बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को पूर्णिया में कई तरह के कार्यक्रम में शिरकत करने आ रहे हैं।
पूर्णिया में वह 10 योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगे, जिनमें पूर्णिया एयरपोर्ट का नया टर्मिनल, राष्ट्रीय मखाना बोर्ड, कोसी-मेची अंतर्राज्यीय नदी लिंक परियोजना, विक्रमशिला-कटोरिया रेलवे लाइन, अररिया-गलगलिया (ठाकुरगंज) नई रेल लाइन, पूर्णिया सेक्स-सॉर्टेड सीमन सुविधा शामिल हैं।
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हालांकि, कार्यक्रमों की इस फेहरिस्त में जीविका दीदी से जुड़ा कोई भी कार्यक्रम नहीं है, मगर फिर भी पीएम मोदी के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जीविका दीदियों को क्यों ले जाया जा रहा है, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। यहां यह भी बता दें कि प्रधानमंत्री ने 2 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड यानी जीविका बैंक का शुभारंभ किया था और 105 करोड़ रुपये ट्रांसफर किये थे। इस बैंक के जरिए जीविका से जुड़ी महिलाएं सस्ती ब्याज दरों पर आसानी से लोन मिल सकेगा।
बिहार में एक करोड़ 40 लाख महिलाएं जीविका समूह से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव में जीविका से जुड़ी महिलाओं को लुभाने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, पूर्णिया जिले की कमोबेश हर पंचायत से 5 से 6 बसों में 50 से 100 की संख्या में जीविका दीदियों को कार्यक्रम स्थल तक ले जाया जाएगा और कार्यक्रम के खत्म होने के बाद उन्हें वापस उनकी पंचायतों में छोड़ा जाएगा।
इन बसों में जीविका दीदियों को सवार कराकर सुरक्षित कार्यक्रम स्थल तक ले जाने और कार्यक्रम के बाद वापस लाने का जिम्मा सरकारी कर्मचारियों को सौंपा गया है और इन सरकारी कर्मचारियों में शिक्षक, कृषि सलाहकार, समन्वयक, पर्यवेक्षक, विकास मित्र, आवास सहायक, ग्राम कचहरी सचिव, स्वच्छता पर्यवेक्षक आदि शामिल हैं।
बसों के संचालन के लिए हर पंचायत के पंचायत सचिव को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जिनकी निगरानी में बसें संचालित होंगी।
“शिक्षकों को बनाया जा रहा कंडक्टर-खलासी”
बसों में शिक्षकों व अन्य सरकारी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। सरकार के इस फरमान को शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की गरिमा से खिलवाड़ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को बस का कंडक्टर और खलासी बनाया जा रहा है और अगर इसके खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई, तो ये एक परिपाटी बन जाएगी तथा हर सरकारी कार्यक्रम में भीड़ जुटाने की जिम्मेवारी शिक्षकों पर आ जाएगी।
पूर्णिया के छात्र राजद के जिलाध्यक्ष मो बिस्मिल ने कहा कि आखिर शिक्षक और जीविका दीदी कौन हैं? क्या ये सत्तारूढ़ दल बीजेपी व जदयू की पार्टी कार्यकर्ता हैं या फिर सरकारी व्यवस्था का हिस्सा? शिक्षक सरकारी कर्मचारी हैं और जीविका दीदी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं, जिनका असल मकसद सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण है। इसके बावजूद इन्हें राजनीतिक भीड़ जुटाने का साधन बनाया जा रहा है।
शिक्षक नेता अमित विक्रम कहते हैं, “शिक्षकों को वैसे ही दस तरह के गैर शिक्षा कार्यक्रमों में लगाया जा रहा है और अब भीड़ जुटाने के लिए बसों से लोगों को ले जाने का काम भी शिक्षकों को सौंपा गया है। ये शिक्षकों के सम्मान के साथ मजाक है। अगर जीविका दीदियों को ही कार्यक्रमस्थल पर ले जाया था, तो जीविका में बहुत सारे कर्मचारी काम करते हैं, उनका इस्तेमाल किया जाना चाहिए न कि शिक्षकों का।”
“शिक्षकों का इस्तेमाल भीड़ जुटाने के लिए क्यों किया जा रहा है? सरकार के इस फैसले से सार्वजनिक तौर पर शिक्षकों का मजाक उड़ाया जा रहा है,” उन्होंने कहा।
उल्लेखनीय हो कि 15 सितम्बर को जितिया पर्व के मद्देनजर सरकारी स्कूल बंद हैं, ऐसे में शिक्षकों की छुट्टी रहेगी, लेकिन छुट्टी के दिन भी शिक्षकों को काम में लगाया जा रहा है।
बस से 50 जीविका दीदियों को कार्यक्रम में ले जाने का जिम्मा पाने वाली एक महिला शिक्षक ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, “जितिया पर्व तो अधिकांश महिला शिक्षक मनाती हैं, इस वजह से बहुत सारी महिला शिक्षकों ने घर जाने का प्लान बना रखा था, लेकिन इस कार्यक्रम के लिए उन्हें जाना कैंसिल करना पड़ा।”
उक्त महिला शिक्षक भी जितिया पर्व मना रही हैं। उन्होंने कहा, “सरकारी आदेश आ गया है, तो हमलोग कुछ नहीं कर सकते हैं। आदेश का पालन करना ही होगा।”
“ये काम तो शिक्षक की गरिमा के साथ खिलवाड़ है। बुरा लग रहा है लेकिन बुरा लगे या अच्छा, करना तो होगा है। अगर नहीं करेंगे, तो कार्रवाई का परिणाम भुगतना होगा,” उन्होंने कहा।
उनकी ड्यूटी जिस पंचायत की बस में लगी है, वो उनके आवास से करीब 30 किलोमीटर दूर है और उन्हें भोर 5 बजे प्रखंड कार्यालय में रिपोर्ट करना है, इसका मतलब है कि उन्हें तड़के निकलना होगा। उन्होंने कहा, “उतनी सुबह वाहन मिलना मुश्किल है, तो निजी वाहन से आना होगा, लेकिन अभी तक ऊपर से ये नहीं बताया गया है कि अतिरिक्त खर्च का भुगतान सरकार करेगी कि नहीं।”
‘मैं मीडिया’ के साथ बातचीत में ज्यादातर शिक्षकों, किसान सलाहकारों व अन्य कर्मचारियों ने इस आदेश को लेकर नाराजगी जाहिर की, लेकिन नौकरी जाने के संभावित खतरे या सख्त कार्रवाई का डर उनमें साफ नजर आया। सरकारी कर्मचारियों का सीधा कहना था कि अगर आदेश आ गया है, तो उन्हें किसी भी कीमत पर उसका पालन करना ही होगा, उनके पास इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
पूर्णिया के एक किसान सलाहकार, जिन्हें 100 जीविका दीदियों को बस से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचाने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है, ने कहा, “सरकार का आदेश आ गया है, तो अब क्या ही किया जा सकता है। सरकार जो कहेगी वो करना होगा, वरना परिणाम भुगतना होगा।”
एक अन्य किसान सलाहकार कहते हैं, “हमलोग कहने को तो किसान सलाहकार हैं, लेकिन हमसे बहुत तरह का काम लिया जाता है। कभी मजिस्ट्रेट की ड्यूटी में लगाया जाता है, तो कभी जनगणना में लगाया जाता है।” हालांकि, वह ये भी मानते हैं कि इस तरह के कार्यक्रम में उन जैसे कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति में कोई खास दिक्कत नहीं है। “प्रधानमंत्रीजी का कार्यक्रम है और इस तरह का कार्यक्रम रोज-रोज तो नहीं होता है। इस तरह के कार्यक्रम के लिए अलग से सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति तो नहीं हो सकती है न! हम जैसे कर्मचारियों को ही लगाया जाएगा इसमें,” उन्होंने कहा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र
एक अन्य शिक्षक नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, “ऐसा पहली बार हो रहा है कि हमलोगों को भीड़ जुटाने के काम में लगाया गया है, लेकिन सरकारी आदेश है तो पालन करना ही होगा, वरना कार्रवाई होगी। पिछली बार एक राजकीय मेले में कुछ शिक्षक अनुपस्थित रहे थे, तो उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कड़ी चेतावनी दी गई थी।”
“इस तरह के कार्यक्रमों में हम शिक्षकों की नियुक्ति अनुचित है। बहुत सारे शिक्षकों को जहां रिपोर्ट करना है, उससे वे 40-50 किलोमीटर दूर रहते हैं, वे इतनी सुबह कैसे आएंगे, सरकार ने ये भी नहीं सोचा,” उन्होंने कहा।
इधर, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं करने की मांग करते हुए शिक्षक संगठनों ने प्रशासन को पत्र लिखा है।
बिहार संयुक्त शिक्षक संघ (पूर्णिया) ने 13 सितम्बर को जिला शिक्षा पदाधिकारी को एक पत्र भेजा। इस पत्र में संघ ने लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री की सभा में जीविका दीदियों को बस से ले जाने हेतु शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है। जीविका दीदियों को सभास्थल तक पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित वापस ले जाने के लिए शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति से शिक्षक समाज अपने आपको अपमानित महसूस कर रहा है।”
पत्र में संघ ने आगे लिखा, “बहुत सारी महिला शिक्षिकाओं को भी इस कार्य में लगाया गया है। महिला शिक्षिकाएं जितिया पर्व में रहेंगी और उनका उस दिन अवकाश भी है। अतः महाशय से नम्र निवेदन है कि शिक्षकों को मान-सम्मान के खिलाफ वाले इस आदेश को रद्द करवाने हेतु अपने स्तर से पहल करने की कृपा की जाए।”
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