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Humayun Kabir की Babri Masjid से कितने प्रभावित होंगे Murshidabad के Muslim?

तृणमूल के विधायक और मुर्शिदाबाद के पुराने मुस्लिम नेता हुमायूँ कबीर की बग़ावत और बीते 6 दिसंबर को ज़िले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के नाम से एक मस्जिद की नींव डालने से मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना दिखने लगी है।

Tanzil Asif is founder and CEO of Main Media Reported By Tanzil Asif and Umesh Kumar Ray |
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how much will the muslims of murshidabad be influenced by humayun kabir's babri masjid

2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस 294 में से 215 सीटें जीतकर वापस सरकार में आई। पार्टी की की इस रिकॉर्ड जीत के पीछे कई कारण थे और उनमें एक महत्वपूर्ण कारण मुर्शिदाबाद ज़िले में पार्टी का बेहतरीन प्रदर्शन था। 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने यहाँ की 22 में से 20 सीटों पर जीत हासिल की थी, जो 2016 के चुनाव के मुक़ाबले पाँच गुना अधिक था। लेकिन इस बार सत्ताधारी तृणमूल के लिए मुर्शिदाबाद में इस प्रदर्शन को दोहरा पाना एक चुनौती है। मुर्शिदाबाद ज़िले में करीब 66% मुस्लिम आबादी है और ज़िले के कई विधानसभा क्षेत्रों में समीकरण करीब करीब ऐसा ही है। मुस्लिम वोटों का कई पक्षों में संभावित बिखराव तृणमूल के लिए मुश्किलें खड़ा कर सकता है। तृणमूल के विधायक और मुर्शिदाबाद के पुराने मुस्लिम नेता हुमायूँ कबीर की बग़ावत और बीते 6 दिसंबर को ज़िले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के नाम से एक मस्जिद की नींव डालने से मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना दिखने लगी है।


उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराये जाने के करीब तीन दशक बाद लगभग 900 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बन रही इस बाबरी मस्जिद की चर्चा आसपास के ज़िलों में भी होने लगी है। बानो आरा अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ पास के नदिया ज़िले से मस्जिद देखने आई हैं।

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लेकिन क्या बाबरी मस्जिद के नाम पर मुर्शिदाबाद में हुमायूँ कबीर की राजनीति परवान चढ़ पायेगी? हुमायूँ ने ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ यानी AJUP नाम से एक नया दल बनाया है। असदुद्दीन ओवैसी के AIMIM पार्टी के साथ गठबंधन में पार्टी ने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन हुमायूँ के भाजपा के साथ कथित तालमेल का स्टिंग ऑपरेशन वायरल होने के बाद ओवैसी ने हुमायूँ से दूरी बना ली है। हुमायूँ सबसे पहले 2011 में कांग्रेस के टिकट पर रेजिनगर सीट से विधायक बने थे। कुछ दिनों में ही वह तृणमूल के साथ चले गए, 2013 उपचुनाव में करारी हार हुई। 2016 का चुनाव उन्होंने निर्दलीय लड़ा, फिर हार गए। साल 2018 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और। इस बार भी हार मिली। आख़िरकार 2021 में तृणमूल के टिकट पर भरतपुर विधानसभा से विधायक बने। इस बार हुमायूं अपनी पार्टी के सिंबल पर रेजिनगर और नाओदा, दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों ही सीटें फिलहाल तृणमूल के पास हैं।


मुर्शिदाबाद के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्राणमय ब्रह्मचारी मानते हैं हुमायूँ कबीर तृणमूल के लिए एक बेहतर ऑर्गनाइज़र थे, वो खुद अपनी पार्टी से जीत नहीं सकते हैं, लेकिन मुर्शिदाबाद ज़िले की सीटों पर मुस्लिम वोट काट कर वह एक निर्णायक कारक बन सकते हैं। इसका फायदा भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट को मिल सकता है। प्राणमय ये भी मानते हैं कि बाबरी मस्जिद से जुड़ी भावनाएं हुमायूँ के लिए वोट में तब्दील होती नहीं दिख रही है।

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तंजील आसिफ एक मल्टीमीडिया पत्रकार-सह-उद्यमी हैं। वह 'मैं मीडिया' के संस्थापक और सीईओ हैं। समय-समय पर अन्य प्रकाशनों के लिए भी सीमांचल से ख़बरें लिखते रहे हैं। उनकी ख़बरें The Wire, The Quint, Outlook Magazine, Two Circles, the Milli Gazette आदि में छप चुकी हैं। तंज़ील एक Josh Talks स्पीकर, एक इंजीनियर और एक पार्ट टाइम कवि भी हैं। उन्होंने दिल्ली के भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से मीडिया की पढ़ाई और जामिआ मिलिया इस्लामिआ से B.Tech की पढ़ाई की है।

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