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किशनगंज: पोठिया के डोंक घाट पर बनेगा 268 मीटर लंबा पुल, टेंडर जारी

टेंडर में भाग लेने के लिए बोलीदाता को 10,000 रुपये बोली दस्तावेज़ की लागत के तौर पर देने होंगे जबकी 32.48 लाख रुपये बयाना के तौर पर जमा करना होगा।

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
Published On :
kishanganj 268 meter long bridge will be built on donk ghat of pothia, tender issued

बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत किशनगंज में एक पुल निर्माण के लिए टेंडर जारी किया है। जिले के पोठिया प्रखंड स्थित खरखरी मोहगर डोंक घाट पर लंबे समय से पुल की मांग की जा रही थी जिसके लिए अब निविदा आमंत्रित की गई है।


इस पुल की लंबाई 268.32 मीटर होगी जिसके निर्माण कार्य में 22 करोड़ 44 लाख खर्च होंगे। अगले पांच वर्षों तक पुल के मेंटेनेंस कार्य के लिए 3.7 लाख रुपये की राशि आवंटित की जाएगी।

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इस परियोजना के लिए इच्छुक बोलीदाताओं को टेंडर भरने के लिए 18 जुलाइ 2025 से 28 जुलाई तक का समय दिया गया है। 28 जुलाई शाम 3:00 बजे तकनीकी बिड खोल दी जाएगी। पुल निर्माण में 12 से 18 महीने का समय लगने का अनुमान है।


टेंडर में भाग लेने के लिए बोलीदाता को 10,000 रुपये बोली दस्तावेज़ की लागत के तौर पर देने होंगे जबकी 32.48 लाख रुपये बयाना के तौर पर जमा करना होगा। टेंडर के दस्तावेज़ www.pmgsytendersbih.gov.in से डाउनलोड किए जा सकते हैं ।

खबर का असर

डोंक घाट पर बीते कई वर्षों से स्थानीय ग्रामीण पुल की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कई बार ‘मैं मीडिया’ ने ग्रामीणों की समस्या को उजागर किया । नवंबर 2023 में “जनप्रतिनिधि से मायूस ग्रामीण, चंदा कर बनाया चचरी पुल” के शीर्षक के साथ इसपर हमने ग्राउंड रिपोर्ट की। इसके अलावा उसी वर्ष अक्टूबर में “जनाज़े में जा रहे थे लोग, पलट गई नाव” शीर्षक के साथ हमने एक और ग्राउंड रिपोर्ट की जिसमें पुल न होने से ग्रामीणों को हो रही दिक्कतों को प्रमुखता से दिखाया।

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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