Main Media

Get Latest Hindi News (हिंदी न्यूज़), Hindi Samachar

Support Us

बिहार में नदी कटाव के साए ज़िंदगियाँ और जगती उम्मीदें

कटाव निरोधक कार्य कई तरह के होते हैं, जिनमें पर्को पाइल यानी प्रीकास्ट कंक्रीट पाइल्स, जियो बैग, शीट पाइल, वुडन पाइल, बोल्डर पिचिंग आदि शामिल हैं।

Tanzil Asif is founder and CEO of Main Media Reported By Tanzil Asif |
Published On :
lives and hopes arising in the shadow of river erosion in bihar

बिहार के किशनगंज ज़िले के रहने वाले नाविक जाबुल का घर नदी के किनारे है। जाबुल बहादुरगंज प्रखंड अंतर्गत लौचा पंचायत के सतमेढ़ी गाँव के रहने वाले हैं। बरसात की आमद होते ही उन्हें कनकई नदी के कटाव से पक्के मकान के जमींदोज हो जाने का डर सताने लगा। आनन फानन में उन्होंने अपना घर खाली किया और पक्के मकान की दीवारें तोड़ दीं। इस उम्मीद में कि घर जमींदोज हो जाने से पहले कुछ ईंटें ही बच जाएं। लेकिन इसी बीच उनके गाँव को बचाने के लिए कटाव निरोधक कार्य हुआ, तो जाबुल की उम्मीदें जगीं। उन्होंने थोड़ा इंतजार किया। कटाव निरोधक कार्य के चलते उनका दीवार विहीन मकान बच गया। ऐसे में उन्होंने बांस की टाटी और प्लास्टिक लगाकर उस टूटे हुए मकान को ही रहने लायक बना दिया। फिलहाल. जाबुल अपने परिवार के साथ उसी मकान में रह रहे हैं।


टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत डाकपोखर पंचायत के हरहरिया गाँव निवासी विनय कुमार का घर छह बार नदी के कटान में समा चुका है। पेशे के मज़दूर विनय करीब छह साल पहले 10-15 कट्ठा ज़मीन खरीद कर अपने वर्तमान स्थान पर बसे। उनका घर अब भी नदी के किनारे पर ही है। पिछले दिनों जिओ बैग और लकड़ी के सहारे यहाँ नदी के कटान को रोकने की कोशिश की गई।

Also Read Story

लीची पर फ्लाई ऐश की मार, मशरूम बना मुजफ्फरपुर के किसानों का सहारा

किशनगंज में मक्के की खेती कैसे बन रही है मानव-हाथी संघर्ष की वजह?

रामसर दर्जा मिलने से बिहार के वेटलैंड्स की स्थिति में क्या बदलाव आया है?

हर साल ग्रीन बजट लाने वाला बिहार आंकड़ों में कितना ‘ग्रीन’ है?

जलवायु संकट की मार झेलते बिहार के किसान, प्री-मानसून ओलावृष्टि से तबाह खरीफ फसल

नाव, नदी और नसीब: कोसी के गांवों में मातृत्व की अधूरी कहानियाँ

चरम मौसमी घटनाएं रोक रही बच्चों की शिक्षा की रफ्तार

बेगूसराय की कांवर झील से क्यों मुंह मोड़ रहे प्रवासी पक्षी

गयाजी के किसानों पर मौसम की मार, मोटर बनी मजबूरी

बिहार देश में बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में से एक है। बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक पत्रिका ‘जल संसाधन’ में छपी जानकारी के अनुसार, बिहार में लगभग 94.16 लाख हेक्टेयर में से लगभग 68.80 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित होती है, जो कि राज्य की कुल भूमि का लगभग 73.06% है। बिहार में बाढ़ नियंत्रण के लिए मुख्यतः आठ तरह की चीज़ें की जा रही हैं। इसमें कटाव निरोधक कार्य, नदियों पर बने पुल-पुलिया के भेंट की सफाई, गाद की उड़ाही, नदियों में बने शोल को हटाने का कार्य और नदी जोड़ योजना आदि शामिल हैं।


कटाव निरोधक कार्य कई तरह के होते हैं, जिनमें पर्को पाइल यानी प्रीकास्ट कंक्रीट पाइल्स, जियो बैग, शीट पाइल, वुडन पाइल, बोल्डर पिचिंग आदि शामिल हैं।

स्थानीय राजद विधायक मोहम्मद अंजार नईमी ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र बहादुरगंज में 2023 में 15 स्थानों पर और इस साल 11 जगहों पर इस तरह के कटाव निरोधक कार्य हुए हैं, लेकिन अभी भी कुछ प्वाइंट पर काम होना है।

वहीं, क्षेत्र के कई युवा नदी कटान को लेकर प्रदर्शन कर सरकार से एक स्थाई समाधान की मांग कर रहे हैं। झिंगाकाटा हाट पर इसको लेकर एक धरना हुआ।

विधायक अंजार नईमी ने पिछले विधानसभा सत्र में भी कटाव निरोधक कार्य का मुद्दा सदन में उठाया था। इसको लेकर वह लगातार प्रदेश मुख्यमंत्री, मंत्री और सम्बंधित अधिकारियों से मिलते रहे हैं। वह मानते हैं कि कटाव का स्थाई समाधान तटबंध बांध कर ही किया जा सकता है।

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

तंजील आसिफ एक मल्टीमीडिया पत्रकार-सह-उद्यमी हैं। वह 'मैं मीडिया' के संस्थापक और सीईओ हैं। समय-समय पर अन्य प्रकाशनों के लिए भी सीमांचल से ख़बरें लिखते रहे हैं। उनकी ख़बरें The Wire, The Quint, Outlook Magazine, Two Circles, the Milli Gazette आदि में छप चुकी हैं। तंज़ील एक Josh Talks स्पीकर, एक इंजीनियर और एक पार्ट टाइम कवि भी हैं। उन्होंने दिल्ली के भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से मीडिया की पढ़ाई और जामिआ मिलिया इस्लामिआ से B.Tech की पढ़ाई की है।

Related News

बिहार में केंद्र सरकार की मिशन अमृत सरोवर योजना कितनी सफल है?

बिहार के जलवायु पत्रकारों के लिए ऑनलाइन रिपॉजिटरी

प्रदूषण की गिरफ्त में बचपन, बिहार में बढ़ती सांस की बीमारियां

क्या बिहार को एथनॉल हब बनाने का सपना बेपटरी हो रहा है?

बदलते मौसम और विकास कार्यों के बीच संघर्ष करते बिहार के काले हिरण

बिहार के जलाशयों, नदियों से क्यों गायब हो रहे घोंघे?

जलवायु परिवर्तन के चलते बिहार में फिर बढ़ रही फाइलेरिया?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

बिहार के नवादा में अतहर की मॉब लिंचिंग के डेढ़ महीने बाद भी न मुआवज़ा मिला, न सबूत जुटे

बिहार चुनाव के बीच कोसी की बाढ़ से बेबस सहरसा के गाँव

किशनगंज शहर की सड़कों पर गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाएं

किशनगंज विधायक के घर से सटे इस गांव में अब तक नहीं बनी सड़क

बिहार SIR नोटिस से डर के साय में हैं 1902 में भारत आये ईरानी मुसलमान