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हिरासत में मौतों का केंद्र अररिया! फिर एक मौत, उठने लगे सवाल

मृतक के परिजन और सामाजिक संगठन इस मौत को संदिग्ध बताकर जेल पदाधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग कर रहे है।

hammad haider, araria Reported By Hammad Haider |
Published On :
araria is the centre of deaths in custody! another death, questions are being raised

बिहार के अररिया में एक सज़ायाफ्ता कैदी की जेल में हुई मौत से जिले की पुलिस प्रशासन व्यवस्था फिर से सवालों के घेरे में है। बीते 3 जुलाई को पश्चिम बंगाल के मालदा जिला निवासी शिबू घोष की जेल में संदिग्ध हालत में मृत्यु हो गई। 27 वर्षीय मृतक के शरीर पर खून के निशान मिले जिससे उसकी मौत के पीछे हिंसा की आशंका जताई जा रही है।


घटना वाले दिन शिबू का भाई इंद्र घोष अपनी पत्नी के साथ उससे मिलने जेल पहुंचा था। उसने बताया कि शिबू को दो पुलिसकर्मी गोद में उठाकर लाए और उसकी मृत्यु जेल में ही हो गई थी। बाद में शिबू को टोटो पर लादकर अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया।

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4 जुलाई को हिंदुस्तान अख़बार में छपी खबर के अनुसार मृतक शराब तस्करी के मामले में अगस्त 2020 से जेल में बंद था जबकि फरवरी 2021 में उसे 5 साल की सज़ा सुनाई गई थी। सज़ा ख़त्म होने में दो महीने ही बचे थे ।


इसी वर्ष मो. सोहराब खान और मिथिलेश राम नामक 2 कैदियों की भी पुलिस हिरासत में मौत हुई थी जिसपर ‘मैं मीडिया’ ने विस्तार से रिपोर्टिंग की थी।

मृतक के परिजन और सामाजिक संगठन इस मौत को संदिग्ध बताकर जेल पदाधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग कर रहे है।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि जेल प्रशासन ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया और उन्हें समय पर कोई जानकारी नहीं दी जिससे उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए थाने का चक्कर काटना पड़ा।

हिंदुस्तान अख़बार के अनुसार जेल प्रशासन का कहना है कि शिबू घोष पिछले दो साल से बीमार था और इलाज के लिए उसे पहले सदर अस्पताल, अररिया, फिर भागलपुर मेडिकल कॉलेज और अंत में पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था।

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हम्माद हैदर 2020 से अलग-अलग डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम कर रहे हैं। जनहित से जुड़ी ख़बरें करना उनकी प्राथमिकता है। उनके लिए काम करना ही शौक है, और वे हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश करते हैं। हम्माद बिहार के अररिया ज़िले के रहने वाले हैं।

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