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मानव तस्करी पर बोले सीएम – “सिर्फ रेस्क्यू नहीं, पुनर्वास भी जरूरी”

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
Published On :
bihar cm stresses rehabilitation alongside rescue in fight against human trafficking

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल लापता लोगों को ढूंढना नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित वापस लाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पटना के ज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम ‘ईस्टर्न जोनल कॉन्फ्रेंस-कम-कंसल्टेशन ऑन मिसिंग एंड ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ में बोल रहे थे।


उन्होंने कहा कि लापता बच्चों और महिलाओं को वापस लाना हमारी प्राथमिकता है, लेकिन सिर्फ रेस्क्यू पर्याप्त नहीं है। उनके पुनर्वास की ठोस व्यवस्था करना भी उतना ही जरूरी है ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सहयोग शिविर’ के माध्यम से मामलों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। अब तक लगभग 1,200 से अधिक लापता बच्चों की बरामदगी हुई है। और ‘नया सवेरा 3.0’ के माध्यम से पीड़ितों की बरामदगी के साथ उनके पुनर्वास, कौशल विकास व सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मानव तस्करी की रोकथाम के लिए रोजगार और कौशल विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है।


इस सम्मेलन में बिहार के साथ झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में लापता लोगों की पहचान, खोज अभियान और मानव तस्करी नेटवर्क पर संयुक्त कार्रवाई को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ऐसे सभी मामलों में तेजी से कार्रवाई कर रही है और लापता बच्चों व महिलाओं की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गुमशुदगी का बढ़ता संकट: 2025 में 14,699 बच्चे लापता

25 फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 2025 में 14,699 बच्चों के लापता होने की सूचना मिली थी और पुलिस ने इनमें से 7,772 को ट्रेस कर लिया था। इनमें 12,526 लड़कियां और 2,173 लड़के शामिल हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक बिहार में हर दिन लगभग 40 बच्चे लापता हो रहे हैं।

बिहार में लापता लोगों की बढ़ती संख्या से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया था। 13 मार्च 2026 को जारी पीआईबी की विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग ने बिहार समेत पांच राज्यों से रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने इन राज्यों में लापता व्यक्तियों और बच्चों की स्थिति, उन्हें तलाशने के लिए उठाए गए कदमों तथा आगे की कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। मानवाधिकार आयोग ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से भी इन राज्यों में लापता व्यक्तियों से संबंधित नवीनतम आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा था।

मानवाधिकार आयोग के अनुसार मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बिहार में वर्ष 2013 से हर साल करीब 12,000 से 14,000 लोग लापता होते रहे हैं। आयोग ने बच्चों को लेकर विशेष चिंता जताई है, क्योंकि रिपोर्टों के मुताबिक लापता बच्चों में से करीब दो-तिहाई का ही पता लगाया जा सका है। आयोग ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि लापता बच्चों को भीख मांगने, बाल श्रम, यौन शोषण और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में धकेले जाने का खतरा हो सकता है।

सीएम सम्राट चौधरी ने गुमशुदगी और मानव तस्करी को पलायन से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि रोजगार की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में जाते हैं, जिससे कई बार वे जोखिम में पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश और उद्योग बढ़ाने की दिशा में काम चल रहा है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों को बाहर जाने की मजबूरी कम होगी।

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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