बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने जब पुलिस सेवा से समय से पहले रिटायरमेंट लेकर राजनीति में कदम रखा तो इस बात की संभावना जताई गई कि वह विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इस संभावना पर मुहर भी लगी जब वो जदयू में शामिल हुए। कहा जा रहा था कि वो बिहार विधानसभा में बक्सर सदर सीट से चुनाव लड़ेंगे। कहा जा रहा था कि यह सीट इस बार जदयू को जाएगी। लेकिन इसी बीच बीजेपी के नेताओं ने इस सीट को लेकर हल्ला मचा दिया। अश्विनी चौबे जेेसे नेताओं ने कहा कि यह सीट बीजेपी की पारंपरिक सीट रही है। ऐसे में यहां से बीजेपी का ही उम्मीदवार उतरेगा।

एनडीए में बीजेपी और जेडीयू के बीच में सीटों को लेकर जब पेंच सुलझा तो लिस्ट में बक्सर जिले की 4 विधानसभा सीटों में से दो डुमराव और राजपुर (SC) JD(U) के खाते में गई लेकिन बक्सर की सीट बीजेपी के खाते में चली गई। जेडीयू ने इन दोनों सीटों से अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। ऐसे में अब गुप्तेश्वर पाण्डेय का क्या होगा यह सवाल उठने लगे हैं। बक्सर जिले की बाकी दो सीटों की बात करें तो ब्रह्मपुर अब वीआईपी के पास है तो वहीं बक्सर बीजेपी के खाते में है। इससे एक बात अब स्पष्ट हो चुकी है कि जेडीयू में शामिल हुए गुप्तेश्वर पांडे को पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया है।

बक्सर सदर से परशुराम चतुर्वेदी बने भाजपा उमीदवार

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के विधानसभा चुनाव लड़ने की कयासों पर विराम लग गया है। आज रात तक बीजेपी को बक्सर सदर सीट और अरवल सीट के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल करने थे। बीजेपी ने इस बारे में सूचना जारी करके जानकारी दे दी है। इस सूचना के आने के बाद ये साफ हो गया है कि गुप्तेश्वर पांडेय न तो बीजेपी में शामिल हुए है न ही वो बक्सर सीट से चुनाव लडेंगे।

बीजेपी की ओर से जारी सूचना के अनुसार बक्सर से परशुराम चतुर्वेदी और अरवल सीट से दीपक शर्मा को उम्मीदवारी दी गई है। ऐसे में गुप्तेश्वर पांडेय को लेकर जो कयास लग रहे थे उंसपर विराम लग गया है।

क्या जाएंगे लोकसभा?

बक्सर सीट को लेकर आए बीजेपी के फैसले ने ये तो क्लियर कर दिया है कि पांडेय विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन अभी पूर्व डीजीपी के लिए एक अवसर बाकी है। वो विधानसभा भले न जा सके हो लेकिन लोकसभा जाने की उम्मीद अभी बच्ची है। बता दें कि वाल्मिकीनगर लोकसभा सीट को लेकर उपचुनाव होने को है। ये सीट जदयू के कोटे में है। ऐसे में कहा जा रहा है कि जदयू उन्हें संसद में भेजने की तैयारी में है। अब देखना ये है कि पांडेय जी को लेकर नीतीश कुमार क्या फैसला लेते हैं।