पिछले दिनों 25 मई को न्यूयार्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में पूरे भारत में मौत का आकड़ा झूठा बताया गया था, जिसको लेकर न्यूयार्क टाइम्स की काफी आलोचना हुई थी। हालांकि इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद मात्र 15 दिनों के अंदर ही बिहार सरकार ने राज्य में मौत का आकड़ा एक दिन में 5 हजार से बढ़ाकर 9 हजार कर दिया है। अब ऐसा करने के पीछे कारण बताया गया कि बिहार के सभी जिलों में वेरिफिकेशन करके मौत के आकड़ों को अपडेट किया गया है। लेकिन विपक्ष ने इसे वेरीफिकेशन मानने के बजाए सरकार को घेरने शुरु कर दिया और ऐसा घेरा कि सरकार को चारों खाने चित कर दिया। तेजस्वी यादव बोले नीतीश सरकार ही फ़र्जी है, तो आंकड़े भी तो फ़र्जी होंगे। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने तो नीतीश कुमार को झूठ का बेताज बादशाह बता दिया।

4 हजार मौत एक दिन में नहीं हुई है

नीतीश कुमार सरकार ने बुधवार को पूरे राज्य में मौत के आकड़े को 5,424 हजार से बढ़ाकर 9,375 कर किया है। असल में पिछले महीन अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर आने की वजह से काफी लोगों की जान चली गई और बिहार सरकार पर आरोप लगे कि वो मौत के आकड़ें छुपा रही है। जिसके बाद पटना हाईकोर्ट ने राज्य में मौत की संख्या पर आडिट करने को कहा इसलिए मौत के आकड़ों को आडिट करने के बाद अचानक से बदलाव किया गया है। नए आकड़ों के अनुसार पटना में सबसे ज्यादा मौतें हुई, 2,303 मौतों के साथ पटना पहले नंबर पर है। मुजफ्फरपुर में 609 और CM नीतीश का गृह जिला नालंदा 463 के साथा तीसरे नंबर है। इस तरह से 3,951 नई मौतें सामने आने से मौत के आकड़ों में 72.8 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

सरकार जो बता रही है उससे 20 गुणा अधिक हुई है मौतें

नीतीश सरकार ने आकड़ों में जो भी बदलाव किया उसे लेकर विपक्ष ने नीतीश पर सीधा हमला बोल दिया। तेजस्वी यादव ने कहा कि ‘नीतीश जी, इतना झूठ मत बोलिए कि उसके बोझ तले दबने के बाद कभी उठ ना पाएं। नीतीश सरकार मौतों का जो आंकड़ा बता रही है उससे 20 गुणा अधिक मौतें हुई है’।

आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने तो नीतीश कुमार को ‘झूठ का बेताज बादशाह बता डाला, साथ ही उन्हें अपना गणित और क,ख,ग ठीक कर लेने की सलाह दे दी’। वही प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार साधू ने कहा कि ‘ऐसे ही आंकड़ो की हेराफेरी कर मुख्यमंत्री बनें हुए है। फर्जीवाड़ा इनका पुराना गोरखघंघा है’

लेकिन मौत के आकड़ों में बदलाव करने से क्या होगा

एक तरफ तो हाईकोर्ट ने सराकर को फटकार लगाकर मौत का आकड़ा सही कराया है, तो दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि उसे आडिट करना जरूरी था क्योंकि इससे जमीनी हकीकत सामने लानी थी। क्योंकि, बिहार सरकार कोविड-19 की वजह से मरने वालों के लिए 4 लाख रुपए का मुआवजा दे रही है और सही आकड़ें होने से सरकार हर पीड़ित परिवार को मुआवजा दे सकती है। बिहार स्वास्थ विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मीडिया को बताया कि दूसरी लहर के आने पर प्राइवेट हॉस्पिटल में कई मौते कोविड की वजह से हुई है, लेकिन रजिस्टर्ड नहीं हो पाई। कुछ ऐसे घटनाएं भी हुई जिसमें मरीज की मौत हॉस्पिटल ले जाते समय हो गई थी। इसलिए राज्य सरकार ने सभी जिलों में आडिट किया और डिटेल रिपोर्ट जारी करी है। जिससे मौत का सही आकड़ा सामने लाया जाए और मुआवजा जारी किया जा सके।