सीमांचल क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। किशनगंज–जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना को केंद्र सरकार ने ‘विशेष रेल परियोजना’ (Special Railway Project) के रूप में अधिसूचित कर दिया है। 51.632 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगी। इस संबंध में भारत के राजपत्र (Gazette of India) के असाधारण अंक में अधिसूचना प्रकाशित हो चुकी है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) की ओर से 28 जुलाई 2026 को अधिसूचना जारी की गई। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। अधिसूचना में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 2 के खंड (37A) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उल्लेख करते हुए “Kishanganj – Jalalgarh New Line (51.632 Km)” को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया गया है। परियोजना के लिए जारी दस्तावेज में फाइल संख्या W/207/CON/NJP/LAND/KNE-JAG का भी उल्लेख है। आदेश पर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के निर्माण संगठन के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण-2) हितेंद्र गोयल के हस्ताक्षर हैं।
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भू-सर्वे और भूमि अधिग्रहण होगा महत्वपूर्ण चरण
राजपत्र में जारी मौजूदा अधिसूचना में अभी किसी गांव, मौजा, खाता या खेसरा की विस्तृत सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में प्रभावित जमीन और रैयतों की वास्तविक जानकारी के लिए आगामी सर्वे और भूमि संबंधी अधिसूचनाओं का इंतजार करना होगा।
परियोजना के अगले चरण में मुख्य रूप से ये प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी:
विस्तृत भू-सर्वे: रेल लाइन का अंतिम मार्ग किन गांवों, मौजों और पंचायतों से होकर गुजरेगा।
भूमि अधिग्रहण: परियोजना के लिए कितनी भूमि की आवश्यकता होगी और किन क्षेत्रों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
मुआवजा प्रक्रिया: प्रभावित रैयतों को मुआवजा और अन्य वैधानिक लाभ किस प्रक्रिया के तहत दिए जाएंगे।
निर्माण कार्य: भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रैक निर्माण सहित जमीनी काम कब शुरू होगा।
किशनगंज–जलालगढ़ नई रेल लाइन को सीमांचल क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 51.632 किलोमीटर की इस नई रेल लाइन से किशनगंज और जलालगढ़ के बीच रेल संपर्क को नया आधार मिलेगा और बिहार तथा पश्चिम बंगाल के संबंधित क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के साथ परियोजना को अब औपचारिक प्रशासनिक और कानूनी आधार मिल गया है।
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