बिहार विधानसभा चुनाव में राजद को सीमांचल इलाके में बुरी हार का सामना करना पड़ा है और इसकी वजह पार्टी ने अनजाने में शायद आज खुद ही ज़ाहिर कर दी है।

दरअसल, सीमांचल में राजद का जनाधार बनाने वाले पार्टी के कद्दावार नेता रहे मोहम्मद तस्लीमुद्दीन का आज यानी 4 जनवरी को जन्मदिन था, लेकिन पार्टी के जिला इकाइयों को इसकी खबर तक नहीं लगी। अररिया और किशनगंज में पार्टी ने उन्हें याद तक नहीं किया।

पार्टी के नेताओं ने सोशल मीडिया पर उन्हें ‘खिराजे अकीदत’ ज़रूर पेश की, लेकिन देर शाम जब राजद के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से तस्लीमुद्दीन के जन्मदिन पर एक ट्वीट आया भी तो उसमें उनका नाम गलत लिखा था। राजद ने ‘मोहम्मद तस्लीमुद्दीन’ को ‘तस्लीमुद्दीन अंसारी’ कह कर याद किया।

मरहूम तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे जोकीहाट AIMIM विधायक शाहनवाज़ ने राजद के इस ट्वीट पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा,

अब्बा मरहूम सीमांचल गांधी जनाब मोहम्मद तस्लीमुद्दीन साहब ने अपनी ज़िन्दगी राजद के नाम कर दी, लेकिन RJD वालों को सही से उनका नाम भी नहीं पता? तस्लीमुद्दीन अंसारी?

विधायक शाहनवाज़ के सवाल के बाद राजद ने आनन फानन में अपना ट्वीट डिलीट कर दिया और उसके बाद पार्टी के तरफ से तस्लीमुद्दीन के जन्मदिन पर कोई ट्वीट नहीं आया।

आपको बता दें की तस्लीमुद्दीन सीमांचल इलाके के पूर्णिया, किशनगंज और अररिया लोकसभा से सांसद तथा जोकीहाट, अररिया और किशनगंज-कोचाधामन विधानसभा से विधायक हुए। एच. डी. देवेगौड़ा सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे, 2004 वाली मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री बनाये गए साथ ही 2000 में बिहार सरकार में भवन निर्माण मंत्री भी रहे।

तस्लीमुद्दीन लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते थे। सीमांचल के लोग उन्हें ‘सीमांचल गांधी’ के नाम से याद करते हैं।