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बदलते मौसम और विकास कार्यों के बीच संघर्ष करते बिहार के काले हिरण

काले हिरण की जब बात होती है, तो मुख्य तौर पर राजस्थान व अन्य राज्यों का जिक्र होता है, लेकिन तथ्य ये है कि बिहार में भी काले हिरण पाये जाते हैं। काले हिरण खुले मैदान, घास के मैदान व कम झाड़ियां वाली जगहों में रहना पसंद करते हैं।

oplus 131072 Reported By Amit Kumar Singh |
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bihar's blackbucks struggle amid changing climate and development projects
जंगल से भटककर गाँव में घुसा काला हिरण

बिहार के भोजपुर जिला के संदेश प्रखंड के सोन नदी के किनारे आंखगांव के वन क्षेत्र इलाके में झोपड़ीनुमा आश्रम बनाकर रह रहे साधु भीम बाबा के यहां गर्मियों में अक्सर कुछ मेहमान दस्तक देते हैं। ये मेहमान कोई इंसान नहीं, बल्कि काले हिरण और अन्य सामान्य हिरण हैं।


“हमने कई बार अपने हाथों से प्यासे काला हिरण को पानी पिलाया है,” भीम बाबा ने कहा। आंखगांव के रहने वाले 62 वर्षीय राजेश शाह और रामपुर गांव के रहने वाले 55 वर्षीय रमेश यादव भी यही बातें बताते हैं।

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वे कहते हैं, “गर्मी के दिनों में बधार (विस्तृत कृषि भूमि) के नहर-तालाब सूख जाते हैं, तब काले हिरण हम लोगों के गांव से होकर ही सोन नदी में पानी पीने जाते हैं। इन हिरणों ने नजदीकी वन इलाके में अपना आशियाना भी बना लिया है।”


बिहार के दक्षिणी हिस्से, खास तौर पर शाहाबाद इलाके में काले हिरण पाये जाते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में इस इलाके में बारिश में कमी आई और तापमान में इजाफा हुआ है, जिस वजह से सतही पानी के स्रोत सूखने लगे हैं। इसका वन्यजीवों और खास तौर पर काले हिरणों पर बुरा असर पड़ रहा है। कई बार तो पानी की किल्लत काले हिरणों के लिए जानलेवा भी साबित हुई है।

3 जून 2023 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड स्थित पाण्डेपुर और जगनपुर के बधार में पानी के अभाव में प्यास से एक काले हिरण की मौत हो गई थी। इस घटना के बारे में ग्रामीणों का कहना था कि पानी के अभाव में काले हिरण के साथ साथ प्यास के चलते आम हिरणों की भी मौत होती रहती है।

a billboard installed in aankhgaon village, sandesh block, bhojpur district
भोजपुर ज़िले के संदेश प्रखंड के आँखगांव में लगा बिलबोर्ड

बिहार में काले हिरण की आबादी

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने काले हिरणों को संकटग्रस्त वन्यजीवों की श्रेणी में रखा है। काला हिरण, भारत की सबसे सुंदर और तेज दौड़ने वाले जानवरों की प्रजातियों में से एक है। भारत सरकार ने इन्हें वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची में शामिल किया है, जो काले हिरणों को शिकार किये जाने से सुरक्षा प्रदान करता है। यानी कि काले हिरण का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है।

काले हिरण की जब बात होती है, तो मुख्य तौर पर राजस्थान व अन्य राज्यों का जिक्र होता है, लेकिन तथ्य ये है कि बिहार में भी काले हिरण पाये जाते हैं। काले हिरण खुले मैदान, घास के मैदान व कम झाड़ियां वाली जगहों में रहना पसंद करते हैं।

बिहार के बक्सर, भोजपुर, रोहतास और कैमूर की पहाड़ियां उनके लिए अनुकूल ठिकाना हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा के तटीय इलाकों जैसे नैनिजोर-महुआर से लेकर बक्सर के दियारा मैदानी इलाके व रोहतास व कैमूर में काले हिरण पाये जाते हैं।

बक्सर और आरा के जिला वन अधिकारी (डीएफओ) प्रदुम्न गौरव ने बताया कि काला हिरण विलुप्त प्राणियों में से एक है। उन्होंने कहा कि काले हिरणों की आधिकारिक रूप से गिनती तो नहीं की गई है लेकिन अभी तक अंदाजा लगाया गया है कि इनकी संख्या 1500 से 2000 के आसपास है।

चरम मौसमी गतिविधियों का असर

बिहार के शाहाबाद क्षेत्र में चरम मौसमी गतिविधियों का काले हिरणों पर खासा असर पड़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, शाहाबाद में (भोजपुर, रोहतास, बक्सर और कैमूर) पिछले साल अधिकतम तापमान लगभग 42 डिग्री सेल्सियस रहा है। शाहाबाद को अधिक गर्म क्षेत्र की श्रेणी में रखा गया था।

गर्मी के कारण क्षेत्र के अधिकतर जलस्रोत सूख जाते हैं, जिससे काले हिरणों को पीने का पानी नहीं मिल पाता है। नतीजतन उन्हें पानी की खोज में दूर तक जाना पड़ता है।

30 अप्रैल 2024 को बक्सर जिले के चौगाई प्रखंड क्षेत्र के भादी गांव के समीप दोपहर प्यास बुझाने की खोज में एक काला हिरण सूखे आहार के किनारे आया था। आहर में गिरने से उसकी मौत हो गई थी। रास्ते से गुजर रहे लोगों की नजर पड़ी तो उन्होंने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। स्थानीय लोगों ने बताया कि काले हिरण गर्मी के दिनों में पानी की तलाश में अक्सर गांव में घूस जाते हैं।

साल 2021 में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की पत्रिका मौसम में छपे एक अध्ययन ‘ड्रॉट सिविएरिटी असेसमेंट इन साउथ बिहार एग्रो क्लाइमेटिक जोन’ के मुताबिक, पिछले 110 वर्षों में बक्सर ने 36.5 बार सुखाड़ झेला है। अध्ययन बताता है कि दक्षिण बिहार में नियमित तौर पर सुखाड़ पड़ने के लिए प्राथमिक तौर पर दक्षिणी पश्चिमी मॉनसूनी बारिश का कम होना जिम्मेवार है और इसी वजह से दक्षिण बिहार बार-बार सुखाड़ झेलता है।

चरम मौसमी गतिविधियों के अलावा जंगलों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण के चलते भी काले हिरणों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

डीएफओ प्रद्युम्न गौरव का कहना है कि पिछले एक दशक से भोजपुर और बक्सर में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण हो रहा है और पेड़-पौधे जंगलों की कटाई भी हो रही है जिसने काले हिरणों के आवास पर ज्यादा प्रभाव डाला है। इसके अलावा शहरीकरण, कृषि का विस्तार और सड़कों का विस्तार भी इन हिरणों के आवासीय क्षेत्रों के खत्म होते जाने का मुख्य कारण है।

office of the department of environment, forest and climate change, bhojpur
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, भोजपुर का कार्यालय

पिछले साल 4 जून को, गया के कोबरा कैम्प बरवाडीह के समीप सड़क हादसे में घायल गर्भवती काले हिरण की जान चली गई थी। वन विभाग ने जंगल के इलाकों में सड़कों के किनारे दिशानिर्देश का बोर्ड लगाया है, ताकि वाहन चालक सचेत होकर वाहन चलाएं।

डीएफओ प्रद्युम्न गौरव आगे कहते हैं कि वनों की कटाई कर जमीन को उपयोग में लाना बहुत बड़ा चैलेंज बन गया है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि वनों की कटाई के बाद भी सरकार पेड़ पौधे लगाने के लिए कदम उठा रही है।

बक्सर जिले के नवानगर प्रखंड के सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार बादल कुमार कहते हैं, “नवानगर में हजारों एकड़ जमीन से वन यानी वृक्ष काटकर उस जगह पर इथेनॉल और पेप्सी जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों की इकाइयां खुल रही हैं, जिससे आवास हिरणों का आवास छिन रहा है।”

रेस्क्यू सेंटर और अभ्यारण्य केंद्र

शाहाबाद क्षेत्र में काले हिरणों की मौजूदगी के बावजूद पर्याप्त रेस्क्यू सेंटर नहीं है, जिससे घायल होने पर काले हिरणों को इलाज नहीं मिल पाता है।

25 अप्रैल 2022 को भटके हुए केला हिरण पर कुत्तों ने हमला कर दिया था, काला हिरण बुरी तरह घायल हो गया था। लेकिन समय से उचित इलाज नहीं मिल पाया जिससे अंततः उसकी मौत हो गई थी।

अब बिहार सरकार ने सक्रियता दिखाई है। कैमूर जिले के कर्मनाशा नदी के किनारे कैमूर प्रखंड के जलदहा में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बिहार का पहला रेस्क्यू सेंटर खोला जा चुका है। भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड अंतर्गत आखगांव में 45 एकड़ भूमि पर रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना चल रही है जिसके लिए जमीन का सर्वे किया जा चुका है।

रेस्क्यू सेंटर वह जगह होती है, जहां घायल, बीमार या खतरे में पड़े काले हिरण को बचाकर लाया जाता है और इलाज किया जाता है।

वहीं, बक्सर जिले के नवानगर प्रखंड के पिलापुर मौजा में 12 एकड़ में काले हिरण के लिए अभ्यारण्य विकसित किया जा रहा है।

डीएफओ प्रदुम्न गौरव ने बताया कि काले हिरणों को सुरक्षित करने के लिए बक्सर में हिरण अभ्यारण्य बनाया जा रहा है। इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है, जो मलई बराज के बगल में स्थित है। इससे उन्हें पीने के पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। जरूरत पड़ने पर पानी मैदानी इलाकों में छोड़ा जाएगा, जिससे हिरण को पानी की तलाश में दूर तक नहीं भटकना पड़ेगा।

(This story was produced with support from the Earth Journalism Network.)

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अमित कुमार सिंह 6 वर्षों के अनुभव के साथ एक फ्रीलांस और स्वतंत्र पत्रकार हैं। उन्होंने पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। वे अपने डिजिटल चैनल Parsumit Live News से लंबे समय से जुड़े हुए हैं, जहाँ वे ज़मीन से जुड़ी ग्रामीण समस्याओं, राजनीति, स्वास्थ्य और पर्यावरण से संबंधित ख़बरों को कवर करते रहे हैं। वर्तमान में वे जलवायु परिवर्तन से संबंधित रिपोर्टिंग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

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