बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर अभ्यर्थियों के बीच चल रही चर्चाओं और विरोध के बीच बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। आयोग ने कहा है कि TRE-4 में प्रारंभिक परीक्षा (PT) और मुख्य परीक्षा (Mains) कराने का फैसला सोच-समझ कर लिया गया है। इसे किसी अफवाह या अचानक किए गए बदलाव का परिणाम नहीं बताया गया है।
BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में परीक्षा के दो चरणों में आयोजन, नेगेटिव मार्किंग और अभ्यर्थियों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर आयोग का पक्ष रखा। वहीं, दूसरी ओर TRE-4 की परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों में असंतोष बना हुआ है। छात्रों ने 25 अगस्त को सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
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BPSC TRE-4 की परीक्षा दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 में आयोजित की जा सकती है। परीक्षा की तारीख अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। एग्जामिनेशन कंट्रोलर राजेश कुमार सिंह के अनुसार, TRE-4 के लिए 1 से 30 सितंबर तक आवेदन लिए जाएंगे। आवेदन की संख्या स्पष्ट होने के बाद परीक्षा के चरण और फेज तय किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आयोग एक दिन में करीब 5 लाख तक अभ्यर्थियों की परीक्षा लेने में सक्षम है। अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर परीक्षा कितने फेज में होगी, इसका निर्णय बाद में किया जाएगा।
PT और Mains को लेकर BPSC ने साफ किया रुख
TRE-4 में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा कराए जाने को लेकर अभ्यर्थियों के बीच लगातार सवाल उठ रहे थे। सोशल मीडिया पर भी परीक्षा पैटर्न को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ अभ्यर्थियों का कहना था कि दो चरणों की परीक्षा से चयन प्रक्रिया लंबी हो सकती है और तैयारी का दबाव बढ़ेगा।
इस पर BPSC परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि दो चरणों में परीक्षा आयोजित करना कोई असामान्य व्यवस्था नहीं है। देश के कई राज्यों और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा का प्रावधान पहले से लागू है।
आयोग के मुताबिक, PT के माध्यम से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की स्क्रीनिंग की जा सकती है, जबकि Mains के जरिए चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों वाली भर्ती परीक्षा में परीक्षा संचालन और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इस तरह की प्रणाली उपयोगी मानी जाती है। BPSC ने TRE-4 की परीक्षा व्यवस्था को समझाते हुए NEET-UG 2024 के बाद गठित राधाकृष्णन कमिटी का भी उदाहरण दिया।
आयोग के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा संचालन को अधिक विश्वसनीय बनाने को लेकर कमिटी की ओर से कई सुझाव दिए गए थे। BPSC ने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े अनुभवों, सुझावों और परीक्षा संचालन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए TRE-4 के लिए मौजूदा व्यवस्था तैयार की गई है।
इसके अलावा परीक्षा व्यवस्था को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की ओर से दिए गए सुझावों का भी उल्लेख किया गया। आयोग का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इन पहलुओं पर विचार किया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘हाथी चले बाजार…’ वाली टिप्पणी, रहेगी निगेटिव मार्किंग
अभ्यर्थियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा नेगेटिव मार्किंग को लेकर भी है। BPSC परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि TRE-4 में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान रहेगा। आयोग के अनुसार, गलत उत्तर पर अंक काटे जाने की व्यवस्था का उद्देश्य अभ्यर्थियों को बिना जानकारी के अनुमान लगाकर उत्तर देने से रोकना है। इससे उम्मीदवार प्रश्नों का उत्तर देते समय अधिक सावधानी बरतते हैं।
BPSC की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब परीक्षा से संबंधित कथित गलत कॉपियों को दिखाने वाले छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया, तो परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह से इस संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने “हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार…” वाली टिप्पणी की। इस बयान को लेकर भी छात्र वर्ग में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। परीक्षा को लेकर पहले से नाराज अभ्यर्थियों के बीच इस टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया है।
25 अगस्त को सड़क पर उतरने की तैयारी, तेजस्वी यादव ने दिया समर्थन
TRE-4 को लेकर छात्रों का विरोध अब सड़क पर उतरने की तैयारी तक पहुंच गया है। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों की ओर से 25 अगस्त को प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया है। छात्र नेता दिलीप कुमार ने सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम देने की बात कही है। उनका कहना है कि जब तक बिहार के सभी जिलों से छात्र आंदोलन में शामिल होकर सड़क पर नहीं उतरते, तब तक मुख्यमंत्री आवास के घेराव या बिहार बंद जैसे कदम का ऐलान नहीं किया जाएगा।
छात्र नेता ने यह आशंका भी जताई कि यदि आंदोलनकारी गर्दनीबाग से हटते हैं तो वहां का गेट बंद कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि, ये छात्रों की ओर से व्यक्त की गई आशंकाएं हैं।
TRE-4 को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से भी छात्रों के 25 अगस्त के प्रदर्शन को समर्थन दिए जाने की बात सामने आई है। इससे शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। छात्रों की प्रमुख मांग परीक्षा प्रक्रिया और चयन व्यवस्था को लेकर स्पष्टता तथा उनकी आपत्तियों पर सरकार और आयोग की ओर से ठोस जवाब देने की है।
फिलहाल एक तरफ BPSC अपने परीक्षा पैटर्न को लेकर स्पष्ट रुख अपना चुका है, तो दूसरी तरफ अभ्यर्थियों का विरोध भी जारी है। ऐसे में 25 अगस्त का छात्र प्रदर्शन TRE-4 विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
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