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गैंगरेप सर्वाइवर की जिंदगी: मूंह से अब भी निकलता है खून, पति ने छोड़ दिया

अररिया जिले के भरगामा थाना क्षेत्र में हुए इस गैंगरेप की घटना का सरगना भी मोहम्मद मेजर ही है। मेजर पर पिछले दिनों एक पांच साल की बच्ची से बलात्कार का आरोप लगा है।

Tanzil Asif is founder and CEO of Main Media Reported By Tanzil Asif |
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लगभग साल भर पहले हुई दरिंदगी को याद कर गैंगरेप सर्वाइवर सबीना (बदला हुआ नाम) अब भी कांप जाती हैं। उस दरिंदगी का जख्म उनके जेहन में इतना गहरा उतर गया है जिंदगी उन्हें बोझ लगने लगी है।


गैंगरेप के बाद उन्हें इस बेरहमी से पीटा गया कि एक साल गुजर जाने के बाद भी शारीरिक जख्म नहीं सूखा है। उनके मुंह से अब भी खून निकल आता है।

उनकी शादी के बाद उनसे गैंगरेप किया गया था, तो पति ने भी बीच रास्ते में उन्हें छोड़ दिया।


अररिया जिले के भरगामा थाना क्षेत्र में हुए इस गैंगरेप की घटना का सरगना भी मोहम्मद मेजर ही है। मेजर पर पिछले दिनों एक पांच साल की बच्ची से बलात्कार का आरोप लगा है। रविवार को पुलिस ने उसे अररिया से ही गिरफ्तार कर लेने का दावा किया।

सबीना और उसके परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस ने उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की होती, तो उस बच्ची के साथ ये घटना न घटती।

“आरोपित खुले आम इलाके में घूमता रहा, ब्लॉक थाने में आता जाता था। पुलिस वालों से मिलता था। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुआ। क्योंकि वो पैसा खिला देता है,”

सबीना के पिता ने कहा।

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एसपी ने इस मामले में बताया कि उस घटना के बाद गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने छापेमारी की थी, लेकिन वो फरार हो गया था।

सबीना अपने साथ हुई घटना को याद करते हुए सिहर जाती हैं।

“सात लड़के थे। इनका सरगना मोहम्मद मेजर था। तीन लड़के भाग गये थे। बाकी चार लड़कों ने मिलकर गैंगरेप किया। इनमें मो. मेजर, सद्दाम और इस्तखार का नाम मुझे याद है। चौथे का नाम मैं नहीं जानती। उनका चेहरा मुझे अब भी याद है। सभी को पहचान लूंगी,” सबीना कहती हैं।

सबीना ने पांचवीं तक ही पढ़ाई की है। वे आगे बताती हैं,

“हमको उनको लोगों ने छाती पर चढ़ कर मारा, तभी मैं दवा खा रही हूं। अभी तक दवाई चल रही है। उस घटना के बाद से मुंह से खून निकलता है। उस समय मेरा एक्सरे हुआ था। रिपोर्ट वगैरह मैडम जी के पास है।”

गैंगरेप की ये घटना पिछले साल 26 अक्टूबर को हुई थी और 27 अक्टूबर को पीड़िता ने थाने में मामला दर्ज कराया था। सबीना कहती हैं,

“मैं शाम 4 बजे हाट करने चकमाका बाजार गई थी। वापस लौटते वक़्त रास्ते में मेजर परेशान करने लगा और मेरा दुपट्टा छीन लिया। जब मैं शोर करने लगी, तो आसपास के लोग जमा हो गए। लोगों के पूछने पर हमने बताया कि मेजर मुझसे रेप करना चाहता है। वहीं मुझे एक परिचित मिला, जिसने अपनी गाड़ी से मुझे घर छोड़ने की बात कही।”

“वो मुझे अपनी गाड़ी में बिठाकर घर ला रहा था कि रास्ते में सात लोगों घेर लिया और बन्दूक दिखा कर अपने साथ फाटक के पास ले गए। वहां चार लोगों ने मिलकर बलात्कार किया और तडके 4 बजे घर के करीब छोड़ गया। मुझे धमकी दी गई कि किसी को घटना के बारे में बताया, तो मां-बाप सब को मार देंगे। हम डर के मारे घर चले आए। घर आने के बाद गांव समाज के लोगों ने पूछा, तो मैंने पूरी बात बता दी और फिर मामला दर्ज कराने अररिया गए,” उन्होंने कहा।

लेकिन, अपराधी अपराध करने के बाद भी लगातार प्रताड़ित करते रहे। मेजर ने पीड़िता पर केस हटाने के लिए काफी दबाव बनाया। यहां तक कुछ पैसे लेकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई और धमकाया भी गया।

“25,000 रुपए लेकर मामले को रफा-दफा करने को कहा।, लेकिन हमने रुपया नहीं लिया। उसके बाद उनलोगों ने हमें घर से अगवा करने की कोशिश की। लोग इकठ्ठा हुए, तो वे लोग भाग गये। जाते-जाते गांव वाले को धमकी दे गया और हमको कहा कि अगर केस करोगे तो गोली मार देंगे। इस डर से गांव समाज के लोगों ने भी साथ छोड़ दिया,” सबीना ने बताया।

इसके बाद मेजर ने दोबारा घर जाकर सबीना को धमकी दी।

सबीना बताती हैं, “मेजर ने दोबारा कहा कि केस उठा लो, रुपया ले लो, लेकिन हमने कहा कि हमारी इज्जत गई है, इज्जत नहीं ना लौटेगी। हम रुपया लेकर क्या करेंगे।”

पीड़िता के पिता दिल्ली में मजदूरी करते हैं और पिछले कुछ महीनों से गांव में ही हैं।

उन्होंने बताया, “घटना के बाद पिछले ढाई-तीन महीने से घर पर हूं। केस लड़ने में अबतक लगभग 80,000 रुपए खर्च हो चुके हैं। लेकिन अभी तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिला है।”

वारदात से छह महीने पहले ही सबीना का निकाह हुआ था। वो शादी के बाद बहुत खुश थी। लेकिन इस घटना ने उनकी दुनिया बसाने से पहले ही उजाड़ दी। उनसे गैंगरेप की घटना जब मीडिया में उछला, तो पति ने अपने साथ रखने से इनकार कर दिया।

“मेरी शादी हो गई थी। 6 महीने बचे थे विदाई में, लेकिन इस मामले के बाद लड़के ने मुझे छोड़ दिया। उसने साफ शब्दों में कहा कि वह मुझे नहीं रखेगा,” सबीना बताती हैं।

स्थानीय दो लोगों ने इस नाजुक मौके पर न केवल पीड़िता का साथ दिया बल्कि केस को अंज़ाम तक पहुंचाने में भी मदद की।
सबीना कहती हैं,

“निजाम सरपंच और असलम बेग ने हमारी बहुत मदद की है। घटना के वक्त से ही दोनों मेरे साथ हैं।”

सबीना को इंसाफ चाहिए। लेकिन अपराधी का रसूख और खौफ इतना है कि उन्हें अपनी जान का खतरा बताया रहता है। वे न्याय की गुहार लगाते हुए कहती हैं,

“अब आप ही लोग मेरा इंसाफ करवा सकते हैं। घटना के बाद से वह (मेजर) गांव के आसपास ही रहता था, कहता था कि जेल जाएंगे तो लड़की को गोली मारकर जाएंगे।”

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तंजील आसिफ एक मल्टीमीडिया पत्रकार-सह-उद्यमी हैं। वह 'मैं मीडिया' के संस्थापक और सीईओ हैं। समय-समय पर अन्य प्रकाशनों के लिए भी सीमांचल से ख़बरें लिखते रहे हैं। उनकी ख़बरें The Wire, The Quint, Outlook Magazine, Two Circles, the Milli Gazette आदि में छप चुकी हैं। तंज़ील एक Josh Talks स्पीकर, एक इंजीनियर और एक पार्ट टाइम कवि भी हैं। उन्होंने दिल्ली के भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से मीडिया की पढ़ाई और जामिआ मिलिया इस्लामिआ से B.Tech की पढ़ाई की है।

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