Main Media

Get Latest Hindi News (हिंदी न्यूज़), Hindi Samachar

Support Us

पूर्णिया: मंडी में मक्का के घटते दामों से किसान परेशान, कहा-माफ़िया कर रहे मनमानी

स्थानीय किसानों का कहना है कि कुछ बड़ी कंपनी मक्का के मूल्य को कम करने के लिए रेक पॉइंट पर लगने वाले इंडेन को खरीद कर फ़र्ज़ी इंडेन लगा कर मक्का के मूल्य को कम कर रहे हैं।

Syed Tahseen Ali is a reporter from Purnea district Reported By Syed Tahseen Ali |
Published On :
Purnea Junction

सीमांचल में किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार मक्के की फसल को माना जाता है। पूर्णिया नगर क्षेत्र स्थित गुलाब बाग मंडी में पास और दूर दराज़ के कई व्यापारी मक्का खरीदने आते हैं। यहां का मक्का रेलवे के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है, जिससे सीमांचल के किसानों को मक्के का अच्छा मूल्य प्राप्त होता है लेकिन पिछले दिनों मक्के का मूल्य उचित दर से नीचे डोल रहा है जिससे मक्का किसानों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।


स्थानीय किसानों का कहना है कि कुछ बड़ी कंपनी मक्का के मूल्य को कम करने के लिए रेक पॉइंट पर लगने वाले इंडेन को खरीद कर फ़र्ज़ी इंडेन लगा कर मक्का के मूल्य को कम कर रहे हैं। उनके अनुसार पूर्णिया जंक्शन पर मक्के का रेक नहीं लगा है जबकि कुछ बड़ी कंपनियों ने रेल विभाग के साथ सांठगांठ कर फेक इंडेन लगाकर बाजार में आने वाले मक्के की कीमत को प्रति कुंटल 300 से ₹400 कम कर दिया है और यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में मक्के का मूल्य और गिरेगा।

किसान के साथ साथ कुछ स्थानीय व्यापारी भी फ़र्ज़ी रेक लगाने पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि बाहर से आने वाले जिन बड़े व्यापारियों को रेक मिलता है, वे अपने मन मुताबिक दाम पर मक्का बेचते हैं। जब तक उनका रेक खत्म नहीं हो जाता दूसरे व्यापारी को रेक नहीं मिल सकता।


स्थानीय व्यापारी सुरेंद्र भगत कहते हैं कि माफियाओं द्वारा फेक इंडेन लगाने की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “रेलवे को 4-5 बड़ी कंपनियों ने हाईजैक कर लिया है। इन बड़ी कंम्पनियों ने गिरोह बना लिया है । 2020 में मक्के का दाम 1400-1500 रुपये (प्रति क्विंटल) तक गिर गया था, मैंने गिरोह माफ़िया के विरुद्ध आवाज़ उठाई तो जांच करायी गयी और 2021 में मेरी बात सही साबित हुई।”

“मई 2021 में फेक इंडेन लगना बंद हुआ, तो दाम 1800-1900 रुपये हुआ। पिछले साल मक्का 2200-2300 रुपये हुआ, वह इसलिए हुआ क्योंकि गुलाब बाग के बहुत से छोटे छोटे व्यापारियों ने भी रेक लोड किया। एनएफ़ रेल में भाव 1500-1700 रुपये गिर गया है, ईसी रेल (EC) में अभी ऐसा नहीं हुआ है, इसमें अभी 2000 रुपये का भाव है। सारा खेल फेक इंडेन का है, पिछली बार जांच में ईसी रेल के घोटाले में कई लोग जेल भी गए थे,” उन्होंने कहा।

सुरेंद्र आगे कहते हैं, “हमने प्रधानमंत्री और रेलमंत्री सहित कई मंत्रियों को पत्र भेजा है। डीआरएम साहब के पास कल रेल मंत्री का पत्र भी आ गया है कि उचित जांच हो। यह 10-50 करोड़ का मामला नहीं है, हज़ारों करोड़ का घोटाला है। यही माफिया लोग मध्य प्रदेश में भी ऐसा किया, वहां भी किसान को उचित मूल्य नहीं मिला। किसान इतनी मेहनत से मक्के की फसल उगाता है कि इस पैसे से बेटी की शादी करेंगे या घर बनाएंगे लेकिन उसको उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।”

पूर्णिया जंक्शन के रेक पॉइंट पर काम कर रहे मजदूरों के ठेकेदार मदन कांत झा ने बताया कि 28 मार्च से अब तक एक भी रेक लोड नहीं हुआ है। मदन कहते हैं, “एक भी रेक लोड नहीं हुआ है। इस सीज़न में बोहनी ही नहीं हुआ है। डमी इंडेन लगा है, डमी इंडेन लगता है और खाली चला जाता है। डमी यानी फेक इंडेन लगा लेता है स्टेशन छेकने के लिए। छेक के रखता है स्टेशन के कोई दूसरा पार्टी प्रवेश न करे। पार्टी लोग 100-200 इंडेन लगाकर स्टेशन छेकता है ताकि दूसरा पार्टी सीज़न में एंटर नहीं कर सके।”

Also Read Story

कटिहार: करंट लगने से 27 गायों की मौत, पशुपालकों के घर पसरा मातम

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की अधिसूचना जारी, लेकिन कहाँ बनेगा पता नहीं

जलवायु संकट के चक्रव्यूह में फंसा बिहार का मखाना

बजट में घोषणा के बाद पूर्णिया में मखाना बोर्ड की स्थापना की मांग तेज़, ये है वजह

बिहार में पैक्स अपनी ज़िम्मेदारियों को निभा पाने में कितना सफल है?

कटिहार में बारिश व आंधी से केला की फसल बर्बाद

बिहार: खरीफ 2024-25 के लिए धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 34 लाख मेट्रिक टन से बढ़ाकर 45 लाख मेट्रिक टन किया गया

बिहार में पहली बार गुड़ उद्योग को प्रोत्साहन, 12.40 करोड़ रुपये स्वीकृत

बिहार राज्य फसल सहायता योजना में खरीफ 2024 के लिए आवेदन शुरू, यहाँ जानें सब कुछ

वहीं माल लोड कर रहे विकास कुमार नामक एक मज़दूर ने कहा, “यहां नमक, चीनी, खाद लोड हो रहा है। मकई लोड नहीं हो रहा है। मकई उधर दूसरी जगह से होता होगा, इधर इस बार एक भी बोरी लोड नहीं हुआ है।”

स्थानीय किसान कैलाश यादव ने कहा कि रोज़ाना 200-300 रुपये तक मूल्य गिर रहा है, ऐसे में किसान बेहद परेशान हैं। कैलाश यादव ने कहा, “प्रत्येक दिन 200-300 कर के माल का रेट गिर रहा है। बाज़ार टूट रहा है और किसान बेचारा मर रहा है। किसान की स्थिति बहुत दयनीय है। इसका कारण है कि यहाँ रेक नहीं लग रहा है, यहां से माल बाहर नहीं जा रहा है इसलिए दाम गिर जा रहा है। इतनी बड़ी मंडी है गुलाब बाग की, लेकिन यहाँ यह स्थिति है। हम लोग यही मांग करेंगे कि किसान को उचित मूल्य मिले। खाद महंगा है, पानी महंगा है, सब कुछ महंगा ही है फिर भी हमको उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।”

कैलाश यादव जैसे दर्जनों मक्का किसान सरकार से उचित मूल्य देने की मांग कर रहे हैं।

एक और किसान सुबोध मेहता ने बताया कि गुलाब बाग मंडी में रोज़ाना हज़ारों टन मक्का पहुँचता है। “8 दिन पहले मक्के का भाव 2400 रुपये घंघंथा लेकिन अब 2000 हो गया है। पिछले साल सुरेंद्र भगत को 2300 में माल दिए थे। हर साल रेट बढ़ता है लेकिन अब रेट घट रहा है, पिछले साल से भी रेट घट गया है। सुरेंद्र भगत से बात किए वह बोले कि हमारा रेक नहीं है, अभी 100 रेक किसी और का लगा हुआ है। जिनका रेक लगा है वह मनमाना रेट में मक्का खरीद रहा है। हम किसान लोग जाए कहां, जिसको पूछ रहे हैं वही बोल रहा है कि 100 रेक उनका खत्म होगा तब हमलोग माल लेंगे। किसान परेशान है, किसान पूरी मंडी में घूम रहा है कि माल कहां बेचे और यहां ‘एकाधिकार चलता है, ” सुबोध ने कहा।

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

सैयद तहसीन अली को 10 साल की पत्रकारिता का अनुभव है। बीते 5 साल से पुर्णिया और आसपास के इलाकों की ख़बरें कर रहे हैं। तहसीन ने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

Related News

कटिहार के 7 पैक्स अध्यक्षों पर होगी FIR, चुनाव लड़ने पर भी लगेगा प्रतिबंध

सैलाब से कटिहार में सैकड़ों बीघा धान बर्बाद, नहीं मिला मुआवज़ा, किसान दोगुनी लागत से दोबारा खेती करने को मजबूर

कोसी में मक्का की शानदार उपज, लेकिन मक्का आधारित उद्योग नहीं होने से किसान मायूस

कृषि नवाचार की मिसाल बने सहरसा के विधानचंद्र, थाईलैंड सेब सहित कई फलों की खेती में पाई बड़ी सफलता

किशनगंज में तेज़ आंधी से उड़े लोगों के कच्चे मकान, लाखों की फसल बर्बाद

कटिहार में गेहूं की फसल में लगी भीषण आग, कई गांवों के खेत जलकर राख

किशनगंज: तेज़ आंधी व बारिश से दर्जनों मक्का किसानों की फसल बर्बाद

3 thoughts on “पूर्णिया: मंडी में मक्का के घटते दामों से किसान परेशान, कहा-माफ़िया कर रहे मनमानी

  1. हम सरकार मांग करते है की इसके उपर जांच हो अभी गांव सभी छोटे-बड़े बेपारी 1700-1750 ले रहे हे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

बिहार के नवादा में अतहर की मॉब लिंचिंग के डेढ़ महीने बाद भी न मुआवज़ा मिला, न सबूत जुटे

बिहार चुनाव के बीच कोसी की बाढ़ से बेबस सहरसा के गाँव

किशनगंज शहर की सड़कों पर गड्ढों से बढ़ रही दुर्घटनाएं

किशनगंज विधायक के घर से सटे इस गांव में अब तक नहीं बनी सड़क

बिहार SIR नोटिस से डर के साय में हैं 1902 में भारत आये ईरानी मुसलमान