पटना: बिहार के विश्वविद्यालयों से जुड़े सरकारी (अंगीभूत) कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए नए नियम को मंज़ूरी मिल गई है जिसे 1 जुलाई 2026 से लागू भी कर दिया गया है। इसके तहत नियमित और संविदा दोनों तरह की नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया तय कर दी गई है। नए नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विश्वविद्यालयों में योग्य, विषय के जानकार और बेहतर पढ़ाने की क्षमता रखने वाले शिक्षकों की नियुक्ति हो।
यह नया नियम बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976, पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सभी विश्वविद्यालयों पर लागू होगा। यानी अब इन सभी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती इसी नई प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
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इस नियम का मसौदा राज्य के चार कुलपतियों की एक समिति ने तैयार किया था। इसके बाद सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद से सुझाव और राय लिये गये। सभी की सहमति के बाद इस नियम को अंतिम मंजूरी दी गई।
पूरे देश से मांगे जाएंगे आवेदन
अब असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए पूरे देश से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इसके लिए ऑल इंडिया स्तर पर विज्ञापन निकाला जाएगा। हर विश्वविद्यालय अपने यहां विषयवार खाली पदों की जानकारी और आरक्षण रोस्टर उच्च शिक्षा विभाग को भेजेगा। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग सभी विश्वविद्यालयों की रिक्तियों को एक साथ जोड़कर बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग को भेजेगा। भर्ती की पूरी प्रक्रिया आयोग द्वारा पूरी की जाएगी।
बिहार राज्यपाल सचिवालय से जारी सूचना पत्र के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री होना अनिवार्य होगा।
हालांकि, बिहार के स्थायी निवासी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और पिछड़ा वर्ग (BC-नॉन क्रीमी लेयर) के उम्मीदवारों को अंकों में 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को भी नियमों के अनुसार अंकों में छूट दी जाएगी। लेकिन कोई भी उम्मीदवार दोनों प्रकार की छूट एक साथ नहीं ले सकेगा।
सामान्य उम्मीदवार के लिए NET, SLET या SET परीक्षा पास करना जरूरी होगा।
लेकिन यदि किसी उम्मीदवार ने यूजीसी के नियमों के अनुसार पीएचडी की है, तो उसे NET, SLET या SET से छूट मिलेगी। इसके अलावा जिन विषयों में NET परीक्षा आयोजित ही नहीं होती है, वहां इन परीक्षाओं को पास करना अनिवार्य नहीं होगा।
असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 43 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना विज्ञापन जारी होने वाले वर्ष की 1 अगस्त की स्थिति के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट भी मिलेगी।
नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती कुल 200 अंकों के आधार पर होगी। इनमें लिखित परीक्षा के 175 अंक और इंटरव्यू के 25 अंक होंगे। इंटरव्यू के 25 अंकों में से 13 अंक टीचिंग डेमोंस्ट्रेशन (शिक्षण प्रदर्शन) के लिए होंगे और 12 अंक साक्षात्कार के लिए निर्धारित किए गए हैं।
लिखित परीक्षा का स्वरूप
लिखित परीक्षा तीन घंटे की होगी। इसका सिलेबस संबंधित विषय की NET परीक्षा के सिलेबस के समान रहेगा।
कुल 175 अंकों की इस परीक्षा में चार प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें 20 अति लघु उत्तरीय प्रश्न के लिए 20 अंक और 15 लघु उत्तरीय प्रश्न के लिए 30 अंक निर्धारित होंगे। 15 विश्लेषणात्मक प्रश्न के 45 अंक और 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के 80 अंक होंगे।
हर एक पद के लिए लिखित परीक्षा के आधार पर 1:3 के अनुपात में उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। अगर अंतिम स्थान पर एक से अधिक उम्मीदवारों के समान अंक होंगे, तो उन सभी उम्मीदवारों को इंटरव्यू देने का मौका मिलेगा।
लिखित परीक्षा में इंटरव्यू के लिए पात्र होने के लिए अलग-अलग वर्गों के लिए न्यूनतम अंक तय किए गए हैं।
सामान्य वर्ग – 40 प्रतिशत , पिछड़ा वर्ग (BC) – 36.5 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) – 34 प्रतिशत, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और महिला उम्मीदवार – 32 प्रतिशत।
अब यह जान लेते हैं कि लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद अंतिम सूची कैसे बनेगी? अंतिम मेरिट सूची लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के कुल अंकों को जोड़कर तैयार की जाएगी। यदि दो उम्मीदवारों के कुल अंक बराबर होंगे, तो पहले उस उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलेगी जिसने लिखित परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त किए होंगे। यदि वहां भी अंक बराबर होंगे, तो अधिक आयु वाले उम्मीदवार को वरीयता दी जाएगी। अगर इसके बाद भी स्थिति समान रहती है, तो उम्मीदवारों के नामों का क्रम देवनागरी वर्णमाला के आधार पर तय किया जाएगा।
संविदा पर नियुक्ति कब होगी?
संविदा (Contractual) पर नियुक्ति केवल विशेष परिस्थितियों में की जाएगी। ऐसी नियुक्ति तब होगी जब किसी विश्वविद्यालय में शिक्षकों की तत्काल जरूरत होगी या वहां छात्र-शिक्षक अनुपात तय मानकों से कम होगा। संविदा पर नियुक्ति अधिकतम एक शैक्षणिक सत्र के लिए होगी। जैसे ही नियमित भर्ती पूरी हो जाएगी, संविदा पर नियुक्त शिक्षक की सेवा खुद समाप्त हो जाएगी।
संविदा पर नियुक्त शिक्षकों को नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर के शुरुआती मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ता (DA) के बराबर हर महीने भुगतान किया जाएगा।
संविदा भर्ती में लिखित परीक्षा नहीं ली जाएगी।
चयन केवल API स्कोर और 12 अंकों के इंटरव्यू के आधार पर होगा। API स्कोर तैयार करते समय उम्मीदवार की शैक्षणिक उपलब्धियों को अंक दिए जाएंगे। इसमें पीएचडी, जेआरएफ, नेट, स्नातकोत्तर, स्नातक, इंटरमीडिएट और मैट्रिक में प्राप्त अंकों को तय नियमों के अनुसार जोड़ा जाएगा।
असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में राज्य सरकार की लागू आरक्षण नीति का पूरी तरह पालन किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग चयनित उम्मीदवारों की सूची उच्च शिक्षा विभाग को भेजेगा। इसके बाद संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करेंगे।
नियुक्ति देने से पहले सभी उम्मीदवारों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पूरी जांच की जाएगी। यदि बाद में किसी संविदा शिक्षक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो उसकी नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी जाएगी। ऐसे उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी और उसे अगले पांच वर्षों तक किसी भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने से रोका जा सकेगा।
नियमित भर्ती में चयनित उम्मीदवार को सामान्य रूप से नियुक्ति पत्र मिलने के एक महीने के भीतर अपना पदभार ग्रहण करना होगा। यदि कोई विशेष परिस्थिति होगी, तो अधिकतम छह महीने तक का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। वहीं, संविदा पर नियुक्त उम्मीदवार को नियुक्ति मिलने के सात दिनों के भीतर हर हाल में जॉइन करना होगा। यदि कोई उम्मीदवार तय समय के भीतर ज्वाइन नहीं करता है, तो उसकी नियुक्ति अपने आप रद्द मानी जाएगी।
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