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“चोरी की घटना कबूलो, नहीं तो मारकर नपुंसक बना देंगे” – दो भाइयों ने बताई पुलिसिया अत्याचार की कहानी

जिस केस में उनसे पूछताछ करने की बात पुलिस ने कही, वो बक्सर का ही है। विगत 17-18 अगस्त की दरम्यानी रात मठिला गांव में स्थित गहने की एक दुकान में चोरी की वारदात हुई थी। पीड़ित की तरफ से दिये गये आवेदन के मुताबिक दुकान से करीब 15 लाख रुपये के गहनों की चोरी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी इस केस में पुलिस के हाथ खाली हैं।

Reported By Umesh Kumar Ray |
Published On :
“confess to the theft, or we will kill you and make you impotent” – two brothers tell the story of police brutality

तपेश्वर सिंह उनके भाई गुप्तेश्वर सिंह घर पर सोये हुए थे, जब तड़के उनके घर पर पुलिस ने दस्तक दी थी। लगभग 10 पुलिस कर्मचारी, जिनमें कुछ वर्दी में और कुछ सिविल ड्रेस में थे, दो वाहनों में सवार होकर पहुंचे थे।


5 अक्टूबर की उस घटना को याद करते हुए तपेश्वर सिंह कहते हैं, “पुलिस कर्मचारियों ने मुझे और मेरे भाई को जबरदस्ती वाहन में बिठा लिया और जब हमने वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि चोरी के एक केस के सिलसिले में पूछताछ करने के लिए हमें सूर्यपुरा थाने ले जाया जा रहा है।”

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तपेश्वर और उनके भाई बिहार के रोहतास जिले के सूर्यपुरा थाना क्षेत्र ढोढनडीह गांव के रहने वाले हैं।


उन्हें लगा कि सामान्य पूछताछ होगी, लेकिन इसके बाद जो कुछ हुआ, उससे पुलिस कर्मचारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और तपेश्वर व उनके भाई ने जो आपबीती सुनाई, उससे पुलिस की आपराधिक प्रवृति का भी पता चलता है।

तपेश्वर व उनके भाई के मुताबिक, पुलिस की ज्यादती सीसीटीवी कैमरे में कैद नहीं हो सके, इसलिए उन्हें पुलिस, थाने से अलग पुलिस क्वार्टर में ले गई, जहां सीसीटीवी कैमरे की कवरेज नहीं है। वहां उन्हें फर्श पर लिटा कर, हाथ पैर बांध बेरहमी से पीटा गया। नपुंसक बना देने, अंधा कर देने की धमकियां दी गईं। इसके बाद बिना कोई केस दर्ज किये छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, थाने से छोड़ने से पहले उनसे लिखवाया गया कि उनके साथ पुलिस ने कुछ नहीं किया और वे सही-सलामत थाने से घर लौट रहे हैं।

सीसीटीवी फुटेज दिखा अपराधियों को पहचानने को कहा

तपेश्वर और उनके भाई खेतीबारी करते हैं। इसके अलावा तपेश्वर एलआईसी एजेंट भी हैं।

5 अक्टूबर अलसुबह करीब 3 बजे पुलिस तपेश्वर सिंह के घर पहुंची थी। वहां से तपेश्वर सिंह व उनके भाई गुप्तेश्वर सिंह को पहले रोहतास जिले के ही सूर्यपुरा थाने ले गई, लेकिन उन्हें थाने के भीतर नहीं ले जाया गया। बल्कि थाने के मेन गेट के बाहर ही दो मिनट तक खड़ा गया और फिर वाहन को बक्सर जिले से कोरानसराय थाने की तरफ मोड़ दिया गया।

कोरानसराय थाने में उन्हें घंटों बिठाये रखा गया, लेकिन इस बीच उनसे किसी तरह की कोई पूछताछ नहीं की गई। लगभग 10 घंटों तक थाने में रखने के बाद एक स्टाफ आया और उन्हें थाना परिसर में बने पुलिस क्वार्टर्स की तरफ चलने को कहा। इससे उन्हें गड़बड़ी का संदेह हुआ, तो उन्होंने पुलिस क्वार्टर्स में ले जाने का कारण पूछा। “उक्त पुलिस कर्मचारी ने बताया कि जिस केस में हमलोगों से पूछताछ होनी है, उस केस के जांच अधिकारी (आईओ) तो झड़ीलाल यादव हैं, लेकिन उक्त केस में एसपी के आदेश के अनुसार हमलोगों से बक्सर जिले के डीआईयू सुधीर कुमार और उनकी टीम भी पूछताछ करेगी,” तपेश्वर ने कहा।

जिस केस में उनसे पूछताछ करने की बात पुलिस ने कही, वो बक्सर का ही है। विगत 17-18 अगस्त की दरम्यानी रात मठिला गांव में स्थित गहने की एक दुकान में चोरी की वारदात हुई थी। पीड़ित की तरफ से दिये गये आवेदन के मुताबिक दुकान से करीब 15 लाख रुपये के गहनों की चोरी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी इस केस में पुलिस के हाथ खाली हैं।

पुलिस क्वार्टर में सुधीर कुमार पहले से मौजूद थे। उन्होंने दोनों से उनका नाम पूछा और इसके बाद उनके द्वारा किये गये अपराधों के बारे में जानकारी मांगी, तो तपेश्वर ने अपने बचाव में कहा कि वे चोर नहीं हैं। “इतना सुनते ही सुधीर कुमार भड़क गये,” तपेश्वर कहते हैं, “सुधीर कुमार ने मेरे मुंह और सिर पर चार-पांच थप्पड़ और मुक्का मारा और झड़ीलाल यादव ने मेरे भाई को पीटा।” तपेश्वर आगे बताते हैं, “अपराधों में संलिप्तता से इनकार करने पर सुधीर कुमार ने कहा कि ऐसे ये लोग संलिप्तता स्वीकार नहीं करेंगे, इन्हें गरमाना पड़ेगा।”

“वे लोग पुलिस क्वार्टर में मोबाइल में चोरी गई जगह की सीसीटीवी फुटेज दिखाकर पूछ रहे थे कि इनमें दिख रहे अपराधियों की मैं शिनाख्त करूं। वे ये भी कह रहे थे कि सीसीटीवी फुटेज में मैं कौन हूं, ये भी बताऊं। लेकिन मैं तो चोर नहीं हूं और न ही चोरी की है कि उन्हें बताता,” तपेश्वर बताते हैं।

वह आगे कहते हैं, “मैंने पुलिस को साफ कहा कि अगर मैंने चोरी की है, तो वे लोग मेरे मोबाइल के टावर का लोकेशन देख लें कि चोरी के वक्त मैं कहां था। ये सुनकर पुलिस वाले उखड़ गये और उल्टा मुझे फटकारा कि मैं ये सब कैसे जानता हूं, क्या मैं नेता हूं।”

हाथ-पैर बांध कर बेरहमी से पिटाई

इसके बाद सुधीर कुमार, झड़ीलाल यादव व वहां मौजूद अन्य पुलिस कर्मचारियों ने दोनों को पेट के बल फर्श पर लिटा दिया और उनके हाथ-पैर रस्सी से बांध दिये। “सुधीर कुमार ने हमसे कहा कि अगर हमलोग मठिला में सोना-चांदी की दुकान में हुई चोरी की घटना में संलिप्तता स्वीकार नहीं करते हैं, तो हमलोगों को मार मार कर नपुंसक बना देंगे। अंधा बना देंगे। हमलोगों ने दोबारा कहा कि सर हम कोई गलत काम नहीं करते हैं, तो सुधीर कुमार द्वारा पुलिस के प्लास्टिक के डंडे से हम दोनों भाइयों के तलवों, दोनों पैरों की जांघ, और पीठ पर बारी-बारी लगभग 25-25 डंडे बरसाये गये। अन्य पुलिस कर्मचारियों ने जूतों और लातों से मारा। सुधीर कुमार ने झड़ीलाल से कहा कि हमलोगों के पैरों की रस्सियां खोल दी जाए लेकिन यहीं रखा जाए क्योंकि दो घंटे बाद हमलोगों को फिर गरमाया जाएगा,” तपेश्वर बताते हैं।

लेकिन बाद में उन्हें पुलिस क्वार्टर से थाने ले जाया गया, जहां से 6 अक्टूबर तड़के करीब 12.30 बजे उनसे एक सादे कागज पर लिखवाया गया कि वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित घर जा रहे हैं। बयान लिखवा कर उस पर हस्ताक्षर कराये गये। इसके बाद उन्हें झड़ीलाल यादव पुलिस वाहन में अनुमंडलीय अस्पताल, डुमराव ले गये। वहां से करीब 1 बजे उन्हें छोड़ दिया गया।

वहां से उनके परिजन और गांव के कुछ लोग, जो पहले से मौजूद थे, उन्हें घर ले गये। तपेश्वर सिंह बताते हैं कि उन्होंने पुलिस से कहा कि उनके सिर दर्द है और चलने में भी असमर्थ हैं, इसलिए दवा नहीं दिलाई जाए, लेकिन पुलिस ने दवा नहीं दिलवाई।

तपेश्वर सिंह ने इस मामले को लेकर पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए कोरानसराय थाने में आवेदन भेजा है।

इस संबंध में कोरानसराय थाने की थानाध्यक्ष माधुरी कुमारी ने स्वीकार किया कि दोनों को पूछताछ के लिए थाने में लाया गया था। पुलिसिया अत्याचार के आरोप के संबंध में उन्होंने कहा, “दोनों से मुलाकात हुई थी, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं बताया। अगर वे लोग हमारे शिकायत करते हैं, तो हमलोग मामले की जांच करवायेंगे।”

बिहार में हिरासत में पुलिसिया ज्यादती

बिहार में पुलिस हिरासत में लोगों पर अत्याचार और मौत की घटनाएं कोई नई बात नहीं है, बल्कि आंकड़े तो ये बताते हैं कि हाल के वर्षों में बिहार में हिरासत में मृत्यु की घटनाओं में इजाफा हुआ है। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन (एनएचआरसी) के आंकड़े बताते हैं कि साल 2018-2019 में बिहार में हिरासत में मौत 5 घटनाएं हुई थीं, जो साल 2021-2022 में लगभग चार गुना बढ़कर 18 पर पहुंच गई, जो महाराष्ट्र और गुजरात के बाद तीसरा सबसे बड़ा आंकड़ा था। वहीं, साल 2022-2023 में बिहार में हिरासत में मौत की 16 घटनाएं दर्ज की गई थी और इस मामले में महाराष्ट्र के बाद बिहार दूसरे स्थान पर था।

पूरे देश में साल 2021-2022 में हिरासत में मौत की 175 और 2022-2023 में 164 घटनाएं हुई थीं।

तपेश्वर और उनके भाई की पुलिस की मार से तबीयत खराब है। वे मुश्किल से बिस्तर से उठ पा रहे हैं। उनकी जांघों में डंडों की चोट के काले दाग साफ दिखाई पड़ते हैं। दोनों दवाइयां ले रहे हैं। लेकिन पुलिस से उनके कई सवाल हैं। वे सोच ही नहीं पा रहे हैं कि उनके साथ ऐसा क्यों किया गया। “हम किसी से कोई मतलहब नहीं रखते हैं। हम अपने काम से काम रखते हैं। किसी से दुश्मनी नहीं है, सबसे अच्छा व्यवहार करते हैं। पता नहीं हमारे साथ फिर ऐसा क्यों हुआ,” तपेश्वर सिंह कहते हैं।

उनका सवाल ये भी है कि उनसे पूछताछ ही करनी थी, तो सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में क्यों नहीं पूछताछ की गई।

इस घटना ने उनके आत्मसम्मान पर भी गहरी चोट की है और वह सदमे में हैं। तपेश्वर कहते हैं, “हम किस तरह समाज में रहेंगे? लोग तो यही कहेंगे कि कुछ किया होगा तभी पुलिस ले गई थी। हम अपराध में लिप्त नहीं थे, तभी तो पुलिस ने छोड़ा लेकिन लोगों को तो यही लगेगा कि पुलिस ने पैसा लेकर छोड़ दिया होगा। मेरे चरित्र पर तो दाग लग गया। हम चाहते हैं कि दोषी पुलिस कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।”

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Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

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