बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं के स्वरूप में बदलाव का रास्ता साफ होता दिख रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि आयोग अपनी परीक्षाओं की प्रक्रिया और स्वरूप तय करने के लिए स्वतंत्र एवं सक्षम प्राधिकार है। विभाग ने कहा है कि यदि आवश्यक समझे तो आयोग एक चरण में आयोजित होने वाली परीक्षाओं को दो चरणों में भी आयोजित कर सकता है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव मनोज कुमार झा ने 25 जून 2026 को बिहार लोक सेवा आयोग के सचिव को भेजे पत्र में ये कहा है।
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पत्र में The Bihar Public Service Commission Rule of Procedure, 1996 के विभिन्न प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग का मूल दायित्व भर्ती के लिए उम्मीदवारों की योग्यता और उपयुक्तता का आकलन करना है। इसके लिए परीक्षा का विषय, स्वरूप और चयन प्रक्रिया निर्धारित करने का अधिकार भी आयोग के पास है।
प्रारंभिक परीक्षा का प्रावधान
विभाग ने अपने पत्र में नियम 3(iv) का उल्लेख करते हुए कहा है कि उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने की स्थिति में आयोग प्रारंभिक वस्तुनिष्ठ परीक्षा (Preliminary Test) आयोजित कर सकता है। इस परीक्षा का मूल्यांकन ओएमआर (OMR) पद्धति से किया जा सकता है।
इसके अलावा नियम 4(3)(e) के अनुसार यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की संख्या 500 से अधिक हो जाती है तो आयोग स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग कर सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है।
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उपर्युक्त नियमों के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग अपनी परीक्षाओं के मानक एवं प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र और सक्षम प्राधिकार है। ऐसे में एकल चरण में आयोजित होने वाली परीक्षाओं को दो चरणों में आयोजित करने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार भी आयोग के पास है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने इस मामले में आयोग द्वारा निर्णय लिए जाने की स्थिति में विभागीय अनापत्ति भी भेज दी है। इससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में आयोग आवश्यकता के अनुसार भर्ती परीक्षाओं का प्रारूप बदल सकता है।
हाल के वर्षों में BPSC की विभिन्न भर्तियों में लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के कारण परीक्षा आयोजन, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा आधारित दो-स्तरीय प्रणाली अपनाने से उम्मीदवारों की संख्या को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा सकेगा और चयन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
हालांकि, अभी तक आयोग की ओर से किसी विशेष परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करने की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। विभाग का यह पत्र केवल आयोग की शक्तियों और अधिकारों को स्पष्ट करता है।
क्या बदल सकता है?
यदि आयोग इस अधिकार का उपयोग करता है तो भविष्य में कुछ भर्ती परीक्षाओं में पहले प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जा सकती है। प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा या अगले चरण के लिए बुलाया जाएगा। इससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर आयोग के अगले फैसले पर टिकी है। यदि BPSC दो-स्तरीय परीक्षा प्रणाली लागू करता है तो बिहार की भर्ती परीक्षाओं के स्वरूप में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
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