बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार सरकार करीब आधा दर्जन लोकलुभावन घोषणाएं कर चुकी है। इनमें से ताजा घोषणा है महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता।
29 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू करने का ऐलान किया।
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इस योजना के तहत बिहार के हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के लिए पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये दिये जाएंगे। ये राशि सीधे महिलाओं के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी और रोजगार शुरू करने के छह महीने बाद रोजगार का आकलन किया जाएगा और जरूरत के मुताबिक दो लाख रुपये की अतिरिक्त मदद दी जाएगी। यही नहीं, सरकार ने ये भी ऐलान किया कि इस स्वरोजगार से बने उत्पादों की बिक्री के लिए गांवों से लेकर शहरों तक हाट-बाजार विकसित किये जाएंगे।
ये योजना पहली सितम्बर से शुरू की जाएगी और इसका क्रियान्वयन ग्रामीण विकास विभाग करेगा। इस योजना को लेकर गाइडलाइन जारी किया जाना अभी बाकी है।
बताया जा रहा है कि पिछले दिनों नीतीश कुमार ने महिलाओं के साथ मैराथन संवाद किया था और इस संवाद के दौरान ही महिलाओं के स्वरोजगार के लिए आर्थिक मदद दिये जाने का सुझाव आया था।
जीविका के बावजूद महिला रोजगार योजना की जरूरत क्यों?
गौरतलब हो कि लगभग इसी तरह की एक योजना बिहार में पहले से ही काम कर रही है। बिहार लघु उद्यमी योजना नाम से चल रही इस स्कीम में भी लघु उद्यमों के लिए दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। इसके तहत पहली किस्त के तौर पर 50 हजार रुपये दिये जाते हैं ताकि उपकरण खरीदे जा सके। इसके बाद बाकी 1.5 लाख रुपये अन्य सामान खरीदने के लिए दिये जाते हैं।
इतना ही नहीं, विश्व बैंक की मदद से बिहार सरकार बिहार ग्रामीण रोजगार परियोजना भी चला रही है जिसे जीविका कहा जाता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को सामाजिक और आर्थिक तौर पर सशक्त करना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत अब तक महिलाओं का 1107481 स्वयं सेवक समूह तैयार किया जा चुका है और इनका 1047398 बैंक अकाउंट खोला गया है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब आर्थिक सशक्तीकरण के लिए ये योजना चल रही है तो फिर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की जरूरत क्या थी और 10 हजार रुपये में महिलाएं ऐसा क्या रोजगार कर सकती हैं?
बिहार सरकार की स्टार्टअप योजना से जुड़े एक व्यक्ति जो स्टार्टअप योजना के लिए आवेदकों को मशीनरी व अन्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं, ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, “मुझे नहीं पता कि 10 हजार रुपये में क्या रोजगार हो सकता है। ज्यादा से ज्यादा महिलाएं सिलाई मशीन खरीद सकती हैं या अगरबत्ता बनाने का काम कर सकती हैं। लेकिन इस तरह के काम अब लाभकारी नहीं है क्योंकि घर घर में इस तरह के काम हो रहे हैं। एक ठीकठाक रोजगार करने के लिए 10 हजार रुपये बहुत कम हैं। आप सड़क किनारे फल या सब्जी का ठेला भी नहीं लगा सकते हैं 10 हजार रुपये में।”
उन्होंने आशंका जताई कि इस स्कीम का हश्र भी वैसा ही होगा, जैसे लघु उद्यमी योजना का हो रहा है। “लघु उद्यमी योजना के तहत बहुत सारे लोगों ने आर्थिक मदद ली और पैसा डकार गये, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के साथ भी कमोबेश वैसा ही होगा।”
राजनीतिक पार्टियां इस घोषणा को चुनावी जुमला मान रही हैं। भाकपा (माले) लिबरेशन की नेता शशि यादव ने कहा, “ये सिर्फ और सिर्फ चुनावी जुमला है और कुछ भी नहीं।”
गरीब परिवारों को दो लाख की मदद वाली स्कीम का क्या हुआ?
“सरकार को तो पहले ये बताना चाहिए कि उसने जाति सर्वेक्षण के बाद छह हजार रुपये से कम कमाई वाले परिवारों को दो लाख रुपये देने की जो घोषणा की थी, उसका क्या हुआ? कितने लोगों को ये राशि मिली? हमलोगों का आकलन है कि महज कुछ ही परिवार को इसका लाभ मिल पाया। ज्यादातर लोग इससे वंचित हैं क्योंकि उनका आय प्रमाण पत्र सरकार बना ही नहीं रही है,” शशि यादव ने कहा।
उन्होंने आगे कहा, “बिहार सरकार अक्सर इस बात को लेकर अपनी पीठ थपथपाती है कि उसने जीविका योजना के तहत लाखों महिलाओं का स्वयं सहायता समूह बनाया और इसके जरिए महिलाएं आर्थिक तौर पर सशक्त हो गई हैं। अगर ऐसा हुआ है, तो फिर इस 10 हजार रुपये वाली योजना की क्या जरूरत है? और ये घोषणा चुनाव से ठीक पहले क्यों की जा रही है? सरकार को ये करना ही था तो सालभर पहले करती है।”
उल्लेखनीय हो कि बिहार सरकार ने पिछले दिनों पेंशन की राशि में इजाफा करने की घोषणा की थी और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के आरक्षण का दायरा भी बढ़ाया था। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली फ्री देने का ऐला भी किया था।
शशि यादव का कहना है कि महिलाएं इस बार सरकार से बेहद खफा हैं और बिहार सरकार इसी से डरी हुई है। “बिहार की स्कीम वर्कर महिलाओं का मानदेय बेहद कम है। अगर उनका मानदेय बढ़ा दिया जाए, तो इससे वे आर्थिक तौर पर सशक्त हो जाएंगी, लेकिन बिहार सरकार ऐसा नहीं कर रही है और नई लेकर आ गई। वह जानती है कि महिलाएं नाराज है, इसलिए ये योजना लाई गई है।”
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