Main Media

Get Latest Hindi News (हिंदी न्यूज़), Hindi Samachar

Support Us

मेरिट लिस्ट में नाम, फिर भी दाख़िला नहीं: पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी अभ्यर्थियों का संघर्ष

पटना विश्विद्यालय ने स्टूडेंट्स को पीएचडी में अड्मिशन देने की बात कहकर लिस्ट निकाली और फिर क़ानून के ख़िलाफ़ जाकर वादे से फिर गई । स्टूडेंट्स ने कर दिया भूख हड़ताल

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
Published On :
names on the merit list, yet no admission phd aspirants struggle at patna university

पटना: एक स्टूडेंट नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी से शुरू होकर पहली से दसवीं कक्षा होते हुए बारहवीं और ग्रैजूएशन के बाद पोस्ट-ग्रैजूएशन की बाधा पार करती है। वह इन तमाम ऊबड़-खाबड़ रस्तों से गुज़रते हुए पीएचडी के द्वार पर आ खड़ी होती है। 


शिक्षा में डिग्री के इस अंतिम द्वार पर कहां तो उनका स्वागत होना था, लेकिन उन्हें मिलता है – बंदूक़-धारी दरबान, गड़बड़ी और भ्रष्टाचार में लिप्त क़ानून के साथ ही वह संरचना जो पक्षपात में डूबी हुई है। 

Also Read Story

बिहार चुनाव: राजनीतिक पार्टियों के घोषणापत्रों में शिक्षा को जगह देने की मांग

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड पर अब नहीं लगेगा ब्याज, मुख्यमंत्री ने किया ऐलान

पीएम की पूर्णिया सभा में भीड़ जुटाने के लिए कंडक्टर-खलासी बनाए जा रहे शिक्षक!

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि से सीमांचल के छात्रों पर कितना असर

दशकों पुरानी मांग पूरी, टेढ़ागाछ को मिलेगा डिग्री कॉलेज

बिहार के सरकारी विद्यालयों में लिपिक व चपरासी पदों पर होगी नियुक्ति, अनुकंपा का भी रास्ता खुला

स्थानांतरित शिक्षकों के लिए विद्यालय आवंटन प्रक्रिया शुरू

बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बावजूद अभ्यर्थी बेरोज़गार, महीनों बाद भी नियुक्ति नहीं

बिहार में सिर्फ कागज़ों पर चल रहे शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज़ केंद्र?

बिहार को अंग्रेज़ी में द लैंड ऑफ़ द बुद्धा कहते हैं। अंग्रेज़ी में बिहार के बारे में कुछ भी कहिए – सुनने में अच्छा ही लगता है। यहाँ की राजधानी स्थित पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी अड्मिशन में द्वार पार कर लेने के बाद जब स्टूडेंट्स को कहा गया कि आप अंदर नहीं आ सकते तब यहाँ जयप्रकाश नारायण अनुशद भवन में उन्होंने प्रदर्शन कर दिया। वे भूख हड़ताल पर चले गए। 


भूख हड़ताल पर बैठे इन स्टूडेंट्स ने समिति बनाई। रिसर्च स्कॉलर संघर्ष समिति के साथ-साथ कुछ संगठनों—AISF और PFVC— ने PHD में हो रहे कथित रूप से हो रही गड़बड़ी एवं पक्षपात को लेकर अपनी आवाज़ें बुलंद कीं।  

“पटना विश्वविद्यालय के पीएचडी नामांकन में हमने फ़ॉर्म भरा। इंटर्व्यू दिया। मेरिट-लिस्ट बनाई गई, और मेरिट-लिस्ट में नाम आया। फिर मेरिट-लिस्ट से नाम हटा दिया गया,” अभ्यर्थी, निवास कुमार ने बैनर तले चल रहे भाषण के दौरान कहा।” अंग्रेज़ी में इसी भाव को “बज़-किल” कहते हैं – यानी, सारी मेहनत पर गोबर फेर देना। 

निवास कुमार का मेरिट-लिस्ट में दसवें नंबर पर नाम था। प्रशासन ने उनको अड्मिशन देने के बजाय बज़-किल दिया है। 

दूसरे उम्मीदवार भी कुछ इसी तरह का आरोप लगा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि विश्वविद्यालय ने फ़ॉर्म भरवा लेने और इंटर्व्यू लेने के बाद मेरिट-लिस्ट में नाम आने के बावजूद उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया। 

क्यों हुआ धरना प्रदर्शन? 

पिछले साल पटना विश्वविद्यालय में 2024-25 सत्र में UGC-NET के ज़रिए ‘पीएचडी ओनली’ क़्वालिफ़ाई छात्रों से फ़ॉर्म भरवाया गया। उसके बाद इंटर्व्यू भी हुआ और कुछ विभागों की मेरिट-लिस्ट भी बन गई। हालाँकि बाद में प्रशासन ने कह दिया कि जितने भी ‘पीएचडी ओनली’ क़्वालिफ़ाई स्टूडेंट्स हैं, उनमें से किसी को भी नहीं लिया जाएगा,” प्रदर्शन में शामिल मोना कुमारी ने ‘मैं मीडिया’ को बताते हुए कहा।

उन्होंने आगे कहा, “अगर हम लोगों को लेना ही नहीं था तो फ़ॉर्म क्यों भरवाया गया? इंटरव्यू क्यों लिया गया? और जब फ़ॉर्म निकला था तब यह क्यों नहीं लिखा गया कि ‘पीएचडी ओनली’ क़्वालिफ़ाई स्टूडेंट्स आवेदन नहीं कर सकते। अब देखिए न, हम लोग दूसरे विश्वविद्यालयों में भी आवेदन नहीं कर पाए।” 

‘पीएचडी ओनली’ – क्या है? 

बता दें कि 13 मार्च 2024 की बैठक में UGC ने पीएचडी एडमिशन के नियमों में बड़ा बदलाव किया था। यह तय किया कि अब पीएचडी में दाख़िले के लिए NET स्कोर का भी इस्तेमाल किया जाएगा। वो स्टूडेंट्स जो जेआरएफ़ और असिस्टेंट प्रोफ़ेसर वाले दूसरे स्टूडेंट्स से कम अंक लेकर पीएचडी करना चाह रहे हैं, उन्हें बिना लिखित परीक्षा के प्रवेश तो मिल जाएगा, लेकिन वे महाना उस फ़ेलोशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकते जो उनसे अधिक अंक वाले किया करते हैं। इस फ़ेलोवशिप में पचास हज़ार के आसपास प्रति-माह शोध के लिए रुपए मिलते हैं। 

UGC ने ‘पीएचडी ओनली’ वाली तीसरी श्रेणी निकाली है। यह स्टूडेंट्स पीएचडी करने के दो मूल ख़्वाब – असिस्टेंट प्रोफ़ेसर और शोध फ़ेलोशिप की राशि से भी महरूम रह जाएँगे। 

यह नियम अकादमी सत्र 2024-25 से लागू किया गया था। 27 मार्च 2024 को जारी नोटिस में UGC ने बताया कि जून 2024 से NET रिज़ल्ट तीन कैटेगरी में जारी होगा। दूसरी और तीसरी कैटेगरी के छात्रों के लिए पीएचडी एडमिशन में 70% महत्व NET स्कोर और 30% इंटरव्यू/वाइवा को दिया जाना था। एक तरफ़ UGC ऐसे निर्देश दे रही थी, वहीं दूसरी तरफ़ पटना यूनिवर्सिटी पुराने नियमों के आधार पार पीएचडी सीटों का ऐलान कर रही थी। 

बीते वर्ष पटना विश्विद्यालय ने पीएचडी अड्मिशन टेस्ट (PAT-2025) के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का नोटिस जारी किया था। आवेदन करने के लिए सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स के पास मास्टर डिग्री में कम से कम 55% अंक होना ज़रूरी था। आरक्षित वर्ग के स्टूडेंट्स को 5% की छूट दी गई थी। UGC-NET, CSIR-NET, GATE और JRF पास उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा देने की ज़रूरत न थी लेकिन इंटर्व्यू सभी के लिए अनिवार्य था। 

सीट-कट कैसी बला? 

दस बरस होने को आए जब देश की राजधानी दिल्ली में पीएचडी अड्मिशन में सीट की कटौती को लेकर स्टूडेंट्स सड़क पर उतर आए थे। ऐसा ही हुआ जब पटना में भी सीट न होने की बात कहकर आरक्षित सीटों पर स्टूडेंट्स को दाख़िला नहीं दिया गया। 

पिछले साल 2025 के PAT परीक्षा दो पेपर में आयोजित होनी थी, जिसमें पहला ऑब्जेक्टिव और दूसरा सब्जेक्टिव था। पास होने के लिए सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 50% और आरक्षित वर्ग के लिए 45% अंक ज़रूरी थे। विश्वविद्यालय ने यह भी साफ़ किया कि लिखित परीक्षा से छूट पाने वाले उम्मीदवारों को भी इंटर्व्यू देना होगा।

राज्यपाल सचिवालय, बिहार द्वारा जारी नियमों के अनुसार राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी एडमिशन की प्रक्रिया तय की गई थी। नियमों के मुताबिक 50% सीटें UGC-NET, CSIR-NET, GATE और CEED जैसी राष्ट्रीय स्तर के इम्तेहान पास करने वाले छात्रों के लिए आरक्षित रखी गई थीं। बाक़ी सीटों पर दाखिला PAT परीक्षा की मेरिट-लिस्ट के आधार पर होना था।

अभ्यर्थी मोना कुमारी ने ‘मैं मीडिया’ को आगे बताया, “राजभवन से आदेश आया है कि 2017 रेगुलेशन के तहत ही एडमिशन होगा। अब उस क़ानून UGC ‘पीएचडी ओनली’ क़्वालिफ़ाई छात्रों का प्रावधान नहीं है, इसलिए हमें वंचित कर दिया गया।”

अभ्यर्थी इस बात से आक्रोशित हैं कि उन्हें पहले यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई नोटिफिकेशन नहीं आया कि 2017 रेगुलेशन लागू होगा। 

“यूनिवर्सिटी की तरफ़ से कहा गया था कि आप लोग आवेदन कर सकते हैं, आप इस (‘पीएचडी ओनली’ क़्वालिफ़ाई) कैटेगरी में आते हैं”, दूसरी महिला प्रदर्शनकारी पूजा राय ने कहा।

उन्होंने आगे बताया, “जब UGC ने तीन कैटेगरी में रिज़ल्ट दिया है, JRF, NET और PhD Only (पीएचडी ओनली)। बिहार ही के पाटलीपुत्र यूनिवर्सिटी, वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी, मगध यूनिवर्सिटी और ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी में PhD Only छात्रों का एडमिशन हुआ है।” 

पटना यूनिवर्सिटी ने अलग क्यों बर्ताव किया – यही बात समझ  नहीं आती। “पटना विश्वविद्यालय में अलग नियम क्यों?”

बात अगर सिर्फ़ पीएचडी ओनली की होती तो भी मामला समझ में आ जाता।   

“अपने लोगों को फ़ायदा पहुँचाया जा रहा है”

नए नियमों को लागू करने से आक्रोशित दृष्टिबाधित छात्र आदित्य नारायण ने ‘मैं मीडिया’ को बताया कि इस बार पीएचडी दाख़िले के लिए पटना विश्वविद्यालय में विकलांग छात्रों को आरक्षण से वंचित कर दिया गया है। जो देख नहीं सकते वो भूखे तो रह ही सकते हैं। 

“पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी अड्मिशन में भारी गड़बड़ी हुई है। यूनिवर्सिटी ने यह कहकर मना कर दिया कि सीट कम होने के कारण आरक्षण नहीं दिया जा सकता। जबकि विकलांग अधिकार अधिनियम 2016 और न्यायालय के आदेश के अनुसार योग्य दिव्यांग छात्रों के लिए सीट बनाकर अड्मिशन देना ज़रूरी है,” आदित्य तिवारी ने कहा। 

उन्होंने आगे कहा, “मैं ख़ुद NET-JRF क़्वालिफ़ाई हूँ। इतिहास विभाग में आवेदन दिया था, इंटरव्यू भी हुआ। लेकिन बाद में कहा गया कि सीट कम है इसलिए दृष्टिबाधित कोटा नहीं बन रहा। यूनिवर्सिटी में घोटाला हुआ है। कहीं ऐसा तो नहीं जो मैं देख पा रहा हूँ वह सच है। क्या हम जैसे स्टूडेंट्स को बाहर करके प्रशासन अपने लोगों को अड्मिशन दिए जा रहा है।” 

आदित्य पूर्ण रूप से नेत्रहीन हैं। उनकी माँग है कि क़ानून और हाईकोर्ट के आदेशानुसार दिव्यांग स्टूडेंट्स के लिए सीट बनाकर दाख़िला दिया जाए। 

डीन, प्रॉक्टर ने ख़त्म  कराया भूख हड़ताल 

पीएचडी अड्मिशन में गड़बड़ी को लेकर चल रहा छात्रों का यह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 23 मई यानी नौवें दिन समाप्त हुआ। सीनेट बैठक में पुसू सीनेट सदस्य ने कुलपति के सामने मामले को उठाया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अड्मिशन प्रक्रिया की समीक्षा का आश्वासन दिया। डीन और प्रॉक्टर ने प्रदर्शनकारियों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म कराई। 

the indefinite hunger strike ended on may 23, the ninth day

किसने कहा है कि भूखों को रोटी ही चाहिए? कई बार उम्मीद या आश्वासन भी काफ़ी होता है। लोकतंत्र न हो, लोकतंत्र का भरम भी काफ़ी होता है। यह न्याय जैसा नहीं है, जो हो भी तो दिखना ज़रूरी है। भूख हड़ताल पर महात्मा गांधी भी बैठे थे और शहीद-ए-आज़म भगत सिंह भी। उन्होंने अंग्रेज़ों को चेताया था।  स्टूडेंट्स ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी डिमैंड्ज़ नहीं मानी गईं तो 20 जून के बाद फिर आंदोलन शुरू किया जाएगा। शायद हर बार आश्वासन काम न आए।

संपादन: आमिर मलिक

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

Related News

अररिया के सैकड़ों शिक्षकों का एरियर सालों से लंबित, डीपीओ पर अनियमितता का आरोप

जब मैट्रिक परीक्षा केंद्र में फैल गई भूत-प्रेत की अफ़वाह

बिहार के ग्रामीण स्कूलों में नामांकन बढ़ा, लेकिन पढ़ने-लिखने की चुनौतियाँ बरकरार

बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा: देरी से पहुंचने पर नहीं मिला प्रवेश, रो पड़ीं छात्राएं

बिहार: इंटर परीक्षार्थियों के लिए निर्देश जारी, नियम तोड़ने पर होगी कानूनी कार्रवाई

प्रोफेसर विवेकानंद सिंह बने पूर्णिया विश्वविद्यालय के नए कुलपति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

VB-G RAM G: लागू होने से पहले ही क्या नया कानून मनरेगा मज़दूरों का हक़ छीन रहा?

बिहार के नवादा में अतहर की मॉब लिंचिंग के डेढ़ महीने बाद भी न मुआवज़ा मिला, न सबूत जुटे

बिहार चुनाव के बीच कोसी की बाढ़ से बेबस सहरसा के गाँव

किशनगंज शहर की सड़कों पर गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाएं

किशनगंज विधायक के घर से सटे इस गांव में अब तक नहीं बनी सड़क