हाथ में कागज़ लिए घूम रहा ये व्यक्ति सरकारी कागज़ात में मृत घोषित कर दिया गया है। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की पहली ड्राफ्ट लिस्ट 1 अगस्त को जारी हुई, जिसमें कई नाम हटा दिए गए। कुछ मतदाताओं को फ़र्ज़ी बताया गया, तो कुछ को मृत मानकर सूची से बाहर किया गया।
ड्राफ्ट सूची में कटिहार जिले के कदवा प्रखंड अंतर्गत भौनगर पंचायत के नेटू आलम का नाम नहीं है। उनका नाम ड्राफ्ट से बाहर हुए लोगों की सूची में है और उनका नाम कटने की वजह बताई गई है उनकी मृत्यु। उनकी मानें तो आवासीय प्रमाण पत्र न होने के कारण वह एसआईआर के दौरान अपना फॉर्म जमा नहीं कर सके थे जिसके बाद आधिकारिक सूची में उन्हें मृत लिख दिया गया। वह अब बीएलओ और दूसरे सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं।
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निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 24 जून 2025 तक कटिहार जिले में 22 लाख 29 हज़ार 63 नाम मतदाता सूची में दर्ज थे। इनमें से 20 लाख 44 हज़ार 809 लोगों ने गणना के दौरान प्रपत्र भरकर बीएलओ को सौंपा, और उतने ही नाम पहली ड्राफ्ट सूची में शामिल किए गए। वहीं, 1 लाख 84 हज़ार 254 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए।
एसआईआर प्रक्रिया को जल्द निपटाने की जल्दबाज़ी में कई मतदाताओं के दस्तावेज़ उनके प्रपत्रों के साथ जमा नहीं लिए गए। जबकि आयोग के आदेश के अनुसार हर मतदाता के लिए दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य है। अब मतदाताओं को दस्तावेज़ जमा कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
बीएलओ घर-घर जाकर दस्तावेज़ इकट्ठा कर रहे हैं और निवास प्रमाण पत्र की प्रति मांग कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
कटिहार जिले की तैयबपुर पंचायत के रैयांपुर गाँव की रोशनी और उनके भाई-बहन का नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल तो हो गया है लेकिन दस्तावेज़ के तौर पर उनके पास केवल आधार कार्ड है। रौशनी कागज़ात बनवाने के लिए कई हफ़्तों से दर-दर भटक रही है। वह घरेलु काम कर पेट पालती हैं जबकि भाई मुंबई में मज़दूरी करता है।
कदवा प्रखंड की भौनगर पंचायत अंतर्गत खेंडाबाड़ी गांव के निवासी मोहम्मद बदरुद्दीन मतदाता गहन पुनरीक्षण के शुरुआती दिनों से ही अपना गणना प्रपत्र खोज रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव में उन्होंने वोट भी दिया था। उन्हें डर है कि उन्हें भविष्य में विदेशी बताकर कहीं भेज न दिया जाए। बदरूद्दीन के ही गांव के हकीमुद्दीन का नाम भी ड्राफ्ट सूची से गायब है।
भौनगर पंचायत के अब्दुलापुर की मजुना खातून के पति का प्रपत्र घर आया लेकिन उन्हें उनका गणना प्रपत्र नहीं मिला। मजुना खातून पिछले डेढ़ महीने से पंचायत, स्कूल और सीएससी सेंटर का चक्कर काट रही हैं। आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उनका पैसा भी खर्च हुआ लेकिन अब तक काम नहीं हो सका। उनके पति बाहर मज़दूरी करते हैं इसलिए वह दस्तावेज़ बनाने के लिए अकेली ही दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर हैं।
इस मामले में हमने कदवा विधानसभा से कांग्रेस विधायक डॉक्टर शकील अहमद खान से लगातार तीन दिनों तक बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। कई बार फ़ोन और मैसेज करने के बावजूद उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। विधायक के पीए ने बात कराने का आश्वासन भी दिया लेकिन खबर लिखे जाने तक उनसे बात नहीं हो सकी।
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