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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव: भाजपा का गढ़, जहां से निकले दो मुख्यमंत्री; इतिहास और जातीय समीकरण

2025 चुनाव में नितिन नविन को 63.24% वोट मिले, राजद की रेखा कुमारी 30% से भी कम वोट लाकर दूसरे और जन सुराज पार्टी की वंदना कुमारी सिर्फ 5% वोट लाकर तीसरे स्थान पर रही।  

Reported By Umesh Kumar Ray |
Published On :
bankipur bypolls, a bjp stronghold that has produced two chief ministers; history and caste equations

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पटना साहिब लोकसभा सीट का हिस्सा है। यह पटना ज़िले का शहरी क्षेत्र है, इस सीट पर पूर्व में कांग्रेस से लेकर CPI और जनता पार्टी के नेता जीत दर्ज कर चुके हैं।


बांकीपुर का इतिहास

भाजपा से पटना साहिब के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के पिता व तबके जनसंघ नेता ठाकुर प्रसाद ने साल 1977 में इस सीट से जीत दर्ज की थी। उससे पहले साल 1963 में इसी सीट से चुनाव जीतकर कृष्ण बल्लभ सहाय मुख्यमंत्री बने थे। उनके बाद साल 1967 में महामाया प्रसाद सिन्हा यहाँ से चुनाव जीते और सीएम बने।

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बिहार में CPI के संस्थापक सचिव सुनील मुखर्जी भी इसी सीट से जीतकर 1972 में विधानसभा पहुँचे थे। 1995 में पहली बार यहाँ से भाजपा ने जीत दर्ज की और तब से लगातार यह सीट भाजपा के खाते में ही जाती रही है। 1995 में भाजपा के पुराने नेता व कारसेवक नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने यहाँ से जीत हासिल की थी। इसके बाद साल 2005 तक वह लगातार जीतते रहे। साल 2006 में उनकी मृत्यु हुई, तो उनके बेटे नितिन नवीन को उपचुनाव लड़ाया गया और पहली बार वह विधानसभा पहुँचे।


साल 2008 में परिसीमन के चलते पटना पश्चिमी सीट ख़त्म हो गई और नयी विधानसभा सीट बांकीपुर अस्तित्व में आई।

नितिन नवीन को पहली बार चुनाव लड़वाने में सुशील कुमार मोदी और नीतीश कुमार की अहम भूमिका थी। बताया जाता है कि नवीन किशोर प्रसाद राजनीति में नीतीश कुमार और सुशील मोदी के समकक्ष थे और उनके बीच दोस्ताना संबंध थे, इसी वजह से नितिन नवीन को चुनाव लड़ाने में मदद की थी। बाद में नितिन नवीन नीतीश की कैबिनेट में मंत्री भी बने।

साल 2022 में विधानसभा में नीतीश कुमार और नितिन नवीन के बीच बहस हो गई थी। तब नीतीश कुमार ने नितिन नवीन से कहा था कि जब तुम्हारे पिता की मृत्यु हुई थी तब पटना में सिर्फ़ 18 परसेंट वोटिंग हुई थी, तब आप जीते थे, हम लोग आपके लिए काम कर रहे थे। आपके पिताजी के साथ मेरा संबंध पौराणिक है। हम उनसे कितना प्रेम करते रहे, सम्मान करते रहे।

बांकीपुर का सियासी समीकरण

जब यह सीट पटना पश्चिमी हुआ करती थी, तब यहाँ कायस्थों की ठीकठाक आबादी थी। यही वजह है कि यहाँ से जीतने वाले ज़्यादातर नेता कायस्थ समाज से ही हैं। चाहे वे महामाया प्रसाद सिन्हा हों, कृष्ण बल्लभ सहाय हों, ठाकुर प्रसाद हों, CPI के टिकट पर जीते डॉ एके सेन, जो बंगाली कायस्थ थे या नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा।

हालांकि, परिसीमन के बाद कुर्मी, कोईरी और यादवों की भी ठीकठाक आबादी इस सीट में आ गई है, मगर एक बड़ी हिस्सेदारी अब भी कायस्थों की है। यहाँ कायस्थों का झुकाव भाजपा की तरफ़ माना जाता है, इसलिए पिछले कई चुनावों से लगातार यहाँ भाजपा जीतती रही है।

माना जा रहा है कि भाजपा से कोई कायस्थ नेता उम्मीदवार हो सकता है। क़यास लगाये जा रहे हैं कि भाजपा यहां अजय आलोक, नील रतन घोष या अजीत कुमार लाली पर दांव खेल सकती है। अजय आलोक और नील रतन घोष कायस्थ समाज से आते हैं। अजय आलोक पहले जदयू में थे। वहीं, नील रतन घोष के बारे में कहा जाता है कि वह, नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेहद करीबी थे और अभी नितिन नवीन के राजनीतिक फ़ैसलों में मदद करते हैं। वहीं, अजीत कुमार लाली वैश्य समाज से आते हैं और बांकीपुर क्षेत्र में काफ़ी सक्रिय हैं।

पिछले कुछ चुनाव पर नज़र डालें तो, 2006 उपचुनाव में यहाँ सिर्फ 18% पोलिंग हुई थी। नितिन नविन ने एक तरफ़ा 82.31% वोट लाकर कांग्रेस के अजय कुमार सिंह को हराया था।

वहीं 2010 के चुनाव में 72.06% वोट नितिन नविन को मिले, राजद के बिनोद श्रीवास्तव दूसरे स्थान पर रहे।

2015 में महागठबंधन होने के बावजूद नितिन नविन ने 60.19% वोट हासिल कर कांग्रेस के कुमार आशीष को हराया।

2020 में उन्हें 59.05% वोट मिले और कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा 31.3% वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे।

2025 चुनाव में नितिन नविन को 63.24% वोट मिले, राजद की रेखा कुमारी 30% से भी कम वोट लाकर दूसरे और जन सुराज पार्टी की वंदना कुमारी सिर्फ 5% वोट लाकर तीसरे स्थान पर रही।

हालांकि इस बार भी जन सुराज पार्टी जोरशोर से उपचुनाव में उतरने की तैयारी में है। ऐसा माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर ख़ुद चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस-राजद का प्रदर्शन इस सीट पर काफ़ी ख़राब रहा है, और पार्टी यहाँ कभी भी मज़बूती से नहीं लड़ती है। ऐसे में अगर प्रशांत किशोर ख़ुद चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो मुक़ाबला दिलचस्प हो सकता है।

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Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

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