Main Media

Get Latest Hindi News (हिंदी न्यूज़), Hindi Samachar

Support Us

लोक पर्व मधुश्रावणी शुरू, गूंजने लगे भक्ति गीत

Main Media Logo PNG Reported By Main Media Desk |
Published On :
devotees in madhushravani

सावन का महीना आते ही मिथिलांचल के लोकप्रिय पर्व मधुश्रावणी के गीत गूंजने लगे हैं। पर्व की तैयारियों में नवविवाहिताएं जुट गई हैं। पति की लंबी आयु की कामना के लिए चौदह दिवसीय यह पूजा सिर्फ मिथिलावासियों के बीच ही होती है। यह पर्व मिथिला की नवविवाहिता बहुत ही धूमधाम के साथ दुल्हन के रूप में सज धज कर मनाती हैं।


बताया जाता है कि शादी के पहले साल के सावन माह में नवविवाहिताएं मधुश्रावणी का व्रत करती हैं। सावन के कृष्ण पक्ष के पंचमी के दिन से मधुश्रावणी व्रत की शुरुआत हुई है और यह पर्व 14 दिनों का होगा।

Also Read Story

अररिया की बेटी प्रज्ञा ने बनाई भगवान शिव की विशाल पेंटिंग

मखाना से बनाइये स्वादिष्ट व्यंजन – सरकार से पाइये आकर्षक इनाम, यहां करें आवेदन

दुर्गा पूजा पंडालों से महिला सशक्तीकरण, साक्षरता और पूर्णिया एयरपोर्ट का संदेश

पूर्णिया के इन पंडालों में गये बिना दुर्गा-पूजा का उत्सव रह जा रहा फीक़ा

उत्तर दिनाजपुर: दुर्गा पूजा पर इस्लामपुर के ये रचनात्मक पंडाल जीत रहे श्रद्धालुओं का दिल

सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा की धूम, एक से बढ़ कर एक हैं ये 33 पूजा पंडाल

कटिहारः दुर्गा पूजा को लेकर लाल किले की तर्ज पर हो रहा पंडाल का निर्माण

Kishanganj District: किशनगंज जिला के बारे में जानें सब कुछ

मैं मीडिया ने किया अपने पांच पत्रकारों को सम्मानित

इस पर्व में मिट्टी की मूर्तियां, विषहरा, शिव-पार्वती बनायी जाती हैं।


जीवन में एक बार किया जाता है मधुश्रावणी पर्व

मधुश्रावणी जीवन में सिर्फ एक बार शादी के पहले सावन को किया जाता है। इस पर्व में नवविवाहिताएं 14 दिनों तक बिना नमक वाला भोजन ग्रहण करेंगी। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को विशेष पूजा-अर्चना के साथ व्रत की समाप्ति होती है।

इन दिनों नवविवाहिता व्रत रखकर गणेश, चनाई, मिट्टी एवं गोबर से बने विषहरा व गौरी-शंकर की विशेष पूजा करती हैं और महिला कथावाचक से कथा सुनती हैं। कथा का प्रारम्भ विषहरा के जन्म और राजा श्रीकर से होता है।

इस व्रत के द्वारा स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती के साथ पति की दीर्घायु होने की कामना करती हैं। शुरू व अन्तिम दिनों में व्रतियों द्वारा समाज व परिवार के लोगों में अंकुरी बांटने की भी प्रथा देखने को मिलती है।

नवविवाहिता की ससुराल से आती है सारी सामग्री

शाम के समय नवविवाहिता अपनी सहेलियों के साथ एक समूह बनाकर पूजा के लिये बांस के डालिया में फूल तोड़ती हैं। साथ में महिलाएं गीत गाती हैं। लगातार तेरह दिनों तक नवविवाहिता अपनी ससुराल से अरवा भोजन प्राप्त करती हैं।

पूजा के अंतिम दिन नवविवाहिता की ससुराल से काफी मात्रा में पूजन की सामग्री, कई प्रकार के मिष्ठान, नए वस्त्र के साथ पांच बुजुर्ग लोग आशीर्वाद देने के लिए पहुंचते हैं। नवविवाहिता ससुराल पक्ष के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेकर ही पूजा समाप्त करती हैं।

lokparv madhushravani

मधुश्रावणी पूजा के अंतिम दिन कई प्रकार से पूजन का कार्य किया जाता हैं। सुबह शाम महिलाएं समूह बनाकर घंटों गीत गाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगातार तेरह दिनों तक पूजा स्थल पर नवविवाहिता की देखरेख में अखंड दीप जलता रहता है। पंडितों का कहना है कि मधुश्रावणी पर्व कठिन तपस्या से कम नहीं है।

रोज सुनाई जाती हैं अलग-अलग कथाएं

मिथिला के पारम्परिक रीति-रिवाज के अनुसार चलने वाले लोग देश-विदेश में इस व्रत को करते हैं। नेपाल में इस पर्व को बड़े ही पावन तरीके से मनाया जाता है। पूजा स्थल पर मैनी के पत्ते पर विभिन्न प्रकार की आकृतियां बनाई जाती हैं।

महादेव, गौरी, नाग-नागिन की प्रतिमा स्थापित कर व विभिन्न प्रकार के नैवेद्य चढ़ाकर पूजा शुरू होती है। इस व्रत में विशेष रूप से महादेव, गौरी, विषहरी व नाग देवता की पूजा की जाती है। रोज अलग-अलग कथाओं में मैना पंचमी, विषहरी, बिहुला, मनसा, मंगला गौरी, पृथ्वी जन्म, समुद्र मंथन, सती की कथाएं व्रती को सुनाई जाती हैं।

प्रात:काल की पूजा में गोसाई गीत व पावनी गीत गाए जाते हैं तथा शाम की पूजा में कोहबर तथा संझौती गीत गाए जाते हैं। व्रत के अंतिम दिन टेमी दागने की भी परंपरा है। इसमें जलते दीप की बाती से घुटने और पैर के पंजे दागे जाते हैं।


मिथिला मखाना को मिला उसका हक, जाने कैसे होती है खेती

किशनगंज: ऐतिहासिक चुरली एस्टेट खंडहर में तब्दील

बर्मा से आये लोगों ने सीमांचल में लाई मूंगफली क्रांति


सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

Main Media is a hyper-local news platform covering the Seemanchal region, the four districts of Bihar – Kishanganj, Araria, Purnia, and Katihar. It is known for its deep-reported hyper-local reporting on systemic issues in Seemanchal, one of India’s most backward regions which is largely media dark.

Related News

कटिहार: 78 वर्षीय जगदीश ने लगाए हैं 10 हजार से अधिक RTI

Women in Masjid: पूर्णिया के मस्जिद में महिलाओं की नमाज, कहा- मस्जिद जितनी मर्दों की, उतनी ही महिलाओं की भी

सरकारी websites पर लोक उपयोगिता से जुड़ी ज्यादातर सूचनाएँ गलत

क्या पुलिस कस्टडी में हुई शराब कांड के आरोपित की मौत

कैश वैन लूट: एसआईएस कर्मचारियों ने ही रची थी साजिश, 8 गिरफ्तार

फुलवारीशरीफ में कथित टेरर मॉड्यूल: कटिहार, अररिया में एनआईए की छापेमारी

‘मोदी मंदिर’ बनाने वाला गाँव महंगाई पर क्या बोला?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

बिहार के नवादा में अतहर की मॉब लिंचिंग के डेढ़ महीने बाद भी न मुआवज़ा मिला, न सबूत जुटे

बिहार चुनाव के बीच कोसी की बाढ़ से बेबस सहरसा के गाँव

किशनगंज शहर की सड़कों पर गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाएं

किशनगंज विधायक के घर से सटे इस गांव में अब तक नहीं बनी सड़क

बिहार SIR नोटिस से डर के साय में हैं 1902 में भारत आये ईरानी मुसलमान