बिहार राजभवन ने राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए एकरूप पीएचडी विनियम-2026, नई स्नातकोत्तर (PG) शैक्षणिक रूपरेखा, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में संशोधन तथा विद्यार्थियों के लिए क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम “क्रिटिक क्रॉसवर्ड्स” को मंज़ूरी प्रदान कर दी है।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन सुधारों का उद्देश्य बिहार की उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, लचीला, शोधोन्मुख और छात्र-केंद्रित बनाना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी प्रवेश, स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा की संरचना में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे।
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ऐसे होगा पीएचडी में एडमिशन
राज्यपाल द्वारा स्वीकृत एकरूप पीएचडी विनियम-2026 के तहत पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और योग्यता-आधारित बनाया गया है। पीएचडी में प्रवेश यूजीसी-नेट, यूजीसी-सीएसआईआर नेट या गेट के आधार पर होगा। चयन प्रक्रिया में 80 प्रतिशत वेटेज प्रवेश परीक्षा/योग्यता परीक्षा के अंकों को और 20 प्रतिशत वेटेज इंटरव्यू को दिया जाएगा।
चार-वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के पात्र विद्यार्थी भी पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे। फुल टाइम और पार्ट टाइम दोनों प्रकार के पीएचडी कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है। नए विनियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब नियमित नौकरी कर रहे लोग भी पीएचडी कर सकेंगे। इसके लिए अभ्यर्थी को कम से कम दो वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करनी होगी तथा संबंधित संस्थान से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना होगा।
चार वर्षीय स्नातक के बाद सीधे पीएचडी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करने वाले योग्य विद्यार्थियों को सीधे पीएचडी में प्रवेश का अवसर मिलेगा। हालांकि इसके लिए न्यूनतम 7.5 सीजीपीए अनिवार्य होगा। यह प्रावधान शोध के क्षेत्र में प्रतिभाशाली छात्रों को जल्दी आगे बढ़ने का अवसर देगा।
पीएचडी में आरक्षण और पात्रता के नए नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए स्नातकोत्तर स्तर पर न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक आवश्यक होंगे। वहीं एससी, एसटी, ईबीसी, बीसी तथा दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी। राज्य सरकार के आरक्षण नियमों का पालन करते हुए प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाएगी।
एकरूप पीएचडी विनियम-2026 में शोध कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिसमें रिसर्च पद्धति और रिसर्च नैतिकता से जुड़े पाठ्यक्रम अनिवार्य होंगे। रिसर्च गाइड का आवंटन पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। प्लेजरिज्म (साहित्यिक चोरी) पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान रहेगा। रिसर्च प्रगति की नियमित समीक्षा होगी। रिसर्च प्रबंध के मूल्यांकन को यथासंभव छह माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। महिला शोधार्थियों और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान की गई हैं।
स्नातक स्तर पर मिलेगा मल्टीपल एग्जिट का विकल्प
नई व्यवस्था के तहत चार-वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान विभिन्न स्तरों पर बाहर निकलने (Multiple Exit) का अवसर मिलेगा।
प्रथम वर्ष पूरा करने पर स्नातक प्रमाणपत्र (Certificate), द्वितीय वर्ष पूरा करने पर स्नातक डिप्लोमा, तृतीय वर्ष पूरा करने पर स्नातक डिग्री, जबकि चार वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करने पर ऑनर्स डिग्री प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा, छठे सेमेस्टर तक 7.5 या उससे अधिक सीजीपीए प्राप्त करने वाले विद्यार्थी चौथे वर्ष में ऑनर्स विद रिसर्च का विकल्प चुन सकेंगे। इससे उन्हें शोध और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।
नई व्यवस्था में अकादमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट (ABC) को भी शामिल किया गया है। इसके तहत छात्र विभिन्न संस्थानों से अर्जित क्रेडिट को सुरक्षित रख सकेंगे और आवश्यकता अनुसार उनका उपयोग कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, मान्यता प्राप्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से 40 प्रतिशत तक क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा भी मिलेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा, बहुविषयक अध्ययन, कौशल-आधारित शिक्षा और सतत मूल्यांकन प्रणाली को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
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