बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हलचल के बीच किशनगंज जिले के ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र से जदयू के उम्मीदवार गोपाल कुमार अग्रवाल ने मंगलवार को किशनगंज के डीआरडीए भवन स्थित डीडीसी कार्यालय में नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ कभी घोर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे पूर्व विधायक नौशाद आलम भी मौजूद थे।
कौन हैं गोपाल अग्रवाल?
गोपाल कुमार अग्रवाल के राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 2001 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और जिला परिषद का चुनाव जीतकर पहली बार प्रतिनिधि बने। उनके पिता तारा चंद्र धानुका लंबे समय तक ठाकुरगंज से चुनाव लड़ते रहे। फरवरी 2005 के चुनाव में वे कांग्रेस के मोहम्मद जावेद से मात्र 179 मतों से हार गए थे।
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इसके बाद अक्टूबर 2005 के विधानसभा चुनाव में गोपाल अग्रवाल ने पिता की जगह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद जावेद को हराने में सफल रहे। दो वर्ष बाद उन्होंने जदयू का दामन थाम लिया और तीन वर्षों तक बिहार विधानसभा की पर्यटन एवं उद्योग संबंधी समिति के सभापति रहे।
2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू प्रत्याशी के रूप में उन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन लोजपा उम्मीदवार नौशाद आलम से साढ़े सात हजार मतों से पराजित हो गए। 2015 में एनडीए के घटक दल लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार जदयू में शामिल हो चुके नौशाद आलम से फिर हार का सामना करना पड़ा। 2020 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर कर किस्मत आजमाई, मगर राजद उम्मीदवार सऊद असरार ने उन्हें 23,887 मतों के अंतर से पराजित किया। सऊद असरार, दो बार किशनगंज से सांसद रहे कांग्रेस नेता स्वर्गीय मौलाना असरारुल हक़ क़ासमी के पुत्र हैं। यानी, गोपाल पिछले तीन विधानसभा चुनावों में लगातार हार का सामना कर चुके हैं।
नामांकन के बाद गोपाल अग्रवाल ने राजद विधायक सऊद असरार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके अज्ञान और निष्क्रियता के कारण पिछले पांच वर्षों में ठाकुरगंज विकास के मामले में काफी पीछे चला गया है।
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