Thursday, October 6, 2022

स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी: आधी हकीकत, आधा फसाना

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Umesh Kumar Ray
Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

कुछ दिन पहले सीमांचल के कुछ सरकारी स्कूलों में साप्ताहिक अवकाश रविवार की जगह शुक्रवार को देने को लेकर काफी विवाद हुआ। भाजपा नेताओं ने इस खबर पर तीखी प्रतिक्रिया दी और साथ ही कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे साम्प्रदायिक रंग देकर प्रकाशित की।

भाजपा सांसद, केंद्रीय मंत्री व अल्पसंख्यक विरोधी बयानों के लिए कुख्यात गिरिराज सिंह ने कहा, “बचपन से हम जानते हैं कि रविवार को स्कूल और कार्यालय बंद रहते हैं। शुक्रवार को कुछ संस्थानों में छुट्टियां मुझे एक समुदाय के लाभ के लिए शरिया कोड लागू करने का प्रयास लगता है।”

भाजपा नेता और बिहार के डिप्टी सीएम रहते तारकिशोर प्रसाद ने कहा, “बिहार में विद्यालय सरकारी नियमावली से चलेंगे। यहां जाति व धर्म के आधार पर किसी की मनमर्जी नहीं चलेगी।” तारकिशोर प्रसाद, 8 अगस्त तक बिहार के डिप्टी सीएम थे। 9 अगस्त को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गये, तो उनका पद भी चला गया।

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भाजपा सांसद व आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने कहा,“ऐसा क्यों है कि तुर्की, जहां 99 प्रतिशत मुस्लिम आबादी, रविवार को छुट्टियां मनाता है लेकिन किशनगंज शुक्रवार को ऐसा क्यों करता है।”

इस आशय की पहली खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी थी, जिसमें कहा गया था कि सीमांचल के लगभग 500 सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी दी जाती है।

टीवी9 भारतवर्ष ने अपने पोर्टल पर “बिहार: ‘शरिया या सरकार’ किसके कानून से शुक्रवार को सरकारी स्कूलों में छुट्टी” शीर्षक से खबर प्रकाशित कर दी।

हालांकि, खबरों में इसका जिक्र नहीं था कि शुक्रवार को बंद रहने वाले सरकारी स्कूल हिन्दी मीडियम है, उर्दू मीडियम हैं या फिर मदरसा।

मैं मीडिया ने जब इस खबर को लेकर विस्तृत पड़ताल की, तो पता चला कि सीमांचल के जिलों में मुस्लिम छात्रों की बहुलता वाले कुछ हिन्दी मीडियम स्कूल शुक्रवार को बंद रहते हैं, लेकिन कई हिन्दी स्कूल ऐसे भी हैं, जहां मुस्लिम छात्रों की बहुलता के बावजूद शुक्रवार को वहां छुट्टियां नहीं रहतीं, बल्कि वे रविवार को बंद रहते हैं।

मैं मीडिया को तो पूर्णिया जिले में आसपास ही दो ऐसे स्कूल मिले, जहां मुस्लिम छात्रों की अधिकता के बावजूद एक स्कूल की साप्ताहिक छुट्टी रविवार को होती है, तो दूसरे की शुक्रवार को।

मसलन पूर्णिया के बागधर में स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय में मुस्लिम छात्रों की संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। इस स्कूल में कुल 10 शिक्षक हैं, जिनमें से सात शिक्षक मुस्लिम और तीन हिन्दू हैं। लेकिन यहां साप्ताहिक छुट्टी रविवार को ही होती है।

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स्कूल के शिक्षक रहबर खान बताते हैं, “यहां तो शुरू से ही स्कूल में रविवार को छुट्टी होती है और अब भी यही नियम लागू है।” लेकिन इस स्कूल से कुछ ही दूर स्थित मध्य विद्यालय शीशाबारी में 80 प्रतिशत बच्चे मुस्लिम समाज से आते हैं और यहां रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी होती है।

यह स्कूल 30 साल से चल रहा है और शिक्षकों का कहना है कि शुरू से ही इस स्कूल में शुक्रवार को छुट्टी रहती है।

स्कूल के शिक्षक आदिल कहते हैं, “शुक्रवार की छुट्टी को लेकर कभी भी कोई विवाद नहीं हुआ, इसलिए पहले जिस तरह स्कूल चल रहा था, वैसे ही अब भी चल रहा है। अगर कोई नया सरकारी नियम आएगा, तो उसके हिसाब से छुट्टी दी जाएगी।”

उर्दू स्कूल और मदरसों को लेकर स्पष्ट निर्देश

गौरतलब हो कि बिहार में लगभग 43 हजार सरकारी स्कूल हैं जिनमें सरकारी उर्दू स्कूलों की संख्या लगभग चार हजार है। इसके अलावा 1942 मदरसे हैं, जिन्हें सरकारी अनुदान मिलता है।

इनमें से मदरसों व उर्दू माध्यम के स्कूलों के लिए स्पष्ट निर्देश है कि वहां साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को रहेगा।
शिक्षा विभाग के एक आदेश में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है, “बिहार शिक्षा संहिता के नियम 265 के आलोक में प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों में अवकाश घोसित करने का प्रावधान किया गया है।”

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“बिहार शिक्षा संहिता के आर्टिकल 265(V) के अनुसार प्राथमिक व मध्य विद्यालयों की अवकाश तालिका स्थानीय प्राधिकार के द्वारा क्षेत्रीय, भौगोलिक, सामाजिक और धार्मिक वातावरण पर आधारित व्यवस्था के अनुसार तैयार की जाती है, जिसके आलोक में सरकारी उर्दू प्रारंभिक मुस्लिम बहुसंख्यक विद्यालय जिनकी कुल संख्या 4167 है, में जुमा की सामूहिक नमाज अदा करने से पठन-पाठन कार्य बाधित होने की संभावना के कारण उस दिन विशेष छुट्टी घोषित की जाती है और उसके स्थान पर रविवार को उक्त कोटि के विद्यालय खोले जाते हैं ताकि उपस्थिति और पठन-पाठन कार्य पूर्ण रूप से हो सके,” आदेश कहता है।

हिन्दी मीडियम स्कूलों में छुट्टी कब से?

सरकारी आदेश की शुरुआती लाइनों से यह भी मालूम होता है कि किसी स्कूल में साप्ताहिक छुट्टी वहां के क्षेत्रीय, भौगोलिक, सामाजिक व धार्मिक वातावरण के आधार पर स्थानीय प्राधिकार तय कर सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसी बुनियाद पर जिन स्कूलों में मुस्लिम छात्रों की तादाद ज्यादा है, उन स्कूलों में साप्ताहिक छुट्टी रविवार की जगह शुक्रवार को होती है, क्योंकि ज्यादातर स्कूलों, जहां शुक्रवार को छुट्टी रहती है, के शिक्षकों का कहना है कि इस नियम का पालन वर्षों से किया जा रहा है।


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पूर्णिया जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी शिवनाथ रजक कहते हैं, “जिले के कुछ हिन्दी मीडियम स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी मिलती है। इसको लेकर कोई आदेश हुआ है कि नहीं, मुझे नहीं पता, लेकिन लंबे समय से यह नियम चला आ रहा है।”

“हमें इसको लेकर किसी तरह का लिखित आदेश नहीं दिखा है,” उन्होंने कहा।

शुक्रवार को स्कूलों में छुट्टी को लेकर हिन्दू समुदाय से आने वाले शिक्षकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यह नियम हाल के दिनों या सालों में नहीं बना है, बल्कि कई वर्षों से चल रहा है।

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पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड के रौटा में स्थित आदर्श मध्य विद्यालय के शिक्षक रजनीश कांत की इस स्कूल में नियुक्ति साल 2014 में हुई थी। संयोग से वह अपना नियुक्ति पत्र लेकर शुक्रवार को ही स्कूल पहुंच गये थे, लेकिन स्कूल बंद रहने के कारण उन्हें हैरानी हुई। उन्होंने आसपास के लोगों से स्कूल बंद रहने का कारण पूछा, तो उन्हें बताया गया कि शुक्रवार को स्कूल बंद रहता है। वह कहते हैं, “मैंने यह स्कूल साल 2014 में ज्वाइन किया था। शुक्रवार की छुट्टी का नियम 2014 से ही चला आ रहा है।”

इस स्कूल में 70 प्रतिशत छात्र मुस्लिम समुदाय से आते हैं। वह बताते हैं, “कुछ दिन पहले शिक्षा विभाग की तरफ से सभी स्कूलों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई। इनमें छात्रों की संख्या और इनमें हिन्दू व मुस्लिम समुदाय के बच्चों का प्रतिशत, शिक्षकों की संख्या और साप्ताहिक छुट्टी कब होती है और इसको लेकर कोई आदेश है, तो उसकी जानकारी मांगी गई थी। मुझे पता चला है कि ज्यादातर स्कूल जो शुक्रवार को बंद रहते हैं, उनके प्रबंधन की तरफ से आदेश वाला कॉलम खाली छोड़ा गया है।”

उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में साप्ताहिक छुट्टी का पालन सिर्फ और सिर्फ सरकारी आदेश के अनुसार होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग की तरफ से इस आशय को लेकर मौखिक आदेश दिया गया था। इस आदेश के आलोक में सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों से 30 जुलाई तक अपने प्रखंड के उन स्कूलों के बारे में जानकारी मांगी थी, जिनमें रविवार की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी मिलती है।

आदेश में शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी वाले स्कूलों से अल्पसंख्यक शिक्षकों व अन्य शिक्षकों की संख्या, अल्पसंख्यक छात्रों व अन्य छात्रों की संख्या, विद्यालय स्थापना वर्ष, स्कूल के पोषक क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की संख्या तथा शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रहने संबंधी पत्र/आदेश का पत्रांक/तारीख मांगे गये हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने ये जानकारियां विभाग को उपलब्ध करा दी हैं, लेकिन अभी तक विभाग की तरफ से कोई आदेश नहीं आया है।

‘मैं मीडिया’ ने राज्य के एक दर्जन से अधिक जिलों के शिक्षा पदाधिकारियों से बात की, तो पता चला कि सीमांचल के चार जिलों किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार को छोड़कर कहीं भी हिन्दी मीडियम स्कूलों में साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को नहीं मिलती है।

जिलास्तरीय शिक्षा पदाधिकारियों ने बताया कि शिक्षा विभाग की तरफ से अब तक उनके पास कोई लिखित आदेश नहीं आया है कि शुक्रवार को बंद रहने वाले स्कूलों में क्या नियम लागू किया जाए, इसलिए यथास्थिति बनी हुई है।


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हालांकि, मुस्लिम छात्रों की बहुलता वाले जिन सरकारी स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी रहती है, उनमें दूसरे धार्मिक त्योहारों (हिन्दू व मुस्लिमों के त्योहार शामिल) में भी छुट्टियों का पालन किया जाता है। ऐसे में यह आरोप लगाना कि स्कूलों में शरिया कानून लागू करने की कोशिश हो रही है, पूरी तरह राजनीतिक लगता है क्योंकि जिन भी स्कूलों मे शुक्रवार को छुट्टी रहती है, वहां यह नियम वर्षों से चला आ रहा है। हाल के वर्षों में किसी भी नये स्कूल में यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है।

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डेढ़ दशक तक स्कूल में शिक्षक रहे पूर्व विधायक और जनता दल (यूनाइटेड) नेता मास्टर मुजाहिद आलम कहते हैं, “इस मुद्दे को सिर्फ वोटरों का ध्रुवीकरण करने के लिए उछाला जा रहा है।”

उन्होंने हालांकि यह जरूर कहा कि उर्दू स्कूलों और मदरसों में शुक्रवार को साप्ताहिक छुट्टी शिक्षा विभाग के आदेश पर हो रही है, लेकिन कुछ सरकारी हिन्दी मीडियम स्कूल भी शुक्रवार को बंद रहते हैं, इस पर उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की और कहा “स्कूलों में बच्चों की मौजूदगी शत-प्रतिशत हो, यह सुनिश्चित करने के लिए ही शुक्रवार को छुट्टी दी जाती होगी, क्योंकि शुक्रवार को नमाज के चलते मुस्लिम बच्चे स्कूल नहीं आते होंगे।”

शिक्षकों के क्या हैं तर्क

गौरतलब हो कि बिहार शिक्षा विभाग का लिखित आदेश है कि मुस्लिम सरकारी सेवकों को हर शुक्रवार को दो घंटे का विशेष अवकाश दिया जाएगा, ताकि वे नमाज पढ़ सकें।

बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के साल 2012 के आदेश में कहा गया है, “मुस्लिम सरकारी सेवकों को ब्रिटिश काल से ही शुक्रवार के दिन दोपहर को जुमे की नमाज मस्जिदों में सामूहिक रूप से अदा करने के लिए कार्यालय से अनुपस्थित रहने की विशेष अनुमति प्राप्त है।”

आदेश के अनुसार, मुस्लिम सरकारी सेवक प्रत्येक शुक्रवार को दोपहर 12.30 बजे से 2.30 बजे तक की अवधि का उपयोग जुमे की नमाज अदा करने के लिए कर सकेंगे।

मुस्लिम शिक्षकों का कहना है कि चूंकि मुस्लिम शिक्षकों को दो घंटे की छुट्टी मिल जाती है शुक्रवार को, इसलिए उन्हें लगा होगा कि क्यों न उसी दिन स्कूल बंद कर दिया जाए।

किशनगंज जिले के सिमलिया प्राथमिक विद्यालय में शत-प्रतिशत बच्चे मुस्लिम हैं, लेकिन वहां साप्ताहिक छुट्टी रविवार को ही रहती है। स्कूल के शिक्षक समाइल नबी कहते हैं, “यहां शुरू से ही रविवार को छुट्टी रहती है।”

वह कहते हैं, “कोई भी स्कूल मनमाने तरीके से मन मुताबिक साप्ताहिक छुट्टी तय नहीं कर सकता है। निश्चित तौर पर इसको लेकर जिला शिक्षा विभाग को इत्तिला किया गया होगा। मेरा खयाल है कि स्कूल मैनेजमेंट कमेटी ने शिक्षा पदाधिकारी के साथ मिलकर ही यह निर्णय लिया होगा।”

मुस्लिम छात्रों की बहुलता वाले कुछ हिन्दी मीडियम स्कूलों के शिक्षकों से बात करने पर यह भी मालूम चला कि उच्च कक्षा में पढ़ने वाले मुस्लिम बच्चे शुक्रवार को अनुपस्थित रहते हैं।

उत्क्रमित उच्च विद्यालय बागधर के शिक्षक रहबर खान कहते हैं, “हमारे यहां पढ़ने वाले 60 प्रतिशत मुस्लिम छात्रों में से शुक्रवार को महज 10 प्रतिशत छात्र ही स्कूल आते हैं।”

बिहार एजुकेशन कोड, 1961 के अनुच्छेद 265 (vii) में कहा गया है, “छुट्टियों के दिन, जिनका जिक्र इस रूल में किया गया है, उनमें ररिवार को होने वाला साप्ताहिक अवकाश (या मुस्लिम समुदाय के छात्रों के लिए बने स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश और संस्कृत स्कूलों में हिन्दी महीनों के पहले, 8वें, 16वें और 23वें दिन की छुट्टी) शामिल नहीं होंगे।

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एजुकेशन कोड में उर्दू माध्यम के स्कूलों का जिक्र नहीं है बल्कि मुस्लिम छात्रों के लिए बने स्कूलों की बात कही गई है जबकि संस्कृत के मामले में सीधे तौर पर संस्कृत स्कूलों का जिक्र किया गया है। अतः संभव है कि जिस स्कूल में 80 से 90 प्रतिशत छात्र मुस्लिम हैं, वहां एजुकेशन कोड को मानते हुए साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को दी जा रही है।

इस संबंध में बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी कहा है कि मुस्लिम छात्र बहुल हिन्दी स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी अवैध नहीं है।

बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सचिव डॉ मंसूर अहमद एजाजी ने कहा, “बिहार एजुकेश कोड के अनुच्छेद में जो कुछ कहा गया है, उसके अनुसार मुस्लिम छात्रों की अधिक आबादी वाले हिन्दी स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी रखना वैध है। वहीं, उर्दू स्कूलों व मदरसों में साप्ताहिक छुट्टी शुक्रवार को दिये जाने को लेकर साल 2019 का सरकारी आदेश है। इसलिए पूरे मामले को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं होना चाहिए।”

उन्होंने शिक्षा विभाग को लिखे पत्र में कहा, ”27 जुलाई को एक उर्दू दैनिक में प्रकाशित समाचार से ज्ञात होता है कि कुछ लोगों ने शिक्षा मंत्री से जनता दरबार में शिकायत की है कि किशनगंज समेत सीमांचल के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों के स्कूलों में शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश दिया जाता है, जिसके लिए अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।”

“बिहार शिक्षा संहिता में निहित प्रावधानों के अंतर्गत उक्त विद्यालयों में अवकाश शुक्रवार को बिल्कुल वैध एवं नियमानुकूल है। इस संबंध में भ्रांति दूर कर स्थिति स्पष्ट करते हुए आदेश निर्गत करने की कृपा करेंगे तथा कृत कार्रवाई से आयोग को भी अवगत कराने का कष्ट करेंगे,” पत्र में उन्होंने लिखा।


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