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क्या बिहार को एथनॉल हब बनाने का सपना बेपटरी हो रहा है?

राज्य का पहला इथेनॉल प्लांट साल 2022 में पूर्णिया में खुला, जिसकी उत्पादन क्षमता 65 किलोलीटर प्रति दिन है। इसके बाद एक-एक कर कई फ़ैक्टरियाँ लगीं। फिलहाल, बिहार में कुल 19 एथनॉल फैक्टरियां चल रही हैं, जिनके साथ  तेल मार्केटिंग कंपनियों का करार है।  इन फ़ैक्टरियों से वादे के मुताबिक़, एथनॉल का उठाव होने लगा।

shah faisal main media correspondent Reported By Shah Faisal |
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Ethanol plant in purnea

पांच साल पहले पटना में एथनॉल प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी 2021 का आग़ाज़ करते हुए बिहार के तत्कालीन उद्योग मंत्री शाहनवाज़ हुसैन ने कहा था, “बिहार एथनॉल का हब बनेगा, जो विदेशी मुद्रा अरब देशों से तेल ख़रीदने में चली जाती थी, उसे बिहार बचाएगा… हमारा टारगेट है कि बिहार एथनॉल उत्पादन में नंबर एक बने, सबसे ज़्यादा एथनॉल कहीं बनेगा, तो बिहार में ही बनेगा, यही मेरा वादा है।”


लेकिन, हालिया प्रकरण से लग रहा है कि बिहार को एथनॉल हब बनाने का सपना बेपटरी हो रहा है। दरअसल, पिछले साल अक्टूबर-नवम्बर में तेल मार्केटिंग कंपनियों ने एथनॉल उठाव के लिए जो टेंडर जारी किया, उसमें बिहार का कोटा न केवल घटा दिया, बल्कि उक्त टेंडर में अनाज आधारित समर्पित एथनॉल कंपनियों को प्राथमिकता न देते हुए सहकारी चीनी मिलों से भी एथनॉल ख़रीदने की बात कही गई।

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इसे बिहार की समर्पित एथनॉल उत्पादक कंपनियां दीर्घकालिक उठाव अनुबंध (लांग टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट या एलटीओए) का उल्लंघन बता रही हैं और उनका कहना है कि इससे फ़ैक्टरियाँ बंद करने की नौबत आ जाएगी।


ग़ौरतलब हो कि भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना दो दशक से भी पहले शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य विदेशों पर पेट्रोल के लिए भारत की निर्भरता को कम करना था। शुरुआत में सरकार ने पेट्रोल में 5% एथनॉल मिलाने का लक्ष्य प्राप्त किया और बाद में 10% का लक्ष्य भी हासिल कर लिया। साल 2020 में केंद्र सरकार ने फ़ैसला किया कि वह पेट्रोल में अब 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाएगा। वर्ष 2025 तक ये लक्ष्य हासिल हासिल करने का निर्णय लिया गया था।

Bihar Ethanol Plant

लेकिन, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत की तीन सार्वजनिक तेल मार्केटिंग कंपनियों हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम को नियमित तौर पर एथनॉल की ज़रूरत थी। 2021 की नीति आयोग की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि इस टारगेट को पूरा करने के लिए हर साल लगभग 1016 करोड़ लीटर इथेनॉल की ज़रूरत होगी।

चूँकि गन्ना से बनने वाले एथनॉल की सप्लाई सिर्फ़ गन्ना के मौसम में ही हो सकती थी, सरकार ने अनाज ख़ास तौर पर मक्का और खुद्दी (चावल के टुकड़े) से एथनॉल बनाने के लिए कंपनियों से फ़ैक्टरियां लगाने को कहा। लेकिन फ़ैक्टरियों को नियमित और तयशुदा मात्रा में एथनॉल ख़रीद का वादा चाहिए था, तो तेल मार्केटिंग कंपनियाँ और एथनॉल बनाने वाली कंपनियों के बीच दीर्घकालिक उठाव अनुबंध हुआ। इस अनुबंध में तय हुआ कि तेल मार्केटिंग कंपनियाँ, करार में जितना एथनॉल ख़रीदने का वादा किया था, उतना तो ख़रीदेगी ही, साथ ही अगर और एथनॉल की ज़रूरत पड़ेगी, इन फ़ैक्टरियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

बिहार सरकार ने इस पहल को सुनहरे मौक़े की तरह लिया और एथनॉल इकाई स्थापित करने वाली कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एथनॉल प्रोडक्शन प्रमोशन पॉलिसी 2021 लेकर आई। इस नीति में समर्पित एथनॉल फ़ैक्टरियों को कई तरह की रियायतें दी जाती हैं।

राज्य का पहला इथेनॉल प्लांट साल 2022 में पूर्णिया में खुला, जिसकी उत्पादन क्षमता 65 किलोलीटर प्रति दिन है। इसके बाद एक-एक कर कई फ़ैक्टरियाँ लगीं। फिलहाल, बिहार में कुल 19 एथनॉल फैक्टरियां चल रही हैं, जिनके साथ  तेल मार्केटिंग कंपनियों का करार है।  इन फ़ैक्टरियों से वादे के मुताबिक़, एथनॉल का उठाव होने लगा।

अक्टूबर, 2025 के टेंडर में क्या था 

दिक़्क़त शुरू हुई अक्टूबर, 2025 से, जब तेल मार्केटिंग कंपनियों ने साल 2025-2026 के लिए  1050 करोड़ लीटर एथनॉल उठाव को लेकर टेंडर जारी किया। इस टेंडर में बिहार से एथनॉल उठाव का कोटा कम कर दिया गया।  साथ ही अतिरिक्त ज़रूरत पड़ने पर एथनॉल ख़रीद में भी करार में शामिल कंपनियों को प्राथमिकता देनी थी। 

बिहार इथेनॉल एसोसिएशन के महासचिव कुणाल किशोर ने मीडिया को बताया कि पूर्व में करार के नियमों के तहत इथेनॉल खरीदा गया लेकिन पिछले साल जो टेंडर जारी हुआ, उसमें एथनॉल उत्पादक कंपनियों से ख़रीद की प्राथमिकता ख़त्म कर दी गई और सहकारी चीनी मिलें प्राथमिकता बन गईं। उनका कहना है कि अगर स्थिति यही रही, दूसरे निवेशक बिहार आने से बचेंगे, जिससे बिहार में निवेश संभावनाओं को नुक़सान पहुँचेगा।

Bihar Ethanol

यहां यह भी बता दें कि बिहार में फ़िलहाल नौ सहकारी चीनी मिलें चल रही हैं। 

कुणाल किशोर ने आगे कहा कि फ़ैक्टरी को आर्थिक तौर पर फ़ायदेमंद बने रहने के लिए ज़रूरी है कि वह अपनी क्षमता का 90–95% उत्पादन करे। लेकिन अभी की जो स्थिति है, उसमें उत्पादन 50 प्रतिशत तक गिर जाएगा। ऐसा होता है, तो प्लांट बमुश्किल पांच से छह महीने तक ही चल पायेंगे और फिर बंद हो जाएंगे।

भारत प्लस इथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड, जिसका बक्सर ज़िले में अनाज आधारित एथनॉल प्लांट है, ने तेल मार्केटिंग कंपनियों को एक पत्र लिखकर टेंडर को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने पत्र में लिखा, “पिछले इथेनॉल आपूर्ति वर्षों में अनुबंध में शामिल एथनॉल उत्पादक कंपनियों को प्राथमिकता दी गई थी। लेकिन, 2025-26 के टेंडर में सहकारी चीनी मिलों को पहली प्राथमिकता दी गई, जबकि समर्पित इथेनॉल उत्पादक इकाइयों को दूसरी प्राथमिकता में ले जाया गया, जो अवैध है।”

फुलवारी से जदयू विधायक श्याम रजक ने विधानसभा में कहा कि एथनॉल खरीद में आधा कटौती हुई है जिससे 60 प्रतिशत फ़ैक्ट्री बंद हो गई है।उन्होंने कहा, “इस वजह से 700  से ज़्यादा मज़दूर बेकार हो गये हैं। सरकार हस्तक्षेप कर कटौती को ख़त्म करे।”

उद्योग मंत्री का दावा और सच

जब टेंडर सामने आया, उसके बाद बिहार के कई एथनॉल उत्पादक इकाइयों के कुछ समय के लिए बंद होने की ख़बरें आने लगीं। बक्सर और वैशाली के एथनॉल इकाइयों को कम से कम 10 दिनों तक बंद रखने की बात कही गई। 

लेकिन, बिहार के उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने दावा किया कि उनके पास दो दिनों का ही इंसेंटिव क्लेम आया, जिसका मतलब है कि फ़ैक्टरियाँ सिर्फ़ दो दिनों तक बंद रहीं। अगर ज़्यादा दिनों तक बंद थीं फ़ैक्टरियां तो उनकी तरफ़ से इंसेंटिव का क्लेम क्यों नहीं आया।

दिलीप जायसवाल ने ये भी कहा कि करार में जितने एथनॉल लेने के बात थी, तेल मार्केटिंग कंपनियां उतना ही एथनॉल ख़रीद रही है। बिहार की एथनॉल फ़ैक्टरियां 50 करोड़ लीटर से  ज़्यादा एथनॉल बना रही हैं जबकि करार 34.62 करोड़ लीटर एथनॉल ख़रीदने का ही था।  

लेकिन, टेंडर दस्तावेजों से पता चलता है कि एथनॉल उठाव में कटौती हुई है। अक्टूबर 2025 में जारी टेंडर में बिहार से 31.56 करोड़ लीटर एथनॉल उठाव की बात कही गई, जो साल 2022 में एथनॉल के उठाव के लिए किये गये करार के मुक़ाबले कम है। साल 2022 में किये गये करार के मुताबिक, बिहार की एथनॉल कंपनियों से कुल 34.62 करोड़ लीटर सालाना उठाव का वादा था। यानी कि तेल मार्केटिंग कंपनियां करार के मुकाबले इस बार 3.06 करोड़ लीटर कम एथनॉल उठाव करेंगी।

भारत प्लस एथनॉल प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी अजीत कुमार शाही ने इस पर कहा, “ऐसा नहीं है। कई दिन तक फ़ैक्टरी बंद थी और अभी 21 फ़रवरी से 5 मार्च तक 15 दिन फ़ैक्टरी बन्द थी। अभी शुरू चलाना शुरू किया, लेकिन क्षमता से कम उत्पादन कर रहे हैं, ताकि यूनिट बंद न करनी पड़े।”

मुजफ्फरपुर में अनाज आधारित इथेनॉल प्लांट चलाने वाली माइक्रोमैक्स बायोफ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ राकेश गुप्ता ने कहा, “कम एथनॉल उठाव होने से डर है कि आने वाले सालों में यह और कम हो सकता है, जिससे हमें प्लांट बंद कर देना होगा।”

उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने विधानसभा में बताया कि बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर एथनॉल उठाव का कोटा बढ़ाने और सभी एथनॉल  खरीदने को कहा है। उन्होंने कहा कि  जल्द इस पर निदान निकल जाएगा। 

(This story was produced with support from the Earth Journalism Network.)

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Shah Faisal is using alternative media to bring attention to problems faced by people in rural Bihar. He is also a part of Change Chitra program run by Video Volunteers and US Embassy. ‘Open Defecation Failure’, a documentary made by Faisal’s team brought forth the harsh truth of Prime Minister Narendra Modi’s dream project – Swacch Bharat Mission.

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