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पुर्णिया के रुपौली डिग्री कॉलेज को लेकर दो इलाकों की दावेदारी पर फंसा पेंच

संघर्ष समिति का आरोप है कि प्रशासन कॉलेज निर्माण के लिए उपलब्ध 8.5 एकड़ दान की गई विवाद-मुक्त जमीन को नजरअंदाज कर रहा है और इसके बजाय एक ऐसी भूमि पर कॉलेज स्थापित करने की तैयारी कर रहा है, जिस पर भविष्य में कानूनी विवाद की आशंका बनी हुई है।

Aaquil Jawed Reported By Aaquil Jawed |
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dispute arises over rival claims from two areas regarding rupauli degree college in purnia

पूर्णिया जिले के रुपौली प्रखंड अंतर्गत टीकापट्टी क्षेत्र में राजकीय डिग्री कॉलेज को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। एक ओर बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-3’ के तहत प्रखंड स्तर पर राजकीय डिग्री कॉलेजों की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर टीकापट्टी डिग्री कॉलेज निर्माण संघर्ष समिति ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया है।


संघर्ष समिति का आरोप है कि प्रशासन कॉलेज निर्माण के लिए उपलब्ध 8.5 एकड़ दान की गई विवाद-मुक्त जमीन को नजरअंदाज कर रहा है और इसके बजाय एक ऐसी भूमि पर कॉलेज स्थापित करने की तैयारी कर रहा है, जिस पर भविष्य में कानूनी विवाद की आशंका बनी हुई है। समिति का दावा है कि इससे परियोजना वर्षों तक अदालतों में उलझ सकती है और क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित होगा।

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टीकापट्टी क्षेत्र में कॉलेज की मांग नई नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मांग करीब 45 वर्षों पुरानी है। वर्ष 1980 के आसपास क्षेत्र के शिक्षाप्रेमी लोगों ने यहां उच्च शिक्षा संस्थान स्थापित करने की पहल की थी। इसके लिए भूमि दान तक की व्यवस्था की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह सपना अधूरा रह गया।


क्षेत्र के लोगों का कहना है कि टीकापट्टी, धूसर, गोड़ियर, श्रीमाता, लक्ष्मीपुर, कोहली सिमरा समेत कई पंचायतों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन जाता है, जिसके कारण कई छात्र-छात्राएं इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

प्रशासन को 31 जुलाई तक का अल्टीमेटम

डिग्री कॉलेज निर्माण को लेकर 14 जुलाई को टीकापट्टी हाईस्कूल मैदान में एक विशाल जनसभा आयोजित की गई थी, जिसमें विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, महिला समूहों के सदस्य, युवा और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

जनसभा में संघर्ष समिति ने प्रशासन को 31 जुलाई तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि टीकापट्टी के पक्ष में डिग्री कॉलेज निर्माण की अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो 1 अगस्त से गांधी सदन, टीकापट्टी में अनिश्चितकालीन महा-सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।

संघर्ष समिति का कहना है कि टीकापट्टी में पहले से ही कॉलेज निर्माण के लिए उपयुक्त और पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। समिति के अनुसार यह जमीन राज्य राजमार्ग-65 के निकट स्थित है और उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना के सभी मानकों को पूरा करती है।

समिति के प्रवक्ता तुषार व्यास का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर ऐसी भूमि का चयन कर रहा है, जिस पर आगे चलकर विवाद खड़ा हो सकता है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि कॉलेज निर्माण कानूनी विवाद में फंस गया तो सबसे अधिक नुकसान इस क्षेत्र के छात्रों को होगा।

तुषार व्यास ने आगे बताया, “कॉलेज की स्थापना जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति को देखकर करना चाहिए लेकिन वर्तमान में कॉलेज ऐसी जगह बनाया गया है जहां से नजदीक दूसरा डिग्री कॉलेज है। जबकि टीकापट्टी इलाके के छात्र-छात्राओं के लिए लगभग 25-30 किलोमीटर दूरी पर कॉलेज है।”

स्थानीय मुखिया शांति देवी ने कहा कि सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और बाल विवाह रोकने जैसे अभियानों को सफल बनाने की बात करती है, लेकिन इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की व्यवस्था भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि “टीकापट्टी और आसपास का इलाका बाढ़ प्रभावित एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र है। यहां की अधिकांश छात्राओं के लिए दूर-दराज के कॉलेजों तक रोजाना पहुंचना संभव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में स्थानीय स्तर पर डिग्री कॉलेज की स्थापना समय की आवश्यकता है।”

मुखिया ने कहा, “जिस क्षेत्र में वर्तमान में कॉलेज संचालन की व्यवस्था की गई है, उसके आसपास पहले से अन्य उच्च शिक्षण संस्थान उपलब्ध हैं, जबकि टीकापट्टी क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लगभग 30 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है।”

तीन पक्षों की मांग पर फंसा मामला

गौरतलब है कि प्रखंड स्तरीय राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर रुपौली क्षेत्र में लंबे समय से मतभेद बना हुआ है। एक पक्ष कॉलेज को रुपौली में स्थापित करने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष बिरौली के पक्ष में है। वहीं टीकापट्टी क्षेत्र के लोग अपने इलाके में कॉलेज स्थापना की मांग पर अड़े हुए हैं।

फिलहाल बिरौली स्थित संस्थान में नामांकन प्रक्रिया जारी है और विद्यार्थियों का प्रवेश भी हो रहा है। लेकिन टीकापट्टी डिग्री कॉलेज निर्माण संघर्ष समिति का कहना है कि स्थायी परिसर के लिए स्थान चयन में क्षेत्रीय आवश्यकताओं और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

डिग्री कॉलेज रुपौली के प्राचार्य डॉ. अनवर हुसैन ने ‘मैं मीडिया’ को बताया कि इस नए कॉलेज में नामांकन को लेकर विद्यार्थियों का उत्साह काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय क्षेत्र के अन्य कॉलेजों की तुलना में यहां सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। वर्तमान में कॉलेज का संचालन मध्य विद्यालय के 10 कमरों में किया जा रहा है।

डॉ. हुसैन ने कहा कि कॉलेज की स्थायी भूमि को लेकर कुछ विवाद अवश्य है, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपने इलाके में कॉलेज स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि यह पूरी तरह प्रशासनिक विषय है और जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग इस पर निर्णय लेने के लिए सक्षम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 15 अगस्त से पहले कॉलेज के लिए स्थायी भूमि आवंटित कर दी जाएगी।

विधायक कालाधार प्रसाद मंडल का बयान

स्थानीय विधायक कालाधार प्रसाद मंडल ने ‘मैं मीडिया’ को फोन पर बताया कि किसी भी बड़े संस्थान की स्थापना को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों की अपनी-अपनी अपेक्षाएं होती हैं और रुपौली डिग्री कॉलेज के मामले में भी यही स्थिति है।

उन्होंने कहा कि टीकापट्टी और बिरौली, दोनों क्षेत्रों के लोग अपने-अपने इलाके में कॉलेज की स्थापना की मांग कर रहे हैं। हालांकि उन्हें इस बात की खुशी है कि डिग्री कॉलेज उनके विधानसभा क्षेत्र और रुपौली प्रखंड में स्थापित हो रहा है। विधायक ने कहा कि जहां तक धार्मिक न्यास बोर्ड की भूमि से जुड़े विवाद का प्रश्न है, इसकी उन्हें विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की स्थापना संबंधी अंतिम निर्णय शिक्षा विभाग द्वारा लिया गया है और बिरौली में कॉलेज शुरू होने के बाद ही उन्हें इसकी जानकारी मिली।

टीकापट्टी डिग्री कॉलेज निर्माण संघर्ष समिति के प्रवक्ता तुषार व्यास और अध्यक्ष आदित्य कुमार ने कहा कि यदि 31 जुलाई तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 1 अगस्त से गांधीवादी तरीके से अनिश्चितकालीन महा-सत्याग्रह शुरू किया जाएगा।

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Aaquil Jawed is the founder of The Loudspeaker Group, known for organising Open Mic events and news related activities in Seemanchal area, primarily in Katihar district of Bihar. He writes on issues in and around his village.

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