
कटिहार: चमड़ी जला देने वाली धूप में मो. नदीम अख्तर का कपड़ा पसीने से भीगा हुआ है। आज वह अपने खेत में एक पुराना पंप सेट लेकर आए हैं। सालों पहले यह पंप सेट खेतों में पानी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इस पुराने पंपसेट के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि […]

अररिया ज़िले के सिकटी प्रखंड में नूना नदी ने पिछले कई वर्षों से कहर ढा रखा है। नेपाल के पहाड़ी इलाके से निकली नुना नदी हर साल सिकटी प्रखंड में खेती के साथ करोड़ों रुपये का नुकसान करती है। हद तब हो गई जब दो वर्ष पहले इस घातक नदी ने अपनी मुख्य धारा को […]

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से 23 मार्च को जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक रिपोर्ट में सीमांचल के कटिहार शहर को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है।

किशनगंज में हाथियों का उत्पात जारी है। सोमवार की अहले सुबह हाथियों के झुंड ने जिले की दिघलबैंक पंचायत अंतर्गत रामपुर काॅलोनी बस्ती में उत्पात मचाया। हाथियों ने रामपुर काॅलोनी के लखीराम सोरेन, बुध रॉय, राजू दास, लक्ष्मी देवी सहित कुल छह परिवारों के कच्चे घरों को तोड़ दिया है जबकि घर अंदर रखा अनाज जिसमें चावल, धान, सब्जी आदि को बर्बाद कर दिया। हाथियों ने फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।

अररिया जिले के रानीगंज और कुसियारगंज में अब तक कई बार अजगर सांप देखा जा चुका है, जिससे लोगों में खौफ है।

नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश होने से किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की 12 पंचायतों में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। दरअसल ज़िले से होकर बहनेवाली महानंदा, कनकई, डोंक, मेची और रतुआ नदियां भारी बारिश के चलते उफान पर हैं। भारी बारिश से जिले के चार प्रखंड बुरी तरह से प्रभावित हैं।

पूर्णिया जैसी ही स्थिति किशनगंज और अररिया के साथ-साथ समस्तीपुर, सुपौल और बेगूसराय के किसानों की भी है। बारिश के कारण इन जिलों की फसल भी ख़राब हो गई है।

सबसे ज्यादा परेशानी तो तब होती है, जब कोई बहुत बीमार पड़ जाये या किसी गर्भवती महिला को इमरजेंसी में अस्पताल ले जाना पड़ा जाए। अगर देर रात कोई बीमार पड़ जाए, तो उनके परिजनों का कलेजा मुंह को आ जाता है क्योंकि रात में तो नाव का परिचालन भी बंद हो जाता है।

अब्दुल मजीद बिहार के सीमांचल में आने वाले किशनगंज जिले में ठाकुरगंज प्रखंड के दल्लेगांव के निवासी है। इस गांव के पास से होकर मेची नदी बहती है, जो हर साल सैकड़ों एकड़ जमीन अपने साथ बहा ले जाती है। नतीजतन हर साल कोई न कोई परिवार अब्दुल मजीद की नियति को प्राप्त हो जाता है।

किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखंड स्थित ये बगलबाड़ी गांव है, इस गांव में कभी हँसते खेलते सैंकड़ों परिवार हुआ करते थे। यहाँ के किसान अपनी उपजाऊ जमीन में खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण किया करते थे। लेकिन पिछले कई सालों से महानंदा नदी के तांडव से गांव उजड़ गया, लोग बेघर हो गए।

पिछले दिनों पश्चिम भारत के इलाकों पर चक्रवाती तूफान (Tauktae) ‘तौकते’ ने कहर बरपाया जिसमें करीब 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। अब मौसम विभाग ने चेतावानी जारी कर दी है कि पूर्वी भारत के इलाके बंगाल, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, झारखंड और बिहार में लोगों को चक्रवाती तूफान ‘यास’ (Yaas) का सामना करना पड़ सकता है।

किशनगंज से लगभग सात किलोमीटर दुरी पर स्थित है गाछपाड़ा पंचायत और इसी गांव होकर गुजरती है महानंदा और डोंक नदी। राज्य सरकार ने दोनों नदियों से ग्रामीणों की जान माल की रक्षा करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बांध का निर्माण करवाया था। लेकिन चंद पैसे की लालच में बालू माफिया इसी पंचायत के खाड़ी बस्ती के समीप बांध को काटकर अवैध तरीके से बालू ढुलाई के लिए रास्ता बना दिया है जिससे नदी किनारे बसे ग्रामीणों को डर सता रहा है की वर्ष 2017 की भांति पुन बाढ़ की स्थिति उत्पन्न ना हो।

गया में बिहार का पहला रबड़ डैम बनेगा। 22 सितंबर को बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने इस डैम का उद्घाटन किया है। यह डैम गया की ऐतिहासिक फल्गू नदी पर बनने जा रहा है। राज्य में ऐसा पहली बार होगा कि कोई रबड़ डैम बनेगा।

[vc_row][vc_column][vc_column_text]नेपाल की तराई इलाकों में हो रहे लगातार बारिश से अररिया जिले की सिकटी प्रखंड में बाढ़ तांडव करने लगा है। नुना नदी एक बार फिर से अपने रौद्र रूप लेकर कई पंचायतों को अपने गिरफ्त में ले लिया है। पंचायत में लोग जान हथेली पर लेकर उचे स्थान पर जाने को मजबूर हैं। अररिया […]

[vc_row][vc_column][vc_column_text]बिहार के किशनगंज जिले में ग्रामीण कार्य विभाग के द्वारा करोड़ों की लागत से बन रहा एक पुल उद्घाटन से पहले ही धंस गया है। जिले के दिघलबैंक प्रखंड के पथरघट्टी पंचायत स्थित गोआबाड़ी गांव में ये पुल एक करोड़ 42 लाख की लागत से बन रहा था। पुल निर्माण का कार्य 25 जून 2019 को शुरू […]