बिहार के किशनगंज में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आयी है। नियोजित शिक्षकों को जिस दस्तावेज के आधार पर राज्यकर्मी का दर्जा मिलना है, वो दस्तावेज शिक्षा विभाग के ऑफिस में पड़ी रद्दी और कूड़े से बरामद हुआ।
दरअसल, ठाकुरगंज प्रखंड के नियोजित शिक्षकों की सक्षमता परीक्षा के सैकड़ों मूल प्रवेश पत्र ग़ायब थे, जो रोलबाग मोहल्ला स्थित जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के स्थापना कार्यालय के पुराने भवन के कूड़े में पड़ा मिला।
Also Read Story
शुक्रवार को खोजबीन के क्रम में 600 से अधिक नियोजित शिक्षकों की सक्षमता परीक्षा का मूल प्रवेश पत्र बरामद हुआ। हालांकि, बताया जा रहा है कि अभी भी कई शिक्षकों के प्रमाण-पत्र ग़ायब हैं।
बताते चलें कि शिक्षा विभाग ने फरवरी 2024 में सक्षमता परीक्षा का आयोजन किया था। परीक्षा में सफल हुए नियोजित शिक्षकों का मार्च माह में वेरिफिकेशन के दौरान जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना के कार्यालय में सक्षमता परीक्षा का मूल प्रवेश पत्र बीआरसी के लिपिकों के माध्यम से जमा लिया गया था, जो जांच के बाद शिक्षकों को वापस किया जाना था।
यह प्रवेश पत्र इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस दस्तावेज़ के माध्यम से नियोजित शिक्षकों का नये ज़िलों में पदस्थापन होगा, और इसके बाद उनको राज्यकर्मी का दर्जा मिलेगा।
70 के क़रीब प्रमाण पत्र अब भी ग़ायब
बताया जा रहा है कि ठाकुरगंज के नियोजित शिक्षकों के लगभग 700 मूल प्रवेश प्रमाण पत्रों में से 630 प्रमाण-पत्र मिले हैं, जबकि, अब भी 70 से अधिक प्रमाणपत्र गायब हैं।
एक अगस्त से सक्षमता परीक्षा में उत्तीर्ण नियोजित शिक्षकों के लिये जिले में काउंसिलिंग होना है। नियोजित शिक्षकों को काउंसिलिंग में मूल प्रमाण-पत्र के साथ सक्षमता परीक्षा का मूल प्रवेश-पत्र लाना भी अनिवार्य है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना कार्यालय में जमा शिक्षकों की सक्षमता परीक्षा के मूल प्रवेश पत्रों को 20-22 जुलाई के बीच नियोजित शिक्षकों को वापस कर दिया गया। लेकिन, ठाकुरगंज प्रखंड के शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा का प्रवेश पत्र वितरण नहीं किया गया, क्योंकि, उनलोगों का प्रवेश पत्र कार्यालय से गायब था।
इसके बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नूपुर कुमारी ने आनन-फानन में ठाकुरगंज प्रखंड संसाधन केंद्र के लेखा सहायक सुमित कुमार और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना कार्यालय के लिपिक साकेत सुमन के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्यालय से गायब हुए प्रमाण-पत्रों को अविलंब उपलब्ध करवाने का आदेश दिया।
नोटिस में उन दोनों लिपिकों के विरुद्ध एफआईआर तक करवाने की धमकी दी गई। नोटिस के बाद जब कल विभाग के रोलबाग स्थित पुराने कार्यालय में खोजबीन शुरू की गई तो कार्यालय में पड़े रद्दी काग़ज़ों और कूड़े से सैकड़ों मूल प्रमाण पत्र बरामद हुए।
लापरवाह कर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग
शिक्षकों के साथ-साथ किशनगंज के आम लोगों ने भी विभाग द्वारा की गई इस लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी जतायी है। उनका कहना है कि विभाग शिक्षकों की छोटी-छोटी ग़लतियों पर सज़ा देता है, लेकिन, जब विभाग की तरफ़ से इतनी बड़ी ग़लती हो जाती है तो किसी पर कार्रवाई भी नहीं होती है। शिक्षकों ने ज़िम्मेदार कर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है।
किसी काम से ज़िला शिक्षा कार्यालय आये शमीम अशरफ़ ने कहा कि यह शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की सरासर लापरवाही है, ऐसे अधिकारियों-कर्मियों के ख़िलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाये।
“पता चला है कि जो सक्षमता परीक्षा हुई है और उसमें जो टीचर सफल हुए हैं, उनके काग़ज़ात कार्यालय के कूड़ेदान में मिले हैं। इस तरह से पदाधिकारियों और कर्मियों द्वारा शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का काम चल रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा, “अगर कूड़ेदान से वो प्रमाण-पत्र बरामद नहीं होता तो ये लोग क्या करते? ये लोग तो किसी पर एफआईआर करवा देते या झूठा इल्ज़ाम लगा कर किसी को फंसा देते। उन टीचरों का भविष्य बर्बाद कर देते। ऐसे लोगों पर दंडात्मक और उचित कार्रवाई होनी चाहिये। मैं माननीय ज़िला पदाधिकारी से कार्रवाई का अनुरोध करूंगा।”
शिक्षकों को हर तरह से परेशान करता है विभाग: संघ
शिक्षा विभाग के कर्मियों की इस लापरवाही को शिक्षक संघ ने गंभीरता से लिया है। संघ का कहना है कि ग़ायब प्रमाण-पत्र राज्यकर्मी बनने के लिये एक ज़रूरी दस्तावेज़ है, जो कि विभाग की लापरवाही से मिस हो गया था, अगर यही बात शिक्षक कहते कि उनसे प्रमाण-पत्र ग़ायब हो गया है तो शिक्षा विभाग कभी भी उनको आगे की कार्रवाई में भाग नहीं लेने देता और वैसे शिक्षक राज्यकर्मी बनने से महरूम रहे जाते।
परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के किशनगंज ज़िला महासचिव अरुण ठाकुर ने ‘मैं मीडिया’ को बताया कि विभागीय कर्मी जो इसमें दोषी हैं उस पर सख़्त से सख़्त कार्रवाई होनी चाहिये।
“इसको दूर्भाग्य कहिये, जान-बूझ कर की गई ग़लती कहिये या फिर शिक्षा विभाग की लापरवाही कहिये। 600-700 शिक्षकों के मूल एडमिट कार्ड को कचरे के ढेर में शौचालय में छोड़ दिया गया…हम तो यही कहेंगे कि हमारे शिक्षकों के भविष्य के साथ जान-बूझ कर खिलवाड़ किया जा रहा है। अगर हमारे शिक्षक का एडमिट कार्ड ख़ुद से खो गया होता तो क्या विभाग इतनी आसानी से उसको मानता?,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा, “विभागीय लोग जो इसमें शामिल हैं, उन पर सख़्त से सख़्त कार्रवाई होनी चाहिये। जो भी दोषी हैं उसपर कार्रवाई होनी चाहिये, क्योंकि जब शिक्षकों का 700-800 एडमिट कार्ड सही ढंग से नहीं रख पा रहे हैं तो पता नहीं कार्यालय को वे किस प्रकार चलाते होंगे। शिक्षकों के बहुत सारे ओरिजिनल डॉक्यूमेंट कार्यालय में हैं। पता नहीं उसकी क्या स्थिति है? हमलोगों को तो मिला नहीं है अब तक जो बरसों से जमा है।”
बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के किशनगंज ज़िला अध्यक्ष राग़िबुर्रहमान ने इस संबंध में ‘मैं मीडिया’ को बताया कि शिक्षा विभाग की हमेशा यह मंशा रही है कि नियोजित शिक्षकों को किसी ना किसी बहाने परेशान किया जाये और प्रमाण-पत्र का ग़ायब होना उसी का हिस्सा है।
“आज ही कई शिक्षकों से बात हुई है मेरी, उनको एडमिट कार्ड मिल गया है। अगर नहीं मिलता तो पता नहीं क्या होता? कूड़ेदान में फेंका हुआ मिला था सर्टिफिकेट। विभाग की हमेशा से मंशा रही है नियोजित शिक्षकों को प्रताड़ित करने का। पिछले एक साल से मानसिक तौर से प्रताड़ित करने में और बढ़ोतरी हुई है। शिक्षकों को किसी तरह का कोई लाभ देना नहीं चाहता है विभाग,” उन्होंने कहा।
“लाभ से हमेशा शिक्षकों को वंचित रखना अपना अधिकार समझती है सरकार। उसी का एक हिस्सा है कि जानबूझ कर एडमिट कार्ड को कूड़ेदान में गिरा दिया गया और शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की गई। वैसे कर्मियों के ख़िलाफ़ निलंबन ही नहीं बर्ख़ास्तगी की कार्रवाई होनी चाहिये।”
कर्मियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई होगी: डीपीओ
किशनगंज के शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नूपुर कुमारी से पूछने पर उन्होंने कहा कि एक प्रखंड का फ़ाइल कार्यालय से गायब था। जब उनके द्वारा नोटिस जारी किया गया तो फ़ाइल मिल गया।
उन्होंने कहा कि फिलहाल शिक्षकों को उसका प्रमाण-पत्र वितरित किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि लापरवाह क्लर्क के खिलाफ नोटिस भी जारी किया गया है, आगे जो भी विधि सम्मत कार्रवाई होगी की जायेगी।
भले ही अधिकारी द्वारा आरोपी क्लर्क के खिलाफ नोटिस जारी किया गया हो, लेकिन, सवाल है कि आखिर 700 शिक्षकों का दस्तावेज कैसे कार्यालय से गायब हुआ? अभी भी लगभग 70 नियोजित शिक्षकों के प्रमाण-पत्र कार्यालय से गायब हैं। ऐसे में शिक्षकों का काउंसिलिंग किस आधार पर होगी। अगर मूल दस्तावेज के बिना उसे राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिल पाता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।




















RAFIQUE Alam nagar sikshak Thakurganj NPS basirnagar, Thakurganj jama register krmank 133 Ab tak yani 27/07/2024,4,30pm tak nhi mila hai sir main ab kia krun sir sakshamta exam dekar bhi shayad rajykarmy bannay se koson dur kar rahai hain