मेची नदी… दो देशों को जोड़ने वाली नदी। एक तरफ नेपाल… दूसरी तरफ भारत का किशनगंज ज़िला। इसी नदी को पार करके आई थीं रीना देवी, एक नेपाली बेटी जो अब भारत में बहू हैं। पहचान छुपाने के लिए हमने इस खबर में सभी किरदारों का नाम बदल दिया है और चेहरा छिपा दिया है।
शादी के बीस साल हो गए हैं। रीना की ससुराल बिहार में और मायका नेपाल में है। बरसों से बिना पासपोर्ट या किसी कागज़ के वे इस नदी को पार करती रहीं। कभी नाव से, कभी पैदल।
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रीना की चिंता अचानक नहीं उठी। वजह है बिहार में चल रहा — स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न यानी SIR, जिसमें वोटर लिस्ट की फिर से जांच हो रही है।
भारतीय निर्वाचन आयोग यानी ECI ने 24 जून को प्रेस रिलीज़ जारी कर कहा कि SIR का उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि सभी योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल हों और कोई भी अयोग्य व्यक्ति वोटर लिस्ट में ना हो। जो लोग 2003 से पहले वोटर लिस्ट में थे, उन्हें केवल एक फॉर्म भरना है। लेकिन जो लोग बाद में जुड़े हैं उनके माता-पिता का नाम 2003 के वोटर लिस्ट में होना चाहिए या विभिन्न दस्तवेज़ों के सहारे उन्हें अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।
ECI ने जिन दस्तावेज़ों को मान्य माना है उनमें शामिल हैं — सरकारी/बैंक/डाकघर या बीमा कंपनी द्वारा जारी पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, स्कूल प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, NRC, परिवार रजिस्टर, और सरकारी आवास या ज़मीन का प्रमाण पत्र। आधार कार्ड जैसे दस्तावेज़ इन महिलाओं के पास हैं, लेकिन ECI ने उसे मान्य नहीं माना है। हालांकि इनमें से कई ने स्थायी निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन डाल दिया है।
भारत की नेपाल के साथ 1751 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 756 किलोमीटर बिहार में पड़ती है। बिहार के सात ज़िले, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज, नेपाल सीमा से सटे हुए हैं।
भारत और नेपाल के बीच प्राचीन संबंध है और दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों की संस्कृति, जीवनशैली और भाषा लगभग एक जैसी है। इन सदियों पुराने रिश्ते को मान्यता देते हुए दोनों देशों ने 31 जुलाई 1950 को भारत-नेपाल शान्ति तथा मैत्री सन्धि पर हस्ताक्षर किए।
इस संधि के अनुच्छेद 7 में कहा गया है, “भारत और नेपाल की सरकारें इस बात पर सहमत हैं कि एक-दूसरे के नागरिकों को परस्पर आधार पर निवास, संपत्ति के स्वामित्व, व्यापार और वाणिज्य में भागीदारी, आवागमन और इसी प्रकार के अन्य अधिकारों में समान विशेषाधिकार दिए जाएंगे।”
इस संधि के तहत दोनों देशों ने आपसी सीमा को खुला रखने का फैसला किया। एक-दूसरे के देश में प्रवेश के लिए पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। खुली सीमा, पासपोर्ट की आवश्यकता न होना और समान सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के कारण भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का संबंध बना हुआ है। इसलिए दोनों देशों के बीच विवाह भी आम बात है। नेपाल सीमा से लगे बिहार का शायद ही कोई ऐसा गांव होगा, जहां नेपाल की बहुएं न मिले।
अकेले रीना के गांव में 200 से ज़्यादा नेपाली बहुएं हैं, जिनमें से कई की शादी 2003 के बाद हुई है। इसलिए उनका नाम 2003 के वोटर लिस्ट में नहीं है। न ही उन्हें पता कि वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब क्या हो सकता है। ये महिलाएं नागरिकता लेने की प्रक्रिया से पूरी तरह अनजान हैं।
किशनगंज के जिलाधिकारी विशाल राज कहते हैं, “फिलहाल हम सिर्फ एन्युमरेशन फॉर्म इकट्ठा कर रहे हैं। जिनके पास वैध दस्तावेज़ नहीं हैं, वे एन्युमरेशन फॉर्म जमा कर सकते हैं। नेपाली बहुओं के मामले में हम बाद में फैसला लेंगे, जब चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेगा।”
उधर मतदाता सूची से नाम कटने का डर भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘बेटी-रोटी संबंध’ को गहरे प्रभावित कर सकता है।
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