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बिहार SIR नोटिस से डर के साय में हैं 1902 में भारत आये ईरानी मुसलमान

बिहार के किशनगंज में ईरानी मूल के शिया मुस्लिम समुदाय के करीब 600 लोग रहते हैं। पिछले दो दशकों से सिलसिलेवार इनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है। अब बिहार SIR के तहत चंद बचे मतदाताओं में से भी लगभग 20 लोगों को दस्तावेज़ दोबारा जमा करने का नोटिस मिला है, जिससे समुदाय में गहरी चिंता और असुरक्षा का माहौल है।

Tanzil Asif is founder and CEO of Main Media Reported By Tanzil Asif |
Published On :
iranian muslims who came to india in 1902 are in fear of bihar sir notice

बिहार के किशनगंज शहर में एक मुस्लिम समुदाय रहता है, जिसकी भाषा फ़ारसी है और ये लोग खुद को “हिंदुस्तानी ईरानी” कहते हैं। यह समुदाय शिया विचारधारा से जुड़ा है। बिहार में हुए SIR के बाद यहां के करीब डेढ़ द्वर्जन लोगों को नोटिस भेजकर पुनः काग़ज़ात जमा करने को कहा गया है ।


किशनगंज नगर परिषद के मोतीबाग कर्बला वार्ड संख्या 5 निवासी एहसान अली बताते हैं कि उनके पूर्वज भारत की आज़ादी से भी पहले ईरान से भारत आए थे। उस समय वे घोड़े बेचने का व्यापार करते थे। व्यापार के सिलसिले में भारत आने के बाद वे यहीं बस गए और वापस ईरान नहीं लौटे।

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1902 से उनका परिवार भारत में रह रहा है और कई पीढ़ियाँ यहीं गुजर चुकी हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय राजनीति की वजह से एक मुस्लिम नेता ने 2005 में मतदाता सूची से उनके समुदाय के कुछ लोगों का नाम हटवा दिया था। इसके बाद उन्होंने ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़ प्रशासनिक अधिकारियों को दिखाए थे।


किशनगंज के ईरानी मोहल्ले में इस समुदाय की आबादी करीब 600 है लेकिन SIR से पहले तक केवल 88 नाम ही मतदाता सूची में दर्ज थे। अब इनमें से करीब 20 लोगों को नोटिस भेज दिया गया है। इनमें एहसान अली का परिवार भी शामिल है।

125 साल पुराना सफर

भारत में ईरान से आए इन लोगों के पूर्वजों के इतिहास के बारे में किशनगंज के ईरानी समुदाय के बुज़ुर्ग बताते हैं कि मुग़ल शासक हुमायूँ से जब शेरशाह सूरी की लड़ाई हुई तो हुमायूं ने ईरान के एक शासक से मदद माँगी। मदद के लिए ईरान से सैनिक और अधिकारी भारत आए तो दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए और ईरानी व्यापारी भी यहाँ पहुँचने लगे। ड्राई फ्रूट्स और खाने-पीने का सामान बेचने वालों के साथ कई घोड़ा व्यापारी भी सोनपुर और किशनगंज के खगड़ा मेले तक आए। लगभग डेढ़ सौ साल पहले कुछ परिवार यहीं बस गए और भारत को अपना घर बना लिया। आज इस समुदाय के लोग बिहार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में रहते हैं। मुख्यतः इस समुदाय के लोग नार्थ-ईस्ट के राज्यों में पलायन कर चश्मा और पत्थर तरासने का काम करते हैं।

मोतीबाग कर्बला निवासी कश्मीरी बेगम बताती हैं कि उन्हें और उनकी ससुराल के दो और लोगों नोटिस भेजा गया है। उनकी मानें तो SIR के दौरान उन्होंने सभी ज़रूरी कागज़ात जमा कर दिए थे, फिर भी नोटिस आ गया। कश्मीरी बेगम का मानना है कि यह सब उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने और विदेशी साबित करने के लिए किया जा रहा है।

नागरिकता पर डर

किशनगंज नगर परिषद की वार्ड संख्या 7 के निवासी हैदर अली रत्न व्यापारी हैं। उनके समुदाय के अधिकांश लोग इसी पेशे से जुड़े हैं। व्यापार के सिलसिले में उन्हें अक्सर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है, लेकिन वोटर आईडी न होने के कारण उन्हें कई बार होटल तक नहीं मिल पाते। उनके समुदाय के लोगों में यह डर बढ़ रहा है कि कहीं उन्हें विदेशी घोषित न कर दिया जाए।

हैदर अली ने बताया कि उनकी मां का नाम 2003 की मतदाता सूची में था, लेकिन 2005 में हटा दिया गया। 2005 से ईरानी समुदाय के कई लोगों के नाम सूची से हटाने के लिए प्रशासन को गुमनाम आवेदन दिए गए, जिसके जवाब के लिए उन्हें नोटिस भेजा गया और दस्तावेज़ दिखाने को कहा गया। इसके बाद समुदाय के लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मदद मांगी, लेकिन किसी ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।

इस बारे में जब हमने किशनगंज के अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार से पूछा कि मोतीबाग करबला के ईरानी मोहल्ले में कितने लोगों को नोटिस भेजा गया है और क्या इससे उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े होते हैं, तो उन्होंने कहा कि यह फिलहाल जांच का विषय है। जांच की प्रक्रिया जारी है, अभी कुछ कहना संभव नहीं है। जांच पूरी होने के बाद ही जानकारी साझा की जाएगी।

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तंजील आसिफ एक मल्टीमीडिया पत्रकार-सह-उद्यमी हैं। वह 'मैं मीडिया' के संस्थापक और सीईओ हैं। समय-समय पर अन्य प्रकाशनों के लिए भी सीमांचल से ख़बरें लिखते रहे हैं। उनकी ख़बरें The Wire, The Quint, Outlook Magazine, Two Circles, the Milli Gazette आदि में छप चुकी हैं। तंज़ील एक Josh Talks स्पीकर, एक इंजीनियर और एक पार्ट टाइम कवि भी हैं। उन्होंने दिल्ली के भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से मीडिया की पढ़ाई और जामिआ मिलिया इस्लामिआ से B.Tech की पढ़ाई की है।

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