बिहार चुनावों के मद्देनज़र सियासत जोरों पर है। पक्ष—विपक्ष से लेकर गठबंधन के अंदर ही राजनीति जारी है। चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही महागठबंधन से जीतनराम मांझी ने खुद को अलग कर दिया। जिसके साथ ही महागठबंधन में टूट बिखराव की शुरूआत हो गई। अब राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के भी अलग होने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर एनडीए के भीतर भी घमासान मचा है। लोक जनशक्ति पार्टी यानि एलजेपी के एनडीए से अलग होने की खबर आ रही है।

लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान और सीएम नीतीश कुमार के बीच सब ठीक नहीं है। वही सीएम नीतीश कुमार को लेकर लोजपा जैसी तल्ख तेवर अपना रही है उसे लेकर अब बीजेपी भी उससे नाराज दिख रही है। लेकिन एनडीए में इतना कुछ हो रहा, इस सब के वाबजूद सीएम नीतीश को कोई चिंता नहीं है। वो बिल्कुल बेफिक्र हैं। सीएम नीतीश इस सबसे अलग अपनी चुनाव को लेकर अपनी पार्टी को मजबूत करने में लगे हैं।

कल बुधवार को भी वो अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मैराथन मीटिंग करने पार्टी दफ्तर पहुंचे थे। जब वे मीटिंग से वापस लौट रहे थे तो उसी दौरान मीडियावाले उनसे सवाल करने लगे। मीडिया वालों इस दौरान चिराग को लेकर उनसे सवाल पूछ लिया। नीतीश कुमार ने जो जवाब दिया उससे साफ लगता है कि NDA में चिराग के तेवर पर सीएम नीतीश कुमार को कोई फर्क नहीं पड़ता है और वो इसे तवज्जों देने के मूड में नहीं है। वो सवाल को अनसुना करते रहे, लेकिन फिर कहा कि इसमें कोई खास बात नहीं। या​नी चिराग पर नीतीश कुछ नहीं बोलना चाहते।

बताते चलें कि चिराग को मनाने के लिए बीजेपी ने उन्हें 25 सीट देने के मूड में है। दूसरी तरफ लोजपा प्रमुख चाहते हैं कि उनके पाले में कम से कम 30 सीटें हों। सीटों की संख्या के साथ मनपसंद सीटों को लेकर भी विवाद है। बीजेपी-लोजपा और जेडीयू के बीच कई जगहों पर पेंच फंस रहा है।अगर समझौता नहीं बना तो लोजपा 143 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

लेकिन नीतीश को इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। क्योकि नीतीश को यह बात पता है कि बिहार में बीजेपी जदयू के हितों को किसी और के लिए अनदेखा नहीं कर सकती। वहीं नीतीश की नज़र महागठबंधन में होनेवाली टूट पर है। यानि नीतीश इस जुगाड़ में हैं कि उपेन्द्र कुशवाहा को अपने साथ जोड़ कर अपने बेस वोट को एकमुश्त कर ले।