सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है जिसमें आत्‍मा का सूरज डूब जाए,

और जिसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा आपके जिस्‍म के पूरब में चुभ जाए

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती

सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना

और मुझे लगता है कि नीतीश कुमार की अंतरात्मा मुर्दा शांति से भर चुकी है।

दरअसल मैंने पाश की इन पंक्तियों को थोड़ा आगे-पीछे इसलिए किया है ताकि आपको बिहार के हालात से रूबरू करा सकूं। यूं तो कहने को बिहार में बहार है, कहने को तो सुशासन भी है और जब कहने को कुछ न बचे तो मौजूदा सरकार के पास खुद को बेहतर बताने के लिए लालू यादव का हैशटैग जंगलराज तो है ही।

लेकिन अगर मैं कहूँ कि नीतीश कुमार का शासनकाल महाजंगलराज की श्रेणी में रखा जा सकता है। तो शायद आप अपनी भौहें तिरछी कर सोचें कि मैं क्या बोल रहा हूँ क्योंकि टीवी चैनलों और अखबारों में तो नीतीश कुमार को सुशासन बाबू ही कहकर बुलाया जाता है। लेकिन आज मैं आपको आंकड़ों के ज़रिए समझाऊंगा कि ये छवि आपकी आंखों पर पर्दा डालने के लिए गढ़ी गई है क्योंकि सरकार के दावों और आंकड़ों में काफी अंतर है।

आंकड़े बताऊं, उससे पहले आपको बीते कुछ दिनों की घटनाएं याद दिलाना चाहूंगा।

बीते शुक्रवार को पटना में महिला के साथ गैंगरेप का एक वीडियो वायरल हुआ। बताया गया कि करीब एक महीने पहले गौरीचक इलाके में करीब 45 वर्षीय एक विधवा के साथ 7-8 लड़कों ने गैंगरेप किया था। उन्होंने न सिर्फ उस महिला की अस्मत लूटी बल्कि उसे जबरदस्ती शराब पिलाने की कोशिश भी की और उसका वीडियो बनाकर घटना के एक महीने बाद वायरल कर दिया। और सुशासन का आलम ये है कि पुलिस को घटना की जानकारी वीडियो वायरल होने के बाद लगी। खैर, आनन-फानन में पुलिस ने 7 में से 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

दूसरी घटना सिवान जिले की है, जहां आंदर थाना क्षेत्र में कुछ लड़कों ने दिन-दहाड़े एक महिला का गैंगरेप किया। उस गैंगरेप का वीडीओ बनाया और फिर घटना के एक हफ्ते बाद यानी मंगलवार को वायरल कर दिया। वायरल वीडियो में महिला चीखती-चिल्लाती नज़र आ रही है, वहां मौजूद कुछ लोगों से पुलिस को बुलाने के लिए गुजारिश भी कर रही है लेकिन ऐसा कुछ हो न सका। अब ये बिहार पुलिस की महानता ही है कि इस घटना की जानकारी भी पुलिस को वीडियो वायरल होने के बाद हुई। जिले के एसपी ने बताया कि वीडियो के आधार पर कुछ आरोपियों को चिह्नित किया गया है लेकिन महिला के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

अब आपको मुजफ्फरपुर ले चलते हैं जहां सोमवार को करजा इलाके में एक महिला ने थाने पहुंचकर गैंगरेप का आरोप लगाया। आरोप के मुताबिक बीते 12 अगस्त को कुछ युवकों ने घर में घुसकर न सिर्फ उस महिला से गैंगरेप किया बल्कि उसका वीडियो भी बनाया। पीड़िता के मुताबिक लड़कों ने उसके दुधमुहे बच्चे को पिस्तौल की नोंक पर रखकर उसके साथ बारी-बारी से बलात्कार किया। इतना ही नहीं महिला का आरोप है कि लड़कों ने उस वीडियो के दम कई और दफे बलात्कार करने की कोशिश की। 22 अगस्त को भी लड़कों ने बलात्कार करने की कोशिश की जिसका महिला ने विरोध किया। विरोध से गुस्साए लड़कों ने महिला का वीडियो वायरल कर दिया, जिसके बाद महिला ने थाने में 5 लड़कों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। सभी लड़के 19 से 21 साल की उम्र के हैं लेकिन इस मामले में पुलिस अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

वहीं 20 अगस्त को जहानाबाद के इनडोर स्टेडियम के पार्क में एक महिला के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है, आरोप है कि चार लोगों ने गैंगरेप किया। जिसके बाद महिला थाने पहुंची लेकिन वहां उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। उसके बाद महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की। बताया जा रहा है कि पीड़ित पक्ष और आरोपियों के बीच पहले से ही कोई जमीन विवाद चल रहा है। कारण चाहे जो भी हो, लेकिन जब एक महिला खुद के साथ गैंगरेप की शिकायत लेकर थाने पहुंचती है और वहां मौजूद पुलिसकर्मी शिकायत लिखने से मना कर देते हैं तो ये उस सूबे की पुलिस व्यवस्था का हाल बताने के लिए काफी है।

अब अगली घटना सुनिए, पटना से सटे हाजीपुर में 19 साल की एक युवती को प्रेमी ने शादी का झांसा देकर भगाया और फिर तेजाब डालकर मार डाला। परिवार के मुताबिक 21 अगस्त को लड़की घर से जेवर और कैश लेकर भाग गई और अगले दिन झाड़ियों में उसकी अर्धनग्न जली हुई लाश मिली। लड़की के परिजनों का आरोप है कि उसकी बलात्कार के बाद हत्या हुई है। लेकिन अभी तक इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है जबकि लड़की की लाश के पास से ही एक लड़के का आईकार्ड बरामद हुआ है। अपनी बेटी के तेजाब से जले चेहरे को उसके पिता ने अपने दिल पर पत्थर रखकर कितने दर्द से गुजरते हुए पहचाना, सुन लीजिए…

इसके अलावा सहरसा, सासाराम और कौन-कौन सी जगह बताएं आपको …आप बिहार के नक्शे पर कोई भी जिला चुन लीजिये और आपको वहां पर बलात्कार और गैंगरेप की वीभत्स घटनाएं मिल जाएंगी।

खुद बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में हर 6 घंटे के भीतर एक बलात्कार की घटना दर्ज होती है। गौर करिएगा, दर्ज होती है क्योंकि बलात्कार की न जाने कितनी घटनाएं तो कभी सामने ही नहीं आती। खैर, हम उन्हीं आधिकारिक आंकड़ों पर बात करेंगे जो बिहार पुलिस की वेबसाइट पर मौजूद हैं।

बिहार पुलिस की वेबसाइट पर मौजूद चार्ट के मुताबिक बिहार में 2001 में कुल 746 बलात्कार हुए थे जबकि 2019 में कुल 1450बलात्कार की घटनाएं हुईं, यानी 18 साल में बलात्कार की घटनाएं लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इतना ही नहीं 2001 में हत्या, डकैती, किडनैपिंग, लूट, बलात्कार और तमाम दूसरे अपराधों समेत कॉग्निज़ेबल घटनाओं की कुल संख्या 95942 थी, जो 2019 में बढ़कर 269096 हो चुकी है यानी ढाई गुना से भी ज्यादा। किडनैपिंग जैसे अपराधों में तो साढ़े 6 गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

बिहार में अपराध के इन बढ़ते आंकड़ों पर जब हमने पिछले ही हफ्ते सूबे के DGP से सवाल पूछा तो उन्होंने इसके लिए बिहार की बढ़ती जनसंख्या को जिम्मेदार ठहराया था।

मतलब ये कि जनसंख्या के हिसाब से ही अपराध के आंकड़े बढ़े हैं। DGP के इस दावे में कितनी सच्चाई है, इसका पता लगाने के लिए आपको बिहार की जनसंख्या की गणित को समझना होगा। 2011 की जनगणना के मुताबिक बिहार की कुल जनसंख्या 103,804,637। वहीं 2001 की जनगणना के मुताबिक बिहार की कुल आबादी 82,878,796 थी।

यानी 2001 से लेकर 2011 के बीच बिहार की जनसंख्या 25 फीसदी की दर से बढ़ी है, इसका जिक्र 2011 की जनगणना में भी है। अगली जनगणना 2021 में होगी लेकिन माना जाता है कि फिलहाल बिहार की आबादी 13 करोड़ के करीब है, यानी 2011 के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा। यानी 2001 से लेकर 2019 के बीच बिहार की आबादी में 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अगर अपराध के आंकड़ों पर फिर से गौर करें तो पाएंगे कि बीते इन्हीं बीते 18 सालों में अपराध के आंकड़ों में 162 फीसदी का इजाफा हुआ है। यानी जनसंख्या बढ़ी 50 फीसदी और अपराध बढ़े 162 फीसदी। फिर भी न जाने क्यों, बिहार के DGP को ये आंकड़े नहीं समझ आ रहे।

अब आप खुद फैसला करिए कि क्या नीतीश कुमार के शासनकाल को महाजंगलराज की श्रेणी में रखा जाना चाहिए या नहीं।