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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि से सीमांचल के छात्रों पर कितना असर

किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखंड स्थित कमलपुर पंचायत निवासी रूमान अहमद अलीगढ़ मुस्लिम युनिवेर्सिटी से एमएससी की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक वर्ष की फीस पहले करीब 9,000 रुपये थी जो फीस वृद्धि के बाद 12,600 रुपये हो गई। पेशे से किसान पिता के रोमान एकलौते बेटे हैं।

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
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how much will the fee hike in aligarh muslim university affect the students of seemanchal
Image Source: Instagram/@indo_islamic_amu & Facebook/@Dr-Haider Saif

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक फीस बढ़ोतरी के खिलाफ पिछले दिनों छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। अगस्त के पहले हफ्ते से ही फीस वृद्धि को लेकर छात्र यूनिवर्सिटी परिसर में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे जिसके बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल से कुलपति ने मुलाकात की। नए सत्र में अलग अलग कोर्स में हुई फीस वृद्धि को लेकर नाराज़ छात्रों का कहना है कि कई कोर्स की फीस 30% से 48% तक बढ़ाई गई। बीएससी (पारामेडिकल) के एक साल की फीस तो 12,470 रुपये से बढ़ाकर 20,100 रुपये कर दी गई यानी 61% की वृद्धि।


विश्विद्यालय के कुलपति के साथ हुई बैठक के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने फीस विर्धि को 2% से 10% तक रखने की बात मान ली है। इसके बाद 19 अगस्त को कुलपति के दफ्तर से एक नोटिस जारी हुआ जिसमें फीस वृद्धि 20% तक करने की बात कही गई। छात्रों ने इस नोटिस के बाद आक्रोशित होकर फिर से धरना प्रदर्शन शुरू किया।

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कैसे बढ़ा विरोध प्रदर्शन

शुक्रवार 8 अगस्त को ‘बाब ए सैयद’ गेट पर धरना प्रदर्शन कर रहे छात्र जुमे की नमाज़ की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने धरनास्थल पर नमाज़ पढ़ने से रोका। घटना से नाराज़ छात्रों ने प्रॉक्टर मोहम्मद वसीम अली की बर्खास्तगी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन को और तेज़ कर दिया।


“जब भी धरना होता है, और जुमे का दिन होता है तो नमाज़ वहीं पढ़ते हैं। इस बार जो जुमे की नमाज़ होने वाली थी तो उसमें प्रॉक्टर ने यूपी पुलिस को सुचना दी कि यहां नमाज़ हो रही है जो कि इल्लीगल है, नहीं होनी चाहिए। इस वजह से जब पुलिस आई तो, जो दो तीन लोग ज्यादा एक्टिव थे, कोशिश किया कि उन्हें पकड़ा जाए। जो भी जानमाज़ वग़ैरह बिछी हुई थी उसे विस्थापित किया गया,” एएमयू के छात्र रूमान अहमद ने ‘मैं मीडिया’ से बताया।

उन्होंने आगे बताया कि छात्र फीस वृद्धि के अलावा स्टूडेंट यूनियन के इलेक्शन न करवाने और कक्षा में उपस्थिति को लेकर प्रदर्शन कर रहे बच्चों के डिटेंशन से भी काफी नाराज़ थे। जुमे की नमाज़ में यूपी पुलिस के दखल के बाद विरोध प्रदर्शन में एक और मुद्दा बढ़ गया। सभी मुद्दों को संबोधित करते हुए 19 अगस्त को कुलपति के कार्यालय से जो नोटिस जारी हुआ उसमें कहा गया कि धरना के दौरान दुराचार के चलते डिटेन किये गये छात्रों की बात सुनी जायेगी। नोटिस में एएमयू स्टूडेंट यूनियन के चुनाव को दिसंबर महीने में कराने की बात भी कही गई और फीस बढ़ोतरी 20% तक ही रखी गई।

छात्र रूमान अहमद कहते हैं, “पहले जो बच्चे धरने पर बैठे थे उन्हें बुलाया गया, बातचीत हुई तो कुछ हद तक उन्होंने बात मनवा ली। इलेक्शन होगा, ये बात मानी गई। फी हाइक पर विश्वविद्यालय का कहना था कि फंडिंग कम हो रही है तो पैसों की पूर्ति कहीं से तो करनी होगी। यूजीसी भी पैसे जेनरेट करने को कह रहा है। प्रॉक्टर वसीम के इस्तीफे की मांग थी, लेकिन उनको न हटाकर दूसरे प्रॉक्टर को हटा दिया गया। बच्चों ने कहा कि हमें इन चार का नहीं, सिर्फ प्रॉक्टर वसीम का इस्तीफा चाहिए क्योंकि उन्होंने पुलिस बुलायी थी।”

एक अन्य छात्र मीज़ान अहमद ने हमें बताया, “हमारी मांग थी कि फीस वृद्धि शून्य प्रतिशत हो। लेकिन फिर 10 प्रतिशत तक अनौपचारिक तौर पर समझौता हुआ था। धरना खत्म होने के बाद आधिकारिक नोटिस में 20% तक लिखा गया, फिर उसके बाद धरना जारी रहा।”

सीमांचल के छात्रों पर फीस वृद्धि का असर

किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखंड स्थित कमलपुर पंचायत निवासी रूमान अहमद अलीगढ़ मुस्लिम युनिवेर्सिटी से एमएससी की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक वर्ष की फीस पहले करीब 9,000 रुपये थी जो फीस वृद्धि के बाद 12,600 रुपये हो गई। पेशे से किसान पिता के रोमान एकलौते बेटे हैं।

रूमान कहते हैं, “मेरे पिता किसान हैं। हमारे घर में आमदनी का स्रोत खेती ही है। उसी से परिवार की देखरेख करनी है, बच्चों की पढ़ाई है। कोई स्थायी नौकरी नहीं है, खेती ही है सिर्फ, तो फीस बढ़ने से आर्थिक बोझ तो पड़ेगा ही। घर में मैं अकेला लड़का हूँ और मेरी बहनें हैं।”

घर वाले परेशान न हों इसलिए फीस वृद्धि पर हो रहे धरना प्रदर्शन के बारे में उन्होंने घर पर थोड़ा-थोड़ा ही बताया है। “घर वालों को इस मामले में ज़्यादा इन्वॉल्व नहीं किया है। मैं अकेला हूँ इसलिए घर पर ज़्यादा शेयर नहीं करता हूँ, वह परेशान हो जाएंगे। उन्हें यह पता है कि धरना है लेकिन किस स्तर का है इन सारी चीज़ों के बारे में पता नहीं है,” रूमान आगे बोले।

“हम पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा”

किशनगंज के बहादुरगंज नगर पंचायत निवासी मीज़ान एएमयू अलीगढ़ में एमबीबीएस के छात्र हैं। यह उनका आखिरी वर्ष है। फीस वृद्धि होने से वह चिंतित हैं। मीज़ान के पिता काफी बुज़ुर्ग हैं इसलिए वह कुछ काम नहीं करते हैं। मीज़ान के बड़े भाई उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाते हैं।

मीज़ान कहते हैं, “हमलोग घर से बाहर रहते हैं इतनी दूर। यह शैक्षणिक फीस बढ़ी है। डाइनिंग फीस जैसे और भी खर्च होते हैं। यह केंद्रीय यूनिवर्सिटी है तो यही अपेक्षा रहती है कि कम फीस में पढ़ सकेंगे। सब यहां एंट्रेंस क्रैक करके, इतनी मेहनत करके आते हैं, फीस वृद्धि से हम पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा ही।”

मीज़ान के अनुसार, पहले और दूसरे वर्ष उनकी फीस 7,800 रुपये थी। तीसरे साल 500 रुपये की वृद्धि हुई और फीस 8,300 रुपये हुई। हालांकि, इस बार वेबसाइट पर फीस 10,000 से भी अधिक दिख रही थी जो अब 9,900 रुपये हो गई है।

“अभी हमने फीस नहीं दी है, अगर फीस जमा कर देंगे तो धरना करने का क्या कारण रहेगा हमलोगों का। मेरे क्लास में अधिकतर बच्चों ने फीस जमा नहीं की। परीक्षा की वजह से हमलोग धरना में शामिल नहीं हो पा रहे हैं तो इसलिए फीस न जमा करके धरने का जितना समर्थन कर पा रहे हैं, कर रहे हैं,” मीज़ान ने कहा।

फीस वृद्धि से दाखिला लेने में हुई देरी

किशनगंज के पोठिया प्रखंड स्थित नौकट्‌टा पंचायत निवासी मुदस्सिर जमील अकबर एएमयू, अलीगढ़ में एमबीए अंतिम वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि उनकी द्वितीय वर्ष की फीस 9,700 रुपये थी जो वृद्धि के बाद 12,600 रुपये हो गई। इसके कारण घर पर आर्थिक बोझ पड़ा है। पिता किसान हैं जबकि बड़े भाई प्राइवेट जॉब करते हैं और वही उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाते हैं।

“हर साल फीस इतनी कम बढ़ती है कि पता भी नहीं चलता है। यह अचानक से बढ़ी है। हर साल 25 या 50 रुपये बढ़ती है लेकिन इस बार करीब 2,000 ज़्यादा बढ़ गई है,” मुदस्सिर ने कहा।

पिछले दिनों मुदस्सिर के चचेरे भाई ने एएमयू, अलीगढ़ में बीएससी कोर्स में दाखिला लिया। ऑनलाइन दाखिला लेते समय वेबसाइट पर एक साल की फीस 13,000 की जगह 17,000 रुपये दिखी। पैसों का इंतज़ाम करने में थोड़ी देरी हुई, लेकिन फिर किसी तरह एडमिशन आखिरी दिन हो सका।

“कई कोर्स की फीस दोगुनी हो गई है। मेरे चचेरे भाई का हम बीएससी में दाखिला कराये हैं। सोचा था कि 12-13 हज़ार रुपये में दाखिला हो जाएगा। अतिरिक्त पैसों का इंतेज़ाम नहीं था, फिर वह कहीं से पैसों का इंतेज़ाम किया और आखिरी दिन एडमिशन लिया। यहां दो दिन का समय मिलता है, तो उसने दूसरे दिन दाखिला लिया। 5,000 रुपये एक बड़ी रक़म होती है,” एमबीए छात्र मुदस्सिर ने कहा।

नाम न बताने की शर्त पर एमटेक की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने बताया कि पहले उनके 2 सेमेस्टर की फीस करीब 17,000 रुपये थी जो अब 25,200 रुपये हो चुकी है। किशनगंज के बहादुरगंज के रहने वाले इस छात्र के पिता नहीं हैं, इसलिए वह ट्यूशन पढ़ाकर खुद अपनी फीस भरते हैं।

वह कहते हैं, “26 जुलाई से मेरा सेमेस्टर शुरू हुआ, तब ही फीस जमा करनी पड़ती है। पता चला कि फीस बढ़ा दी गई है। पहले 34% फीस बढ़ाई गई थी जिसे 2% से 10% तक करने की बात कही गई। मैंने फीस जमा कर दी है। मेरे हिसाब से 5,000 रुपये तक वापस आएगा। 10% तक फीस में बढ़ोतरी करना अगर बनता भी है तो इतना नहीं बनता है। फीस बढ़ेगी तो ज़ाहिर सी बात है मुश्किल तो आनी ही है। बहुत सारे बच्चे तो पैसे की वजह से कोर्स छोड़ देते हैं।”

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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