Main Media

Get Latest Hindi News (हिंदी न्यूज़), Hindi Samachar

Support Us

बिहार चुनाव के बीच कोसी की बाढ़ से बेबस सहरसा के गाँव

बिहार के सहरसा जिले के सैकड़ों परिवार फिर से कोसी के कहर का शिकार हुए हैं। जिले के कई इलाकों में बाढ़ ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

Sarfaraz Alam Reported By Sarfraz Alam |
Published On :
kosi floods leave saharsa villages helpless amid bihar elections

बिहार के सहरसा जिले के सैकड़ों परिवार फिर से कोसी के कहर का शिकार हुए हैं। जिले के कई इलाकों में बाढ़ ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित महिषी प्रखंड के कई गांव भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। झाड़ा पंचायत का यह इलाका सबसे अधिक प्रभावित है और हालात भयावह बने हुए हैं।


पानी में डूबे ग्रामीणों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, हर साल कोसी के उफान से कई गांव डूब जाते हैं, लेकिन सरकार अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं खोज पाई है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में दो महीने पहले से पानी भरना शुरू हो गया था, लेकिन 6 अक्टूबर को अचानक बाढ़ का पानी घरों के अंदर घुस गया।

Also Read Story

बिहार के नवादा में अतहर की मॉब लिंचिंग के डेढ़ महीने बाद भी न मुआवज़ा मिला, न सबूत जुटे

किशनगंज शहर की सड़कों पर गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाएं

किशनगंज विधायक के घर से सटे इस गांव में अब तक नहीं बनी सड़क

बिहार SIR नोटिस से डर के साय में हैं 1902 में भारत आये ईरानी मुसलमान

ईसाई आदिवासियों पर बजरंग दल का हमला, कटिहार से Ground Report

कोसी कटान से लाचार सहरसा के लोगों का दुःख-दर्द कौन सुनेगा?

बिहार में हो रहे वोटर लिस्ट रिवीजन से भारत-नेपाल के बीच बेटी-रोटी का संबंध खतरे में?

बढ़ती गर्मी और कम होती बारिश से परेशान, क्या जलवायु संकट की चपेट में हैं बिहार के मखाना किसान?

डायन बता पांच लोगों को ज़िंदा जलाने वाला पूर्णिया का गांव अंधविश्वास के दलदल से कब निकल पाएगा?

जान बचाने के लिए कई लोग घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। कई परिवार दो वक्त की रोटी से भी वंचित हैं। खाने को अनाज नहीं है। बाढ़ से खेती का भी नुकसान हुआ है। करीब 10,000 की आबादी वाले इस गांव में अब तक सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं पहुंची है।


बुजुर्ग महिला मुश्तरी बेगम के घर का चूल्हा जलभराव में टूट चुका है। उनका परिवार पिछले दो दिनों से भूख और प्यास में पड़ोसी की छत पर शरण लिए हुए है।

वहीं, धुनमुन देवी के घर का सामान और खाने-पीने की जरूरी चीजें बाढ़ के पानी में बह गईं। इस कुदरती आपदा को झेलते ये ग्रामीण अब सरकार और प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे हैं।

बाढ़ के कारण बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति सबसे अधिक खराब है। खाने-पीने की कमी के साथ-साथ सामान्य दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। बाढ़ ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक रूप से भी काफी नुकसान पहुंचाया है।

ग्रामीण इस समय आवाजाही के लिए छोटी नावों पर निर्भर हैं। इनमें से कई नाव पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं, जिससे हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये से बेहद नाराज़ हैं और राहत कार्यों में तेजी की मांग कर रहे हैं।

इस मामले में सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र के राजद विधायक युसूफ सलाउद्दीन ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए।

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

एमएचएम कॉलेज सहरसा से बीए पढ़ा हुआ हूं। फ्रीलांसर के तौर पर सहरसा से ग्राउंड स्टोरी करता हूं।

Related News

हिरासत में मौतों का केंद्र अररिया! फिर एक मौत, उठने लगे सवाल

बहादुरगंज का ‘साइको पुलिसवाला’, क्रूरता के कई मामले आये सामने

बिहार में नदी कटाव के साए ज़िंदगियाँ और जगती उम्मीदें

सहरसा में कोसी से सटे दर्जनों गांवों पर मंडराया बाढ़-कटाव का खतरा

बिहार-पश्चिम बंगाल बॉर्डर पर जर्जर सड़क से परेशान कई गाँव के लोग

गड्ढों में गुम विकास को तलाशते पश्चिम बंगाल के इस गांव के लोग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

बिहार के नवादा में अतहर की मॉब लिंचिंग के डेढ़ महीने बाद भी न मुआवज़ा मिला, न सबूत जुटे

बिहार चुनाव के बीच कोसी की बाढ़ से बेबस सहरसा के गाँव

किशनगंज शहर की सड़कों पर गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाएं

किशनगंज विधायक के घर से सटे इस गांव में अब तक नहीं बनी सड़क

बिहार SIR नोटिस से डर के साय में हैं 1902 में भारत आये ईरानी मुसलमान