदलावों के कारण राज्य की जनता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों, जैसे कि वायु प्रदूषण, अत्यधिक गर्मी और संक्रामक रोगों के बढ़ते खतरों का विश्लेषण किया गया है। इसमें बिहार की भौगोलिक और जलवायु स्थितियों का विवरण देते हुए उन विशिष्ट बीमारियों की पहचान की गई है जो बढ़ते तापमान और बाढ़ जैसी आपदाओं से सीधे जुड़ी हैं। इस योजना का मुख्य लक्ष्य राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सुदृढ़ और लचीला बनाना है ताकि भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना किया जा सके। साथ ही, यह रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण और हरित स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करती है। इसमें जिला स्तर पर कार्यान्वयन के लिए बजटीय प्रावधानों और संगठनात्मक ढांचे की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई है।

6. Climate Change and Makhana Farmers of Bihar: Opportunities, Challenges and Solutions

यह रिपोर्ट बिहार में मखाना की खेती से जुड़े पारंपरिक ज्ञान, आर्थिक अवसरों और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का विस्तृत विवरण देती है। मुख्य रूप से मल्लाह समुदाय द्वारा की जाने वाली यह खेती अब बढ़ते वैश्विक तापमान और जल प्रदूषण के कारण संकट में है। मिथिला क्षेत्र भारत के कुल उत्पादन का अधिकांश हिस्सा साझा करता है, लेकिन किसानों को बाजार मूल्य का बहुत कम हिस्सा मिल पाता है। अध्ययन में पारंपरिक तालाब पद्धतियों और आधुनिक तकनीकों के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है। सरकारी शोध संस्थानों और स्थानीय विशेषज्ञों के सहयोग से, यह लेख मखाना को एक जलवायु-लचीली फसल के रूप में बढ़ावा देने और किसानों के उत्थान के समाधान सुझाता है। अंततः, यह स्रोतों के माध्यम से मखाना उद्योग के स्थायित्व और वैज्ञानिक विकास की आवश्यकता पर बल देता है।

7. Central Pollution Control Board (CPCB)

यह स्रोत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की आधिकारिक सूचनाओं और उसके व्यापक कार्यक्षेत्र का विवरण प्रदान करता है। यह पोर्टल वायु और जल गुणवत्ता मानकों, ध्वनि प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन नियमों तथा विभिन्न औद्योगिक निगरानी प्रणालियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करता है।

8. India Water Resources Information System

इंडिया–वॉटर रिसोर्स इन्फॉर्मेशन सिस्टम (WRIS) का उद्देश्य पूरे देश के जल संसाधनों से संबंधित आंकड़ों का एक केंद्रीकृत भंडार तैयार करना है, ताकि जल संसाधन और उससे जुड़े विषयों पर अद्यतन जानकारी एक ‘सिंगल विंडो’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराई जा सके। यह पहल राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (National Hydrology Project) का हिस्सा है।

इंडिया–WRIS एक डेटा प्रसार (Data Dissemination) मंच के रूप में काम करता है, जहां पूरे देश के जल संसाधनों से संबंधित स्थिर, गतिशील और अर्ध-गतिशील (static, dynamic और semi-dynamic) स्थानिक तथा गैर-स्थानिक डेटा उपलब्ध कराया जाता है। इस प्लेटफॉर्म पर 130 से अधिक GIS लेयर के माध्यम से विभिन्न मॉड्यूल में जल संसाधनों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, जिन्हें उपयोगकर्ताओं की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है।

यह प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय GIS ढांचे (National GIS Framework) के मानकों पर आधारित है, जिससे विभिन्न हितधारक जल संसाधनों से जुड़े डेटा और सूचनाओं को आसानी से एक्सेस, विश्लेषण, प्रबंधन और साझा कर सकते हैं।

9. Central Ground Water Board (CGWB)

केंद्रीय भूजल बोर्ड (Central Ground Water Board) भारत में भूजल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, अन्वेषण और विनियमन के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख संस्था है। यह जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है और देशभर में जल संसाधनों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करती है। सीजीडब्ल्यूबी पूरे भारत में एक्विफर का मानचित्रण कर भूजल की उपलब्धता, पुनर्भरण क्षमता और जल की गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन करता है। इसके साथ ही यह देशभर में 25,000 से अधिक अवलोकन कुओं (नेशनल हाइड्रोग्राफ नेटवर्क स्टेशन) के माध्यम से भूजल स्तर की निगरानी करता है और वर्ष में चार बार मौसमी जलस्तर के रुझानों का अध्ययन करता है। नियामक भूमिका के तहत यह केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के रूप में भी कार्य करता है और उद्योगों व आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए भूजल दोहन को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के माध्यम से नियंत्रित करता है। इसके अलावा, सीजीडब्ल्यूबी राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग और प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM) को लागू करता है तथा वर्षा जल संचयन जैसी कृत्रिम पुनर्भरण तकनीकों को बढ़ावा देकर भूजल संरक्षण की दिशा में काम करता है।

10. Bihar State Election Commission 

बिहार पंचायत चुनाव 2021 में जीते सभी पंचायत प्रतिनिधियों का नाम, पता और फोन नंबर यहाँ उपलब्ध है, जिससे आप किसी भी गाँव की जानकारी एकत्र कर सकते हैं। ये जानकारियाँ बिहार में 2026 के अंत में होने वाले अगले चुनाव तक वैध हैं। उसके बाद इन्हें अपडेट किया जाएगा।

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