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बारिश नहीं होने से खेती पर असर, 30% से कम हुई धान की बुआई

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women sowing paddy plants in kishanganj

बिहार के किशनगंज जिले के सत्तर फीसदी लोग खेती पर निर्भर हैं। लेकिन राज्य सरकार का ध्यान यहां के किसानों पर नहीं है। किसान एक तरफ मौसम की मार झेल रहे हैं, तो दूसरी तरफ खेती खराब होने से कर्ज के दलदल में फंसे जा रहे हैं।


इस बार भी बादलों के रूठने से किसानों की मुसबीत बढ़ गयी है और बारिश न होने के कारण अब सूखे की आशंका है। इसका असर खेती पर भी दिखाई दे रहा है। लगभग आधी जुलाई बीतने के बावजूद दूर-दूर तक मानसून की बारिश के आसार नहीं दिख रहे हैं। धान की फसल के लिए खेत तैयार होने के बावजूद अभी तक बुआई नहीं हुई है।

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अगर पम्प सेट के माध्यम से कहीं धान रोपा भी गया है, तो एक बार पानी भरने के बाद चटक धूप के चलते खेत पूरी तरह सूख गया है। कड़ी धूप से धान के पौधों के झुलसने का खतरा भी बना हुआ है। यहां के ज्यादातर किसान गरीब हैं। उनके पास उतना पैसा नहीं कि महंगा डीजल खरीद कर सिंचाई कर सकें।



यह भी पढ़ें: वादों और घोषणाओं में सिमटा अररिया का खुला चिड़ियाघर


खराब मौसम के चलते अब तक जिन खेतों में धान की रोपाई हो जानी चाहिए थी, उन खेतों में धूल उड़ रही है। किसानों की आंखें आसमान की तरफ टकटकी लगाए देख रही हैं कि कब इंद्रदेव मेहरबान होंगे और बारिश होगी।

सरकार कृषि क्षेत्र में किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की बात कहती है। इसके बावजूद सिंचाई की समुचित व्यवस्था के अभाव में बहादुरगंज, कोचाधामन, टेढ़ागाछ और किशनगंज प्रखंड के किसान भाग्य भरोसे खेती करने को मजबूर हैं।

सभी प्रखंडों में सिंचाई के लिए सरकारी बोरिंग तो लगाई गई है। लेकिन रख-रखाव के अभाव में अधिकांश बोरिंग खराब व बंद पड़ी हुई है। वर्षों से खराब रहने के कारण धीरे-धीरे किसानों में सरकारी बोरिंग से सिंचाई को लेकर उदासीनता बढ़ रही है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि बंद पड़ी बोरिंग को चालू करने के लिए प्रशासनिक आला अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से गुहार लगायी गयी है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसका नतीजा यह है कि बंद पड़ी सभी बोरिंग धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रही हैं।

उधर AIMIM नेता अख्तरुल ईमान ने इस क्षेत्र को सुखाड़ प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की मांग की है।

कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष 81 हजार 5 सौ 57 हेक्टेयर जमीन में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन, बारिश कम होने से अब तक मात्र 23 हजार 4 40 हेक्टेयर में ही धान की फसल की बुआई हो पाई है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 70 फीसदी कम है।

जुलाई माह तक महज 36.26 मिलीमीटर बारिश

इस वर्ष जुलाई माह तक सामान्यतः 481.31 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक महज 36.26 मिलीमीटर बारिश हुई है। जबकि पिछले वर्ष जुलाई के दूसरे सप्ताह में 248.42 मिलीमीटर बारिश हुई थी।

सिंचाई के लिए परेशान किसानों की परेशानियों को लेकर जब किशनगंज जिला पदाधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जिले में कुल 82 नलकूल लगे हैं, जिनमें से 55 नलकूप क्रियाशील हैं और 27 नलकूप खराब पड़े हैं। उन्हें भी जल्द ठीक करने का निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि बिजली की व्यवस्था जिले में चुस्त दुरुस्त है। किसान बिजली की मदद से मोटर लगाकर अपने खेतों में पानी पटा सकते हैं।


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